112 ऋषि प्रसादः अप्रैल 2002

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

सामान्य ज्ञान और विशेष ज्ञान


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से ज्ञान नित्य है, अनादि है और अनंत है। ज्ञान का न जन्म होता है न मृत्यु। ज्ञान दो प्रकार का होता है – एक होता है सामान्य सत्ता का ज्ञान और दूसरा होता है करणजन्य ज्ञान। सामान्य सत्ता का ज्ञान नित्य है। करणजन्य विशेष ज्ञान सापेक्ष है। …

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सत्यं ब्रूयात्….


सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् असत्यमप्रियम्। सत्य बोलो, प्रिय बोलो किन्तु अप्रिय (अकल्याणकारी), असत्य मत बोलो। जो व्यक्ति झूठ बोलता है, उसकी वाणी का प्रभाव कम हो जाता है, उसके दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं और जो सत्य बोलता है, मधुर बोलता है, उसकी हिम्मत बढ़ जाती है। जो किसी की निंदा करता …

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संतों की हनुमत-उपासना


हनुमान जयंतीः 27 अप्रैल 2002 हनुमान जी का जीवन पुरुषार्थ और साहस की प्रेरणा देता है, संयम एवं सदाचार की प्रेरणा देता है, निष्काम सेवा की प्रेरणा देता हैः राम काज बिनु कहाँ  विश्रामा… मनोजवं मारूततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि।। ‘जिनकी मन के समान गति और वायु के समान वेग है, …

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