HariOmGroup: Devotees of Pujya Sant Shri Asharamji Bapu
Mantra
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिह्वाग्रे वद वद ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं नमः स्वाहा |
- इस मंत्र को आषाढ़ मास मे जब उत्तराषाढ़ा नक्षत्र हो तब अर्थात १८ जुलाई २००८ को रात्रि के समय ११ से १२ बजे के बीच १०८ बार जप लें |
- फिर इसी दिन की रात्रि के समय ११ से १२ बजे के बीच जीभ पर सोने की सलाई से अथवा चांदी की सलाई से, लाल चंदन से ह्रीं लिख दे |
- जिसकी जीभ पर यह मंत्र इस विधि से लिखा जायेगा, उसे विद्या लाभ तथा विद्वत्ता की प्राप्ति होगी |
- बच्चे यदि छोटे है तो अभिभावक को चाहिये कि बच्चे को गोद मे लेकर बैठे , और १०८ बार इस मंत्र का जप करे | मंत्र बोलते समय मम के स्थान पर बच्चे के नाम का उच्चारण करे (नीचे उदाहरण देखे) | जप करने के पश्चात सोने की अथवा चांदी की सलाई से, लाल चंदन से बच्चे की जीभ पर ह्रीं लिखे |
- उदाहरणः जैसे मेरे पुत्र का नाम राकेश है, और मैं उसके लिये जप करना चाहता हूं | तो मै मंत्र बोलुंगाः "ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति राकेशस्य जिह्वाग्रे वद वद ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं नमः स्वाहा |"
- सभी लोग इसका लाभ लें तथा दूसरो को दिलावें |
- पूज्य बापूजी |
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Pujya Bapuji has has given a powerful mantra to overcome sudden difficulties and mishaps. The mantra is "Om Hrim Om". ( ॐ ह्रीं ॐ ) Chanting of this powerful mantra, given by Pujya Bapuji on the auspicious day of Guru Poornima will also definitely stop the bhraamak prachaar and would give sadbuddhi to all.
So start chanting this mantra as much as possible.
Give ahutis of this mantra if suddenly big problems come in life. This mantra ward off all problems. |
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जो श्रद्धावती प्रतिदिन स्नान आदि से शुद्ध होकर सूर्योदय से पहले
'ॐ ॐ ह्रीं ॐ क्रीं ह्रीं ॐ स्वाहा | '
इस मंत्र की दस मालायें करती है, उसके घर में सुख-समृधि स्थायी रहती है | इस मंत्र का जप शुभ मुहूर्त में प्रारम्भ करना चाहिए | प्रतिवर्ष चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में वटवृक्ष की समिधा से विधिपूर्वक हवन करके कन्या, बटुक (ब्रह्मचारी) आदि को भोजन से संतुष्ट करे | इस मंत्र के सम्यक अनुष्ठान से घर का सुख, शान्ति तथा समृद्धि बनी रहती है | |
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ऍ ह्रीं भगवती भगमालिनि चल चल भ्रामय भ्रामय पुष्पं विकासय विकासय स्वाहा |
इस मंत्र द्वारा अभिमंत्रित दूध गर्भिणी स्त्री को पिलाने से सुखपूर्वक प्रसव होता है | दूसरा उपाय है गर्भिणी प्रसव के समय स्वयं 'जम्भला-जम्भला' जप करे | तीसरा उपाय है देशी गाय के गोबर का १२ से १४ मि.ली. रस लेकर उसमें निहारते हुए 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का २१ बार जप और 'श्रीगुरुगीता' के कुछ श्लोकों का पाठ गर्भिणी स्त्री स्वयं करे या कोई अन्य करे और गर्भिणी स्त्री को वह रस पिलाये | इससे भी प्रसव-बाधाएं दूर होंगी और बिना शल्यक्रिया के सुखपूर्वक प्रसव होगा |
प्रसूति के समय अमंगल की आशंका हो तो सर्वकल्याण के लिए निम्न मंत्र का जप करें:
सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वर्थासाधिके | शरण्ये त्रयाम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ||
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२० बूँद तुलसी के रस में १ चुटकी सैंधा नमक , मरीज के नाक में डाल दें और `एं एं` जपते हुए तिल के तेल से सर की मालिश करें और पैरों के तलवों पर भी तिल या सरसों के तेल की मालिश करें ।
मरीज को AC me न रखे और फलो का रस (Fruit Juice) न दे... जरुरत पड़े तो मूंग का पानी दे. |
दिवाली की रात कुबेर भगवान ने लक्ष्मी जी की आराधना की थी तो कुबेर बन गए ,जो धनाढ्य लोगो से भी बड़ा धनाढ्य है..सभी धन का स्वामी है..ऐसा इस काल का महत्त्व है.. दिया जलाके जाप कराने वाले को धन, सामर्थ्य , ऐश्वर्य पाए…ध्रुव , रजा प्रियव्रत ने भी आज की रात को लक्ष्मी प्राप्ति का , वैभव प्राप्ति का जप किया था…मन्त्र बहुत सरल है…मन्त्र का फल प्राप्त करने के लिए श्रद्धा से मंत्र सुने -
माँ लक्ष्मी मन्त्र :-
श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा
(परम पूज्य सदगुरुदेव बोले की ये मंत्र ऋषि प्रसाद,अक्टूबर २००४ के पेज ८ पर लिखा हुआ है॥)
-9th November 2007, Kotda |
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