अवतरण दिवस

अवतरण दिवस का वंदन है ! गुरुदेव कोटि अभिनंदन है !!

 
 

नारायण के रूप में कृष्णा कहो या राम , नए रूप में आये हैं, सदगुरु आशाराम

Avataran divas Badhai Ho

 
 
 
 

विश्ववंदनीय ब्रह्मनिष्ठ पूज्य लोकसंत

श्री आशारामजी बापू का

अवतरण दिवस

अर्थात्

विश्व सेवा-सत्संग दिवस

प्रातःस्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ऐसे महापुरुष हैं जिन्होंने अपने शिष्यों को भक्तियोग और ज्ञानयोग के साथ-साथ कर्मयोग भी सिखाया है । पूज्यश्री का कहना है कि कर्म करने की कला जान लो और उसे कर्मयोग बनाओ तो कर्म आपको बाँधनेवाले नहीं, भगवान से मिलानेवाले हो जायेंगे । भगवान ने हमें जो जानने, मानने और करने की शक्तियाँ दी हैं, उनका सदुपयोग करो । परहित में सत्कर्म करने से करने की शक्ति का सदुपयोग होता है ।

पूज्य बापूजी के इन्हीं वचनों का आदर करते हुए पूज्यश्री के शिष्यों द्वारा पूरे भारत में आपका अवतरण-दिवस हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 'सेवा-सत्संग दिवस' के रूप में मनाया गया । इस अवसर पर देश-विदेश में फैले आश्रम-संचालित हजारों बाल संस्कार केन्द्रों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न कार्यक्रम किये गये और भोजन-प्रसाद का वितरण किया गया । संत श्री आशारामजी आश्रम की 425 शाखाओं एवं 1400 सेवा समितियों द्वारा अपने-अपने गाँवों, नगरों, शहरों में आध्यात्मिक जागृति हेतु हरिनाम संकीर्तन यात्राएँ निकाली गयीं । साथ ही झुग्गी-झोपड़ियों में गरीब-गुरबों को, बेसहारा विधवाओं को, अनाथालयों में अनाथों को, आदिवासी क्षेत्रों में अभावग्रस्तों को और अस्पतालों में मरीजों को अन्न, फल, औषधि, वस्त्र आदि जीवनोपयोगी वस्तुएँ तथा आर्थिक सहायता प्रदान कर कई-कई प्रकारों से इस 'संत अवतरण-दिवस' पर सेवा-सुवास महकायी गयी । सत्साहित्य-वितरण, बच्चों में नोटबुकें, पेन, पेंसिल आदि का वितरण, 'निःशुल्क चिकित्सा शिविरों' का आयोजन, व्यसनमुक्ति अभियान, 'युवा सेवा संघ' द्वारा युवाओं की उन्नति के लिए तथा 'महिला उत्थान मंडल' द्वारा नारी उत्थान के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया । अवतरण-दिवस से शुरू करके पूरी गर्मियों में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन इत्यादि विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर निःशुल्क छाछ वितरण केन्द्र, जल प्याऊ, शीतल शरबत वितरण केन्द्र आदि का भी शुभारम्भ किया गया ।

करुणा-वरुणालय पूज्य बापूजी ने जब देखा कि गरीब वर्ग के लोग काम करने जाते हैं तो साथ में जो भोजन लेकर जाते हैं, वह दोपहर तक ठंडा हो जाता है । इससे वे मंदाग्नि आदि पेट की बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं । यह जानकर सबको आत्मस्वरूप जाननेवाले बापूजी का हृदय करुणा से भर आया और उन्होंने देश के गरीबों में गर्म भोजन के डिब्बों का प्रसादरूप में वितरण शुरू करवा दिया ।

इस प्रकार 'वासुदेवः सर्वम्' - यह पूरी सृष्टि परमात्मा का ही प्रकट स्वरूप है - इस भाव से दीन-दुःखियों, जरूरतमंदों एवं सम्पूर्ण समाज की निःस्वार्थ भाव से सेवा करके संत श्री आशारामजी बापू एवं उनके करोड़ों अनुयायी कर्म को कर्मयोग बनाने की कला का प्रत्यक्ष उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं । साथ ही 'सर्वे भवन्तु सुखिनः...' - 'सबका मंगल, सबका भला' की भावना को अपने जीवन में सुदृढ़ बनाते हुए समाज में एक सुसंदेश फैला रहे हैं । अद्वैत वेदांत के सर्वोच्च आध्यात्मिक सिध्दांत को रोजमर्रा के जीवन में प्रत्यक्ष उतारनेवाले ये सद्गुरु के निःस्वार्थ सेवक मानो समाज को संदेश दे रहे हैं - 'आओ, संसाररूपी कर्मभूमि को कर्मयोग का अवलम्बन लेकर नंदनवन बनायें ।'

आध्यात्मिक गुरु आशारामजी बापू के अनुयायियों ने एक ओर तो अपने गुरुदेव से प्राप्त कर्मयोग की शिक्षा को व्यावहारिक रूप देकर जनसेवा अभियान चला रखा है तो दूसरी ओर ज्ञानयोग और भक्तियोग के पोषण हेतु महाराजश्री के अवतरण दिवस से अवतरण दिवस पूरे वर्ष भर सत्संग, ध्यान, भजन तथा संकीर्तन यात्राएँ आदि का भी विश्वस्तरीय नियोजन किया जा रहा है ।

Shri Asharamayan

Seva Activities

On the occasion of Avataran Divas, Pujya Bapuji's sadhaks do a lot of welfare activities across the world by doing bhandaras, distributing buttermilk, distributing fruits in hospitals, distributing Topi (caps) for poor, distributing sahitya, organising Sankirtan Yatras and much more...

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