शिविरार्थियों के लिए आवश्यक सूचनाएं

         जाहिर सत्संग आम जनता के लिए होता है । उच्च कोटि की आध्यात्मिक बातें तथा यौगिक क्रियाएं केवल शिविरों में ही बतायी जाती हैं । जो साधना में प्रगति के लिए जरुरी हैं ।

 

         ध्यान योग शिविर एवं बच्चों के लिए विद्यार्थी तेजस्वी तालीम शिविर कब, कहां और किसके सान्निध्य में होगा..आदि संपूर्ण जानकारी आश्रमों, समितियों, तथा "ऋषिप्रसाद" व "लोककल्याण सेतु" के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है ।

 

         शिविर में वैसे तो कोई भी भाग ले सकता है किंतु पूज्यश्री से दीक्षाप्राप्त साधक को इससे विशेष लाभ होता है । साधक जितने ज्यादा शिविर में भाग लेगा, आध्यात्मिक उन्नति के अवसर उतने ही अधिक होंगे ।

 

शिविर में भाग लेने के लिए कुछ नियम

1.  शिविर में भाग लेने के लिए साधकों को एक दिन पहले की शाम तक शिविर-स्थल पर पहुंच जाना चाहिए ।

         साधकों को नज़दीक रेलवे स्टेशन तथा बसस्टेन्ड से शिविर-स्थल तक पहुंचने एवं वापस ले जाने के लिए आश्रम के संचालकों की तरफ से वाहन सुविधा उपलब्ध रहती है ।

         साधक जब शिविर-स्थल में पहुंच जाए तो "रजिस्ट्रेशन औफिस" में उसे अपना रेजिस्ट्रेशन तुरंत करा लेना चाहिए ताकि उसको रहने की व्यवस्था एवं भोजन पास प्राप्त हो सके ।

         साधक को उसी स्थान पर निवास करना चाहिए जो उसको "आश्रम निवास पास" में दिया गया हो । इससे जब कभी भी आवश्यकता पडने पर उससे संपर्क साधने में सुविधा रहेगी ।

 

2.  शिविर में भाग लेने के लिए साधक को कम-से-कम परंतु आवश्यक सामान अपने साथ लाना चाहिए । जैसे, बिछाने तथा ओढने के लिए कम्बल व चादर, पहने के लिए दो-तीन जोडी कपडे तथा जरुरत के हिसाब से रुपये आदि । शिविरार्थियों को चाहिए कि सत्संग-मंडप मे सफेद वस्त्र पहनकर ही जायें ।

3.      साधक-साधिकाओं को आभूषण आदि पहनकर नहीं आना चाहिए । ज्यादा कीमती और बहुमूल्य सामान भी नहीं लाना चाहिए । आवश्यकता से अधिक नगदी भी नहीं लानी चाहिए ।

         यदि साधक के पास कीमती सामान, आभूषण या आवश्यकता से अधिक नगदी हो तो उसे "अमानती सामान घर" एवं "नगदी घर" में जमा कर टोकन ले लेना चाहिए ।

         स्नानघर के पास भी "क्लोक रूम" की व्यवस्था रहती है । अत: स्नान आदि करते समय अपना कीमती सामान क्लोक रुम में जमा कर दें ।

         यद्यपि सुरक्षा का पूर्ण प्रबन्ध होता है फिर भी साधक को आपने सामान की सुरक्षा स्वयं ही करनी होगी । इसलिए अपने पास कम-से-कम सामान रखना चाहिए । कीमती सामान अमानती घर एवं नगदी घर में जमा करवा देना चाहिए ।

         किसी साधक भाई-बहन को शिविर-स्थल पर कहीं कोई लावारिस वस्तु मिले तो उसे तुरंत "खोया-पाया कार्यालय" में जमा करने की कृपा करें जिससे वह वस्तु उसके अधिकारी व्यक्ति को दी जा सके । शिविर में खोये हुए व्यक्तियों की घोषणा भी खोया-पाया कार्यालय से की जाती हैं । फिर भी शिविरार्थियों को चाहिए कि यदि वे समूह में आए हों तो प्रतिदिन आपस में एक-दूसरे से मिलने के लिए सत्संग समाप्ति के बाद एक निश्चित स्थान व निश्चित समय तय कर लें जिससे उन्हें बार-बार खोया-पाया कार्यालय की सहायता न लेनी पडे और वहाँ पर अनावश्यक भीड़ भी न हो ।

 

4.      शिविर-स्थल पर Telephone ,STD, PCO आदि की व्यवस्था उपलब्ध रहती है । अति आवश्यक हो तो चालू सत्संग के बाद अन्य समय में उसका लाभ ले सकते हैं ।

 

5.  शिविर में ट्रेन व ट्रेवल आरक्षण के लिए भी "आरक्षण कार्यालय" का प्रबंध रहता है । फिर भी जहां तक सम्भव हो, उचित यही है कि साधक भाई-बहन वापसी का आरक्षण पहले से ही कराकर आवें ।

 

6.  जो अपने वाहन से आते हें , उन्हें उसे निर्धारित वाहन पार्किंग में ही लगाना चाहिए ताकि अव्यवस्था न फैले ।

 

7.  प्रत्येक शिविर में आश्रम द्वारा संचालित आयुर्वेदिक औषधालय की व्यवस्था रहती है जिसका लाभ आवश्यकता पडने पर लिया जा सकता है ।

 

8.  साधक को अपने रहने का स्थान, प्रसाधन के स्थान तथा शिविर परिसर को साफ और स्वछ रखना चाहिए । शौचालय जाने के बाद स्नान जरुर करें और अपने शरीर के वस्त्रों को भी धो डालें । लघुशंका जाने के वाद हाथ-पैर-मुहं अवश्य धोया करें ।

         जहां-तहां बैठ कर गंदगी न फैलायें । शिविर स्थल पर बने शौचालयों का ही इस्तमाल करें और उन्हें साफ सुथरा रखें । पानी का बिगाड किये बिना समुचित सफाई रखें ।

         कूडा-करकट कचरापेटियों में ही डालना चाहिए ।

         जूता-चप्पल आदि जूते स्टैंड पर ही जमा करायें । जगह-जगह रख देने से उनके खो जाने का भय तो रहता ही है, साथ ही शिविर स्थल की स्वच्छता भी नहीं रह पाती ।

         अपने भीगे कपडे जहां-तहां नहीं सुखाना चाहिए । बनायी गयी व्यवस्था के अनुसार तथा अपने आवास के पास ही सुखावें ।

 

9.  शिविर के दौरान साधकों के लिए सात्विक भोजन और जलपान की विशेष व्यवस्था होती है । अत: साधकों को सात्विक भोजन ही लेना चाहिए । इधर-उधर की तथा बाहर की अथवा अपरिचितों द्वारा दी गयी खाने की चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।

         लाइन में लगकर ही भोजनालय में प्रवेश करना चाहिए । भोजनालय में प्रवेश करते समय भोजन पास स्वयंसेवक को देना न भूलें ।

         भोजन का बिगाड नहीं करना चाहिए । भोजन करते समय भूमि पर गिरे हुए झूठन को झूठन-पात्र में ही डालना चाहिए । अपना बर्तन पहले पानी से धो लें , फिर मिट्टी या पाउडर से साफ करें ओर उसे यथास्थान रख देवें ।

         शिविरार्थी घर लौटते समय अपना शिविर पास भोजनालय में अवश्य वापस करें ।

 

10. साधक को सत्संग-मंडप में समय से आधा घंटा पहले पहुंच जाना चाहिए और कतारबद्ध हो कर बैठना चाहिए । कभी-कभी साधक मंडप में सुबह बहुत जल्दी पहुंच जाते हैं जिससे व्यवस्था करनेवालों को तकलीफ होती है और मंडप की ठीक ढंग से सफाई करने में असुविधा होती है । इसके अतिरिक्त साधक की नींद पूरी न हो पाने के कारण सत्संग के दौरान उसे नींद आने लगती जाती है जिससे वह सत्संग के लाभ से वंचित रह जाता है । अत: शिविर में साधक को अपनी दिनचर्या ठीक रखते हुए समय का पाबंद रहना चाहिए ।

         सत्संग मंडप में वितरित "संत मिलन को जाइए", "अजन्मा है अमर आत्मा", "गुर्वष्टकं" आदि पत्रिकायें पढने के बाद स्वंयसेवकों को वापस कर दिया करें ।

         सत्संग-मंडप में पहले से बैठे हुए साधकों के बीच घुसकर बैठने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्यों कि इससे उनकी साधना में विघ्न पडता है तथा स्वयंसेवक को व्यवस्था करने में भी तकलीफ उठानी पडती है । अत: कभी भी देर से आने पर आगे बैठने का प्रयास नहीं करना चाहिए, बल्कि पीछे बैठ कर प्रेम और शांति से सत्संग का आनंद लेना चाहिए ।

         सत्संग के दौरान अति आवश्यक होने पर ही ताली बजाना चाहिए । बार-बार ताली बजाने से शांत वातावरण व सत्संग में विक्षेप होता है ।

         छोटे-छोटे बच्चों के साथ सत्संग-मंडप में नहीं आना चाहिए और यदि आयें भी तो एसी जगह पर बैठना कि आपके सह-साधकों को बच्चों की बचकानी हरकतों से विक्षेप न हो ।

         सत्संग के दौरान भावुक हो कर कोई एसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे सह-साधकों को कष्ट हो और असामाजिक तत्वों को जेब काटने, चेन तोडने-काटने का मौका मिल जाए ।

         शिविर के दौरान ज्यादा-से-ज्यादा मौन रहने का प्रयास करना चाहिए तथा ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे अपने सह-साधक को कष्ट या परेशानी हो । सत्संग-स्थल पर तो बिलकुल मौन रहना चाहिए । वहां कुछ खाना-पीना नहीं चाहिए ।

         सत्संग-मंडप मे यदि तुलसी के पत्ते वितरित किये जाते हैं तो आप एक पत्ता अपने लिए रखकर शेष आसपास के सह-साधकों को बांट दिया करें ।

         सत्संग के सत्र की समाप्ति पर शालीनता से अपने शिविर निवास या भोजनालय की तरफ जाना चाहिए । धक्का-मुक्की, भाग-दौड करने से सह-साधकों को परेशानी होती है ।

         पंडाल छोडने पर अपना आसन, गौमुखी, फोटो, बैग आदि अपने साथ ले जायें, जगह घेरने के लिए आसन बिछाकर न छोडें । अपना दीक्षा का सामान बहुत संभालकर सुरक्षित रखना चाहिए ।

         चालू सत्संग में कभी उठना नहीं चाहिए और न ही कभी आगे जाने का प्रयास करना चाहिए ।

         यदि पूज्यश्री के दर्शनार्थ लाइन लगती है तो शालीनता से लाइन में लगकर दर्शन करना चाहिए । पीछे से आगे जा कर भीड नहीं करना चाहिए । इससे व्यवस्था बिगडती है । पूज्यश्री का शीघ्र दर्शन करके अपने पीछे खडे सह-साधकों को भी दर्शन का मौका देना चाहिए । व्यासपीठ के पास खडे रहने या साष्टांग दंडवत प्रणाम करने से कतार में लगे पीछे के सह-साधकों को आगे बढ़ने में अवरोध उत्पन्न होता है और वहां की व्यवस्था भी बिगडती है ।

         अत: अपने सह-साधकों के लिए मददरुप बने, विघ्नरुप नहीं । प्रसाद मिलने के वाद व्यासपीठ के पास खडे रहना या जिद्द करके ठहरना किसी भी दृष्टि से लाभदायक नहीं होता ।

         दर्शन की लाइन में बार-बार नहीं जाना चाहिए । पूज्य गुरुदेव के निर्देश के अनुसार पूरे शिविर के दौरान एक बार ही दर्शनार्थ लाइन में जाना चाहिए ।

         दर्शन के दौरान पूज्यश्री को भेंट के रुप में मिठाई अदि चढाने का कष्ट ना करें ।

 

11. व्यर्थ की चर्चा में समय वरबाद ना करें । सत्संग और नित्य नियम के अलावा बाकी के समय में ईश्वर-चिंतन व सत्संग के दौरान सुने हुए उपदेशों का चिंतन करना चाहिए । शिविर के दौरान प्राप्त सत्संग का मनन करने से आत्मिक उत्थान में विशेष सहायता मिलेगी ।

 

12. शिविर में पद-प्रतिष्ठा को भूलकर एक साधक की तरह शिष्ट व सरल व्यवहार करना चाहिए । यह पक्की त्याग-भावना को सुदृढ करने तथा आध्यात्मिक उत्थान करने में मददरुप सिद्ध होगा ।

 

13. शिविर काल में कोई दुर्व्यसन नहीं करना चाहिए ।

 

14. आश्रम में लगे पैड-पौधें को हाथ नहीं लगाना चाहिए । पौधें में लगे फूल-पत्तियों को नहीं तोडना चाहिए ।

 

15. साधन भजन के लिये आवश्यक सामग्रियां शिविर-परिसर में लगे स्टाल पर ही उपलब्ध कराई जाती हैं ताकि आपको उपयुक्त सामग्रियां उचित मूल्यों पर मिल सकें । अत: उन्हीं का उपयोग करें ।

 

नोट:

1.  शिविर-सम्बन्धी विशेष जानकारी के लिए आश्रम के संचालक या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति से ही संपर्क करें ।

2.  शिविरार्थियों से अनुरोध है कि कृपया इसे अपने पास संभालकर रखें ।

 

नारायण नारायण नारायण नारायण