गणेश चतुर्थी

गणपति बप्पा मोरिया ...

 

चंद्रदर्शन निषिद्ध 
इस वर्ष (2018)  12 सितम्बर (चन्द्रास्त : रात्रि 8.59 बजे) व 13 सितम्बर (चन्द्रास्त : रात्रि 9.42 बजे) - दो दिन चन्द्र-दर्शन निषिद्ध है । |

|| ॐ गं गणपतये नमः | |

this mantra should be chanted calmly on this auspicious day as much as one can.

.. श्रीगणेशस्तोत्र ..


श्रीगणेशाय नमः . नारद उवाच .

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् .
भक्तावासं स्मरेनित्यं आयुःकामार्थसिद्धये .. १..

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् .
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् .. २..

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च .
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् .. ३..

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् .
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् .. ४..

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः .
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरः प्रभुः .. ५..

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् .
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् .. ६..

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् .
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः .. ७..
अष्टेभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् .
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः .. ८..

गणेश जी श्रीविग्रह देता सुन्दर प्रेरणाएँ

- पूज्य बापू जी

जो इन्द्रिय-गणों का, मन बुद्धि गणों का स्वामी है, उस अंतर्यामी विभु का ही वाचक है ʹगणेशʹ शब्द। ʹगणानां पतिः इति गणपतिः।ʹ उस निराकार परब्रह्म को समझाने के लिए ऋषियों ने और भगवान ने क्या लीला की है ! कथा आती है, शिवजी कहीं गये थे। पार्वती जी ने अपने योगबल से एक बालक पैदा कर उसे चौकीदारी करने रखा। शिवजी जब प्रवेश कर रहे थे तो वह बालक रास्ता रोककर खड़ा हो गया और शिवजी से कहाः "आप अन्दर नहीं जा सकते।"

शिवजी ने त्रिशूल से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। पार्वती जी ने सारी घटना बतायी। शिवजी बोलेः "अच्छा-अच्छा, यह तुम्हारा मानस-पुत्र है तो हम भी इसमें अपने मानसिक बल की लीला दिखा देते हैं।" शिवजी ने अपने गणों से कहाः "जाओ, जो भी प्राणी मिले उसका सिर ले आओ।" गण हाथी का सिर ले आये और शिवजी ने उसे बालक के धड़ पर लगा दिया। सर्जरी की कितनी ऊँची घटना है ! बोले, ʹमेरी नाक सर्जरी से बदल दी, मेरा फलाना बदल दिया....ʹ अरे, सिर बदल दिया तुम्हारे भोले बाबा ने ! कैसी सर्जरी है ! और फिर इस सर्जरी से लोगों को कितना समझने को मिला !

समाज को अनोखी प्रेरणा गणेश जी के कान बड़े सूप जैसे हैं। वे यह प्रेरणा देते हैं कि जो कुटुम्ब का बड़ा हो, समाज का बड़ा हो उसमें बड़ी खबरदारी होनी चाहिए। सूपे में अन्न-धान में से कंकड़-पत्थर निकल जाते हैं। असार निकल जाता है, सार रह जाता है। ऐसे ही सुनो लेकिन सार-सार ले लो। जो सुनो वह सब सच्चा न मानो, सब झूठा न मानो, सार-सार लो। यह गणेश जी के बाह्य विग्रह से प्रेरणा मिलती है। गणेश जी की सूँड लम्बी है अर्थात् वे दूर की वस्तु की भी गंध लेते हैं। ऐसे ही कुटुम्ब का जो अगुआ है, उसको कौन, कहाँ, क्या कर रहा है या क्या होने वाला है इसकी गंध आनी चाहिए। हाथी के शरीर की अपेक्षा उसकी आँखें बहुत छोटी हैं लेकिन सुई को भी उठा लेता है हाथी। ऐसे ही समाज का, कुटुम्ब का अगुआ सूक्ष्म दृष्टिवाला होना चाहिए। किसको अभी कहने से क्या होगा ? थोड़ी देर के बाद कहने से क्या होगा ? तोल-मोल के बोले, तोल-मोल के निर्णय करे।

भगवान गणेश जी की सवारी क्या है ? चूहा ! इतने बड़े गणपति चूहे पर कैसे जाते होंगे ? यह प्रतीक है समझाने के लिए कि छोटे-से-छोटे आदमी को भी अपनी सेवा में रखो। बड़ा आदमी तो खबर आदि नहीं लायेगा लेकिन चूहा किसी के भी घर में घुस जायेगा। ऐसे छोटे से छोटे आदमी से भी कोई न कोई सेवा लेकर आप दूर तक की जानकारी रखो और अपना संदेश, अपना सिद्धान्त दूर तक पहुँचाओ। ऐसा नहीं कि चूहे पर गणपति बैठते हैं और घर घर जाते हैं। यह संकेत है आध्यात्मिक ज्ञान के जगत में प्रवेश पाने का

गणेश-विसर्जन का आत्मोन्नतिकारक संदेश गणेशजी की मूर्ति तो बनी, नाचते-गाते विसर्जित भी की, निराकार प्रभु को साकार रूप में मानकर फिर साकार आकृति भी विसर्जित हुई लेकिन इस भगवद्-उत्सव में नाचना-कूदना झूमना तुम्हारे दिल में कुछ दे जाता है। रॉक और पॉप म्यूजिक पर जो नाचते-कूदते हैं, उनको भी कुछ दे जाता है जैसे – सेक्सुअल आकर्षण, चिड़चिड़ा स्वभाव, जीवनशक्ति का ह्रास.... लेकिन गजानन के निमित्त जो नाचते-गाते झूमते हैं, उन्हें यह उत्सव सूझबूझ दे जाता है कि सुनो सब लेकिन छान-छानकर सार-सार ही मन में रखो। दूर की भी गंध तुम्हारे पास होनी चाहिए। छोटे-से-छोटे आदमी का भी उपयोग करके अपना दैवी कार्य करो।

गणेश विसर्जन कार्यक्रम आपको अहंकार के विसर्जन, आकृति में सत्यता के विसर्जन, राग-द्वेष के विसर्जन का संदेश देता है। बीते हुए का शोक न करो। जो चला गया वह चला गया। जो चीज-वस्तु बदलती है उसका शोक न करो। आने वाले का भय न करो। वर्तमान में अहंकार की, नासमझी की दलदल में न गिरो। तुम बुद्धिमत्ता बढ़ाने के लिए ʹૐ गं गं गं गणपतये नमःʹ का जप किया करो और बच्चों को भी सिखाओ। बिल्कुल सुंदर व्यवस्था हो जायेगी !

Lord Ganesha and Moon


Once Lord Ganesha was walking in His own delightful rhythm. It was the fourth lunar day (chaturthi). The Moon god saw him. The Moon god was very vain about his good looks. He said with a bitter sarcasm to Lord Ganesha, "What a beautiful form you have! A big belly and an elephant's head...".

Lord Ganesha realized that the Moon's vanity will not go without his being appropriately punished for the same. Lord Ganesha said, "Your face will not be worth showing to anybody."
The Moon did not rise after that. The gods were worried, "The whole department that nourishes the earth has been closed! How will the medicinal herbs be enriched? How will the affairs of the world be conducted?"
Lord Brahma said, "The Moon's insolence has angered Lord Ganesha."
The gods worshipped Lord Ganesha in order to propitiate him. When Lord Ganesha was pleased, the Moon's face became worth showing to others. The Moon god prayed to Lord Ganesha with hymns.
Lord Ganesha said, "Your face will be worth showing on other days of the year, but on the fourth lunar day of the bright fortnight of Bhadrapada, the day when you insulted me, whoever sees you will be slandered with a serious blemish within a year. This is necessary to give the message to the people that 'No one should be vain regarding one's physical beauty and charm.'
The Lord of all the gods and senses is the Self. You are ridiculing a Self-Realized personality like me? You are finding faults with my physical form and are proud of your external beauty? You are ignorant of Me, the Self, the source of all beauty, that lends beauty to your external form. That Self alone exists. He alone is seen in the forms of Lord Narayana, Lord Ganesha, Lord Shiva as also in all beings. O Moon! Even your real Being is That very Self. Don't be proud of your external beauty."
Even the likes of Lord Krishna was accused of stealing the 'Syamantaka Gem', because He happened to see the Moon on that particular fourth lunar day. Even His brother Balrama joined the accusers; though, in fact, Lord Krishna had not stolen the 'Syamantaka Gem'.

Those who don't believe in the truth of this incident, who are sceptical of the scriptures, are invited to test its veracity by looking at the Moon on the fourth lunar day of the bright fortnight of Bhadrapada (Ganesh Chaturthi). A sceptic will pay the cost of disbelieving the scriptures retold in satsang. Within a year, he will be the victim of such a great blemish as will completely vitiate his dignity.

Tips

विघ्न-निवारण व् मेधा-शक्ति वर्धक प्रयोग

इस दिन "ॐ गं गणपतये नमः" का जप करने और गुड-मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दूर्वा व सिन्दूर की आहुति देने से विघ्न-निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढती है |

कोई कष्ट हो तो – –

हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याऐं आ रही हैं वो नष्ट हों |

छः मंत्र इस प्रकार हैं –
ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।
ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।
ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।
ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दुसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और प्रमोदी को जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।
ॐ अविघ्नाय नम:
ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:

Drive away troubles from your life

Human life is infested with many troubles. We are always confronted with one problem or the other. People who have lot of troubles in their life can do one experiment prescribed in Shiva Puran. According to Shiva Puran, on the fourth day of the waning moon cycle (means four days after a full moon night), one should bow his head to lord Ganesha, chant these six mantras and pray to him to remove the obstacles in ones life. Those six mantras as follows:

AUM SUMUKHAYA NAMAH one having a beautiful face. May our face also be endowed with the beauty of devotion.
AUM DURMUKHAYA NAMAH one who does not let evil tendencies harm or disturb his devotees
AUM MODAAYA NAMAH one who is always joyful and all those who pray to him are also joyful
AUM PRAMODAYA NAMAH one who always impart joy and happiness to others. A devotee always remains in bliss whereas an agnostic is lazy.An agnostic is devoid of lashmi where as lakshmi stays with one who is devoted to lord.
AUM AVIGHNAAYA NAMAH
AUM VIGHNAKARTRYEYA NAMAH

Precautions on Ganesh Chaturthi

Refrain seeing Moon on Ganesh Chaturthi

This year Ganesh-Chaturthi falls on the 13th of Sept, 2018. It is extremely harmful to look at the Moon on Ganesh-Chaturthi. Therefore be very careful not to look at the moon on that night.

If it happens to look at the Moon on the night of Ganesh-Chaturthi, then no matter how innocent one is, one will definitely be defamed.

Even Lord Krishna was accused of having stolen the Syamantak Mani’ because of looking at the Moon on this night.However, if you look at the Moon on the 3rd (11th Sep '18) and 5th (14th Sep'18) nights of that lunar month, the harmful effects caused by seeing the Moon on the 4th lunar night is countered.

This year we shouldnt have a gaze on moon on two days, 12th Sep'18 till 8.59 PM and 13th Sept'18  till 9.38 PM . Pujya Bapuji asks sadhaks to do Jap-dhyan from evening Sandhya to Moon set  in your pooja room.

In any case, if by mistake you do happen to look at the Moon on this night, read or listen to the episode narrating the theft of the Syamantak Mani as described in the 56th and 57th chapters of the tenth Skanda of the Srimad Bhagawata.

Katha Of Syamantak Mani - हिंदी (Hindi)- English

 

 

 

अनिच्छा से चन्द्रदर्शन हो गया हो तो...

यदि कोई मनुष्य अनिच्छा से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी के चन्द्रमा को देख ले तो उसे निम्न मंत्र से पवित्र किया हुआ जल पीना चाहिए । ऐसा करने से वह तत्काल शुद्ध हो भूतल पर निष्कलंक बना रहता है । जल को पवित्र करने का मंत्र इस प्रकार है:

सिहः प्रसेनमवधीत सिंहो जाम्बवता हतः ।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ॥

’सुंदर सलोने कुमार! इस मणि के लिए सिंह ने प्रसेन को मारा है और जाम्बवान ने उस सिंह का संहार किया है, अतः तुम रोओ मत । अब इस स्यमन्तक मणि पर तुम्हारा ही अधिकार है ।’

- ब्रह्मवैवर्त पुराण, अध्याय ७८

If unintentionally catch sight of moon

If someone unintentionally catch sight of the moon in Bhadra month’s Shukal Paksha’s Chaturthi i.e. on the eve of “GANESH CHATURTHI”, then he/she should drink water after enchanting the following mantra . On doing this he/she instantaneously becomes pious with the sacred water and lives without any blame or culpability on the earth.

Sinha prasenmavadheet sinho jambavataa hatah.
Sukumarak ma rodeestav hyesh syamantakah.

i.e. “ Beautiful and smart youngster! For this MANI(precious stone) Sinha(lion) has killed PRASEN and Jambawat has killed the lion. SO you do not lament. Now you own this MANI.

(Brahmvaivarta Puran, Lesson-78)

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