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||ॐ गं गणपतये नमः ||

|| ॐ श्री सरस्वत्यै नमः ||

|| ॐ श्री गुरुभ्यो नमः ||

The Magnificence of Mantra Anushthan

मंत्र जपने की विधि, मंत्र के अक्षर, मंत्र का अर्थ, मंत्र-अनुष्ठान की विधि जानकर तदनुसार जप करने से साधक की योग्यताएँ विकसित होती हैं | वह महेश्वर से मुलाकात करने की योग्यता भी विकसित कर लेता है |



Books

Mantrajap Mahima & Anushthaan Vidhi

Ishta Siddhi

Bhagwannam Jap Mahima

Anusthana of Saraswatya Mantra

Regular and sincere jap of Saraswatya mantra leads to the development of the intellect and memory

power beyond our imagination. The elevated lives of great many students initiated by Pujya Bapuji in the Saraswatya mantra bear a testimony to this.

If a student wants to make his life brilliant, vibrant and divine and to emerge out victorious in all fronts of life, he must observe an Anushthana of Saraswatya mantra. The procedure for the Anushthana is as follows:

  • The Anushthana of Saraswatya mantra is to be completed in seven days.
  • 170 rounds of mala are to be done each day.
  • One should wear only white clothes during these seven days.
  • One should take a saltless diet during the Anushthana. Khir prepared from milk and rice is recommended.
  • One should worship goddess Saraswati with white flowers before beginning the jap of the mantra. The Bhog offered to Goddess Saraswati should also be Khir.
  • One should pray to Maa Saraswati for a pure and sharp intellect.
  • One should sleep on the ground on a mat or a blanket and observe Mauna as much as possible.
  • Jap done on a mala of crystal beads is all the more beneficial.

Other rules regarding place, sleeping, purity, etc. are common to an Anushthana of other mantras. A detailed account of the guidelines and precautions for an Anushthana of mantras is given in the Hindi books Mantra-Jap Mahima evam Anushthana Vidhi and Ishtasiddhi published by the Ashram.

 

Tips on Anushthan

  • "ॐ ह्रीं ॐ" का १०८ बार जप करके अनुष्ठान शुरू करने से अनुष्ठान सफल होता है । रोज़ एक माला इस मंत्र की करने से कोई बाधा नहीं आएगी और शरीर व स्थान की शुद्धि होगी । ref
  • शुभ दिन: सोमवार, बुधवार, गुरूवार, शुक्रवार और रविवार
    शुभ तिथि : दूज, तीज, पंचमी, सप्तमी, दशमी, द्वादशी और त्रयोदशी. ( २,३,५,७,१०,१२,१३)
    इन बताये गये दिनों और तिथि में अनुष्ठान शुरू करने में कोई बाधा नहीं होती और हमारा संकल्प पूरा होता है। ref
  • अनुष्ठान के पहले आंवले का जूस रोज सुबह नाश्ते में लें 5-7 दिन , जिससे नाडियाँ शुद्ध रहें. ref
  • अनुष्ठान करना हो तो सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार या रविवार, इन 5 दिनों में से किसी भी दिन शुरु करें अर्थात मंगलवार और शनिवार को छोड़कर बाकी के 5 दिन शुरु करें अनुष्ठान पूरा होकर रहेगा
    अनुष्ठान की शुरुआत करने से पहले “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र की माला करें तो अनुष्ठान में विघ्न नहीं आयेगा
    फिर श्वास रोककर गुरुमन्त्र का जप करें गुरुदेव की तस्वीर के सामने अपना संकल्प बोलें, ये संकल्प पूरा हो जाये ऐसी प्रार्थना करें जितने दिन का अनुष्ठान कर रहे हैं, जैसे 7 दिन या 11 दिन तो उतने दिन तक हर दिन श्वास रोक कर गुरुमंत्र का जप करके संकल्प बोलने का प्रयोग करें, तो कार्य सिद्ध होगा| ref



Mala Mantra

जप करने से पूर्व माला को प्रणाम कर के मंत्र बोलें

ॐ ऐं श्री अक्ष मालाय नमः

Before mala jap, recite the following mantra offering obeisances to the mala
om aim shree aksh maalaay namah

Mala Calculation