Video Description: सत्ता के सदुपयोग से सत्व सुख का प्रागट्य (डॉ राजेंद्र प्रसाद जीवन प्रसंग )
परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी
सत्संग के मुख्य अंश :
* डॉ राजेंद्र बाबू चाणक्यपुरी में टहलने गए ....मजदूरों की स्थिति देख कर राजेंद्र बाबू की आँखें भर आयी और तुरंत नल लगवा कर मजदूरों की असुविधा दूर की ......
* अपनी सत्ता , अपनी योग्यता , और अपने अधिकार का सतुपयोग बहुजन हिताय करने से अपने ह्रदय में सत्व सुख का प्रागट्य होता है ...
* गीता में भगवान ने कहा की , जो योग में आरूढ़ होना चाहता है वो निष्काम कर्म करे और निष्काम कर्म सेवा करने से योग में गति होती है तो फिर थोडा समय बचा के ध्यानस्थ हो जाए .....
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