ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

सब कुछ दिया, वह न दिया तो क्या दिया ?


रतनचंद नाम के एक सेठ महात्मा बुद्ध के पास दर्शन करने आये । वे साथ में बहुत सारी सामग्री उपहारस्वरूप लाये । वहाँ उपस्थित जनसमूह एक बार तो ‘वाह-वाह !’ कर उठा । सेठ का सीना तो गर्व से तना जा रहा था । बुद्ध के साथ वार्तालाप प्रारम्भ हुआ तो सेठ जी ने बतायाः …

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अस्थिर व नाशवान के झोंकों में कर सकते हो सहज योग


वैराग्य शतक के 37वें श्लोक का अर्थ हैः ‘हे बुद्धिमानो ! शरीरधारी प्राणियों के सुखभोग मेघों के विस्तार के बीच चमकने वाली बिजली के समान अस्थिर हैं । जीवन हवा के झोंकों से कम्पित कमल के पत्ते पर पड़े हुए जलबिंदु के समान नाशवान हैं। जवानी की उमंगे और वासनाएँ भी अत्यंत अस्थिर हैं । …

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दो घंटे की भूख ने बदला जीवन


18वीं शताब्दी की बात है । दक्षिण भारत में मदुरै शहर के एक ब्राह्मण परिवार में सोमनाथ योगी के घर में एक बालक का जन्म हुआ । नाम रखा गया शिवरामकृष्ण । उसे बाल्यकाल से ही भक्ति का रंग लग गया । माता-पिता ने उसे वेदांत-अध्ययन हेतु तिरुविसनल्लूरू के गुरुकुल में भेजा । 15 साल …

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