क्या आश्रम के साधक ही अपने वाहनों के काँच तोडकर वाहन जलायेंगे? अगर ’ना’
तो आश्रम विरोधी तत्वो और भारतीय संस्कॄति के शत्रुओं द्वारा आयोजन पूर्वक का यह
षडयंत्र था ।
क्या आश्रम अथवा संत श्री आसारामजी बापू, आश्रम में किराये के गुंडे
मँगवाकर आश्रम में चलकर आ रहे श्रद्धालुओं पर हमला करके चोट पहुँचा सकते हैं?
हाथ-पैर तोडेंगे क्या? अगर ’ना’ तो, आश्रम समर्पित सेवाधारी और संचालकों के नाम
मीडिया में सत्य से दूर और बिना आधार के प्रचार-प्रसार करके आश्रम और विश्ववंदनीय
संत श्री आसारामजी बापू की देदीप्यमान प्रतिभा को तोड्ने का एक आयोजनबद्ध षडयंत्र
है ।
आश्रम के विरोधी और हिन्दु संस्कॄति के विरोधियों ने वाहनों में भर-भरकर
किराये के गुंडों को मँगवाकर उत्पात मचाया । यह गुरूकुल के दो बालकों की आकस्मिक
मॄत्यु की आड में विश्वप्रसिद्ध संत को बदनाम करने का सुनियोजित षडयंत्र है, गन्दी
रजनीति खेलने का घिनौना प्रयास है ।
किराये के गुंडों ने आश्रम व साधकों के अनेक वाहनों की तोड-फ़ोड की और वाहन
जलाये ।
पैदल आने-जानेवाले भक्तों के ऊपर पथराव किया और मोटर बाईकों के द्वारा उनको
कुचला गया । फ़िर भी भक्त सहन करते हुए आगे बढे ।
बसों में आनेवाले साधकों को बसें रोककर उतारकर उनको अपमानित किय गया, बहनों
की शारीरिक छेडछाड की गई ।
महिला आश्रम में असामाजिक तत्वों का आक्रमण करके साधिकाओं के साथ शारीरिक
छेडछाड की ।
समग्र आश्रम परिसर में भय का वातावरण फ़ैलाया ।
सफ़ेद वस्त्र पहनकर कुछ असामाजिक तत्वों ने गुंडागर्दी की तकि आश्रम को
बदनाम किया जा सके ।
पूज्य बापूजी सतत व्यासपीठ पर से लाखों श्रद्धालुओं को शांत रहने की अपील
कर रहे थे । पुज्यश्री ने वातावरण शांत न हो तब तक अपील की ।
मॄतक बालकों के परिवार को सांत्वना देने पूज्य बापूजी सुबह ६.३० बजे उनके
घर पहुँचे व बालकों को श्रद्धांजलि दी ।