ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

….तब भगवान में हमारी प्रीति होती है – पूज्य बापू जी


मेरे मित्रसंत लाल जी महाराज ने मेरे को बताया कि एक मकान के बरामदे में बूढ़ा और बूढ़ी अपने पोते को खेल खिला रहे थे । मैं उधर से जाते-जाते खड़ा हो गया । बूढ़ी बोले जा रही थीः “मेरा बबलू ! और मेरा राजा ! ओ मेरा प्रभु ! ओ मेरा प्यारा !…” बच्चे …

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मोक्षसुख बरसाने वाले सद्गुरु के छः रूप


आचार्यो मृत्युर्वरूणः सोम ओषधयः पयः । जीमूता आसन्तसत्वानस्तैरिदं स्वऽराभृतम् ।। ‘सद्गुरु मृत्युरूप, वरूणरूप, सोमरूप, औषधिरूप, पयरूप और मेघरूप हुए हैं । उनके द्वारा यह मोक्षसुख लाया गया है अर्थात् उन्होंने ही साधक में वह नया आत्मबोध भर दिया है ।’ (अथर्ववेदः कांडः 11, सूक्त 7, मंत्र 14) इस मंत्र में वेद भगवान ने सद्गुरु के …

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स्वास्थ्य का आधारः पथ्य-अपथ्य विवेक


पथ्ये सति गदार्तस्य किमौषधनिषेवणैः । पथ्येऽसति गदार्तस्य किमौषधनिषेवणैः ।। पथ्य हो तो औषधियों के सेवन की क्या आवश्यकता है ? पथ्य न हो तो औषधियों का कोई फल ही नहीं है । अतः सदैव पथ्य का ही सेवन करना चाहिए । पथ्य अर्थात् हितकर । हितकर का सेवन व अहितकर का त्याग करने हेतु पदार्थों …

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