ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

जो संकेत पाकर भी नहीं सुधरते उनका यही हाल होता है !


महाभारत में कर्ण के हितैषी सारथी शल्य ने कर्ण को कर्तव्य-अकर्तव्य का गूढ़ रहस्य एवं जीवन का गहन सत्य-सिद्धान्त समझाने के लिए एक दृष्टांत कथा बताते हुए कहाः “समुद्र के तट पर एक धर्मात्मा वैश्य रहता था । उसके बहुत से पुत्र थे । उनकी जूठन खाकर पला हुआ कौआ बड़े घमंड में भर के …

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तो कठिन का बाप भी तुम्हारे लिए सरल हो जायेगा – पूज्य बापू जी


विज्ञानियों ने एक प्रयोग किया । 8 वीं कक्षा के 30 विद्यार्थियों को 2 खंडों में रख दिया । पहले खंड के 15 विद्यार्थियों को बोला क “बोर्ड पर यह जो गणित के सवाल लिख रहे हैं, तुम्हें इसका जवाब लिखना है लेकिन कठिन है दोस्तो ! यह तो दसवीं वाले भी नहीं कर सकते …

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अंतरात्मा में सुखी रहो और सुखस्वरूप हरि का प्रसाद बाँटो-पूज्य बापू जी


भारतीय संस्कृति कहती हैः सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु । सर्वः सद्बुद्धिमाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु ।। सर्वस्तरतु दुर्गाणि…. हम सब अपने दुर्ग से, अपने-अपने कल्पित दायरों से, मान्यताओं ते तर जायें । सर्वो भद्राणि पश्यतु… हम सब मंगलमय देखें । सर्वः सद्बुद्धिमाप्नोतु…. हम सबको सदबुद्धि प्राप्त हो । बुद्धि तो सबके पास है । पेट …

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