Shri Asaramayan

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श्री आसारामायण

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Aarti Shri Asharamayan Ji ki

Jyot se Jyot jagao Aarti

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Shree Asharamayan


श्री आसारामायण

गुरु चरण रज शीष धरि, हृदय रूप विचार।

श्रीआसारामायण कहौं, वेदान्त को सार।।

धर्म कामार्थ मोक्ष दे, रोग शोक संहार।

भजे जो भक्ति भाव से, शीघ्र हो बेड़ा पार।।

भारत सिंधु नदी बखानी, नवाब जिले में गाँव बेराणी।

रहता एक सेठ गुण खानि, नाम थाऊमल सिरुमलानी।।

आज्ञा में रहती मेंहगीबा, पतिपरायण नाम मंगीबा।

चैत वद छः उन्नीस अठानवे, आसुमल अवतरित आँगने।।

माँ मन में उमड़ा सुख सागर, द्वार पै आया एक सौदागर।

लाया एक अति सुन्दर झूला, देख पिता मन हर्ष से फूला।।

सभी चकित ईश्वर की माया, उचित समय पर कैसे आया।

ईश्वर की ये लीला भारी, बालक है कोई चमत्कारी।।

संत की सेवा औ' श्रुति श्रवण, मात पिता उपकारी।

धर्म पुरुष जन्मा कोई, पुण्यों का फल भारी।।

सूरत थी बालक की सलोनी, आते ही कर दी अनहोनी।

समाज में थी मान्यता जैसी, प्रचलित एक कहावत ऐसी।।

तीन बहन के बाद जो आता, पुत्र वह त्रेखन कहलाता।

होता अशुभ अमंगलकारी, दरिदता लाता है भारी।।

विपरीत किंतु दिया दिखाई, घर में जैसे लक्ष्मी आयी।

तिरलोकी का आसन डोला, कुबेर ने भंडार ही खोला।

मान प्रतिष्ठा और बड़ाई, सबके मन सुख शांति छाई।।

तेजोमय बालक बढ़ा, आनन्द बढ़ा अपार।

शील शांति का आत्मधन, करने लगा विस्तार।।

एक दिना थाऊमल द्वारे, कुलगुरु परशुराम पधारे।

ज्यूँ ही बालक को निहारे, अनायास ही सहसा पुकारे।।

यह नहीं बालक साधारण, दैवी लक्षण तेज है कारण।

नेत्रों में है सात्विक लक्षण, इसके कार्य बड़े विलक्षण।।

यह तो महान संत बनेगा, लोगों का उद्धार करेगा।

सुनी गुरु की भविष्यवाणी, गदगद हो गये सिरुमलानी।

माता ने भी माथा चूमा, हर कोई ले करके घूमा।।

ज्ञानी वैरागी पूर्व का, तेरे घर में आय।

जन्म लिया है योगी ने, पुत्र तेरा कहलाय।।

पावन तेरा कुल हुआ, जननी कोख कृतार्थ।

नाम अमर तेरा हुआ, पूर्ण चार पुरुषार्थ।।

सैतालीस में देश विभाजन, पाक में छोड़ा भू पशु औ' धन।

भारत अमदावाद में आये, मणिनगर में शिक्षा पाये।।

बड़ी विलक्षण स्मरण शक्ति, आसुमल की आशु युक्ति।

तीव्र बुद्धि एकाग्र नम्रता, त्वरित कार्य औ' सहनशीलता।।

आसुमल प्रसन्न मुख रहते, शिक्षक हँसमुखभाई कहते।

पिस्ता बादाम काजू अखरोटा, भरे जेब खाते भर पेटा।।

दे दे मक्खन मिश्री कूजा, माँ ने सिखाया ध्यान औ' पूजा।

ध्यान का स्वाद लगा तब ऐसे, रहे न मछली जल बिन जैसे।।

हुए ब्रह्मविद्या से युक्त वे, वही है विद्या या विमुक्तये।

बहुत रात तक पैर दबाते, भरे कंठ पितु आशीष पाते।।

पुत्र तुम्हारा जगत में, सदा रहेगा नाम।

लोगों के तुम से सदा, पूरण होंगे काम।।

सिर से हटी पिता की छाया, तब माया ने जाल फैलाया।

बड़े भाई का हुआ दुःशासन, व्यर्थ हुए माँ के आश्वासन।।

छूटा वैभव स्कूली शिक्षा, शुरु हो गयी अग्नि परीक्षा।

गये सिद्धपुर नौकरी करने, कृष्ण के आगे बहाये झरने।।

सेवक सखा भाव से भीजे, गोविन्द माधव तब रीझे।

एक दिन एक माई आई, बोली हे भगवन सुखदाई।।

पड़े पुत्र दुःख मुझे झेलने, खून केस दो बेटे जेल में।

बोले आसु सुख पावेंगे, निर्दोष छूट जल्दी आवेंगे।

बेटे घर आये माँ भागी, आसुमल के पाँवों लागी।।

आसुमल का पुष्ट हुआ, अलौकिक प्रभाव।

वाकसिद्धि की शक्ति का, हो गया प्रादुर्भाव।।

बरस सिद्धपुर तीन बिताये, लौट अमदावाद में आये।

करने लगी लक्ष्मी नर्तन, किया भाई का दिल परिवर्तन।।

दरिद्रता को दूर कर दिया, घर वैभव भरपूर कर दिया।

सिनेमा उन्हें कभी न भाये, बलात् ले गये रोते आये।।

जिस माँ ने था ध्यान सिखाया, उसको ही अब रोना आया।

माँ करना चाहती थी शादी, आसुमल का मन वैरागी।।

फिर भी सबने शक्ति लगाई, जबरन कर दी उनकी सगाई।

शादी को जब हुआ उनका मन, आसुमल कर गये पलायन।।

पंडित कहा गुरु समर्थ को, रामदास सावधान।

शादी फेरे फिरते हुए, भागे छुड़ाकर जान।।

करत खोज में निकल गया दम, मिले भरूच में अशोक आश्रम।

कठिनाई से मिला रास्ता, प्रतिष्ठा का दिया वास्ता।।

घर में लाये आजमाये गुर, बारात ले पहुँचे आदिपुर।

विवाह हुआ पर मन दृढ़ाया, भगत ने पत्नी को समझाया।।

अपना व्यवहार होगा ऐसे, जल में कमल रहता है जैसे।

सांसारिक व्यौहार तब होगा, जब मुझे साक्षात्कार होगा।

साथ रहे ज्यूँ आत्माकाया, साथ रहे वैरागी माया।।

अनश्वर हूँ मैं जानता, सत चित हूँ आनन्द।

स्थिति में जीने लगूँ, होवे परमानन्द।।

मूल ग्रंथ अध्ययन के हेतु, संस्कृत भाषा है एक सेतु।

संस्कृत की शिक्षा पाई, गति और साधना बढ़ाई।।

एक श्लोक हृदय में पैठा, वैराग्य सोया उठ बैठा।

आशा छोड़ नैराश्यवलंबित, उसकी शिक्षा पूर्ण अनुष्ठित।।

लक्ष्मी देवी को समझाया, ईश प्राप्ति ध्येय बताया।

छोड़ के घर मैं अब जाऊँगा, लक्ष्य प्राप्त कर लौट आऊँगा।।

केदारनाथ के दर्शन पाये, लक्षाधिपति आशिष पाये।

पुनि पूजा पुनः संकल्पाये, ईश प्राप्ति आशिष पाये।।

आये कृष्ण लीलास्थली में, वृन्दावन की कुंज गलिन में।

कृष्ण ने मन में ऐसा ढाला, वे जा पहुँचे नैनिताला।।

वहाँ थे श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठित, स्वामी लीलाशाह प्रतिष्ठित।

भीतर तरल थे बाहर कठोरा, निर्विकल्प ज्यूँ कागज कोरा।

पूर्ण स्वतंत्र परम उपकारी, ब्रह्मस्थित आत्मसाक्षात्कारी।।

ईशकृपा बिन गुरु नहीं, गुरु बिना नहीं ज्ञान।

ज्ञान बिना आत्मा नहीं, गावहिं वेद पुरान।।

जानने को साधक की कोटि, सत्तर दिन तक हुई कसौटी।

कंचन को अग्नि में तपाया, गुरु ने आसुमल बुलवाया।।

कहा गृहस्थ हो कर्म करना, ध्यान भजन घर ही करना।

आज्ञा मानी घर पर आये, पक्ष में मोटी कोरल धाये।।

नर्मदा तट पर ध्यान लगाये, लालजी महाराज आकर्षाये।

सप्रेम शीलस्वामी पहँ धाये, दत्तकुटीर में साग्रह लाये।।

उमड़ा प्रभु प्रेम का चसका, अनुष्ठान चालीस दिवस का।

मरे छः शत्रु स्थिति पाई, ब्रह्मनिष्ठता सहज समाई।।

शुभाशुभ सम रोना गाना, ग्रीष्म ठंड मान औ' अपमाना।

तृप्त हो खाना भूख अरु प्यास, महल औ' कुटिया आसनिरास।

भक्तियोग ज्ञान अभ्यासी, हुए समान मगहर औ' कासी।।

भव ही कारण ईश है, न स्वर्ण काठ पाषान।

सत चित्त आनंदस्वरूप है, व्यापक है भगवान।।

ब्रह्मेशान जनार्दन, सारद सेस गणेश।

निराकार साकार है, है सर्वत्र भवेश।।

हुए आसुमल ब्रह्माभ्यासी, जन्म अनेकों लागे बासी।

दूर हो गई आधि व्याधि, सिद्ध हो गई सहज समाधि।।

इक रात नदी तट मन आकर्षा, आई जोर से आँधी वर्षा।

बंद मकान बरामदा खाली, बैठे वहीं समाधि लगा ली।।

देखा किसी ने सोचा डाकू, लाये लाठी भाला चाकू।

दौड़े चीखे शोर मच गया, टूटी समाधि ध्यान खिंच गया।।

साधक उठा थे बिखरे केशा, राग द्वेष ना किंचित् लेशा।

सरल लोगों ने साधु माना, हत्यारों ने काल ही जाना।।

भैरव देख दुष्ट घबराये, पहलवान ज्यूँ मल्ल ही पाये।

कामीजनों ने आशिक माना, साधुजन कीन्हें परनामा।।

एक दृष्टि देखे सभी, चले शांत गम्भीर।

सशस्त्रों की भीड़ को, सहज गये वे चीर।।

माता आई धर्म की सेवी, साथ में पत्नी लक्ष्मी देवी।

दोनों फूट-फूट के रोई, रुदन देख करुणा भी रोई।।

संत लालजी हृदय पसीजा, हर दर्शक आँसू में भीजा।

कहा सभी ने आप जाइयो, आसुमल बोले कि भाइयों।।

चालीस दिवस हुआ न पूरा, अनुष्ठान है मेरा अधूरा।

आसुमल ने छोड़ी तितिक्षा, माँ पत्नी ने की परतीक्षा।।

जिस दिन गाँव से हुई विदाई, जार जार रोय लोग-लुगाई।

अमदावाद को हुए रवाना, मियाँगाँव से किया पयाना।।

मुंबई गये गुरु की चाह, मिले वहीं पै लीलाशाह।

परम पिता ने पुत्र को देखा, सूर्य ने घटजल में पेखा।।

घटक तोड़ जल जल में मिलाया, जल प्रकाश आकाश में छाया।

निज स्वरूप का ज्ञान दृढ़ाया, ढाई दिवस होश न आया।।

आसोज सुद दो दिवस, संवत् बीस इक्कीस।

मध्याह्न ढाई बजे, मिला ईस से ईस।।

देह सभी मिथ्या हुई, जगत हुआ निस्सार।

हुआ आत्मा से तभी, अपना साक्षात्कार।।

परम स्वतंत्र पुरुष दर्शाया, जीव गया और शिव को पाया।

जान लिया हूँ शांत निरंजन, लागू मुझे न कोई बन्धन।।

यह जगत सारा है नश्वर, मैं ही शाश्वत एक अनश्वर।

दीद हैं दो पर दृष्टि एक है, लघु गुरु में वही एक है।।

सर्वत्र एक किसे बतलाये, सर्वव्याप्त कहाँ आये जाये।

अनन्त शक्तिवाला अविनाशी, रिद्धि सिद्धि उसकी दासी।।

सारा ही ब्रह्माण्ड पसारा, चले उसकी इच्छानुसारा।

यदि वह संकल्प चलाये, मुर्दा भी जीवित हो जाये।।

ब्राह्मी स्थिति प्राप्त कर, कार्य रहे ना शेष।

मोह कभी न ठग सके, इच्छा नहीं लवलेश।।

पूर्ण गुरु किरपा मिली, पूर्ण गुरु का ज्ञान।

आसुमल से हो गये, साँई आसाराम।।

जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति चेते, ब्रह्मानन्द का आनन्द लेते।

खाते पीते मौन या कहते, ब्रह्मानन्द मस्ती में रहते।।

रहो गृहस्थ गुरु का आदेश, गृहस्थ साधु करो उपदेश।

किये गुरु ने वारे न्यारे, गुजरात डीसा गाँव पधारे।

मृत गाय दिया जीवन दाना, तब से लोगों ने पहचाना।।

द्वार पै कहते नारायण हरि, लेने जाते कभी मधुकरी।

तब से वे सत्संग सुनाते, सभी आर्ती शांति पाते।।

जो आया उद्धार कर दिया, भक्त का बेड़ा पार कर दिया।

कितने मरणासन्न जिलाये, व्यसन मांस और मद्य छुड़ाये।।

एक दिन मन उकता गया, किया डीसा से कूच।

आई मौज फकीर की, दिया झोपड़ा फूँक।।

वे नारेश्वर धाम पधारे, जा पहुँचे नर्मदा किनारे।

मीलों पीछे छोड़ा मन्दर, गये घोर जंगल के अन्दर।।

घने वृक्ष तले पत्थर पर, बैठे ध्यान निरंजन का घर।

रात गयी प्रभात हो आई, बाल रवि ने सूरत दिखाई।।

प्रातः पक्षी कोयल कूकन्ता, छूटा ध्यान उठे तब संता।

प्रातर्विधि निवृत्त हो आये, तब आभास क्षुधा का पाये।।

सोचा मैं न कहीं जाऊँगा, यहीं बैठकर अब खाऊँगा।

जिसको गरज होगी आयेगा, सृष्टिकर्त्ता खुद लायेगा।।

ज्यूँ ही मन विचार वे लाये, त्यूँ ही दो किसान वहाँ आये।

दोनों सिर बाँधे साफा, खाद्यपेय लिये दोनों हाथा।।

बोले जीवन सफल है आज, अर्घ्य स्वीकारो महाराज।

बोले संत और पै जाओ, जो है तुम्हारा उसे खिलाओ।।

बोले किसान आपको देखा, स्वप्न में मार्ग रात को देखा।

हमारा न कोई संत है दूजा, आओ गाँव करें तुमरी पूजा।।

आसाराम तब में धारे, निराकार आधार हमारे।

पिया दूध थोड़ा फल खाया, नदी किनारे जोगी धाया।।

गाँधीनगर गुजरात में, है मोटेरा ग्राम।

ब्रह्मनिष्ठ श्री संत का, यहीं है पावन धाम।।

आत्मानंद में मस्त हैं, करें वेदान्ती खेल।

भक्तियोग और ज्ञान का, सदगुरु करते मेल।।

साधिकाओं का अलग, आश्रम नारी उत्थान।

नारी शक्ति जागृत सदा, जिसका नहीं बयान।।

बालक वृद्ध और नरनारी, सभी प्रेरणा पायें भारी।

एक बार जो दर्शन पाये, शांति का अनुभव हो जाये।।

नित्य विविध प्रयोग करायें, नादानुसन्धान बतायें।

नाभ से वे ओम कहलायें, हृदय से वे राम कहलायें।।

सामान्य ध्यान जो लगायें, उन्हें वे गहरे में ले जायें।

सबको निर्भय योग सिखायें, सबका आत्मोत्थान करायें।।

हजारों के रोग मिटाये, और लाखों के शोक छुड़ाये।

अमृतमय प्रसाद जब देते, भक्त का रोग शोक हर लेते।।

जिसने नाम का दान लिया है, गुरु अमृत का पान किया है।

उनका योग क्षेम वे रखते, वे न तीन तापों से तपते।।

धर्म कामार्थ मोक्ष वे पाते, आपद रोगों से बच जाते।

सभी शिष्य रक्षा पाते हैं, सूक्ष्म शरीर गुरु आते हैं।।

सचमुच गुरु हैं दीनदयाल, सहज ही कर देते हैं निहाल।

वे चाहते सब झोली भर लें, निज आत्मा का दर्शन कर लें।।

एक सौ आठ जो पाठ करेंगे, उनके सारे काज सरेंगे।

गंगाराम शील है दासा, होंगी पूर्ण सभी अभिलाषा।।

वराभयदाता सदगुरु, परम हि भक्त कृपाल।

निश्छल प्रेम से जो भजे, साँई करे निहाल।।

मन में नाम तेरा रहे, मुख पे रहे सुगीत।

हमको इतना दीजिए, रहे चरण में प्रीत।।

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

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Shri Asharamayan


Guru charan raj sheesh dhari, Hriday roop vichaari
Shri Asharamayan kaho vedanta ko saar
Dharm kaamaarath moksha de rog shok sanhaar
Bhaje jo bhakti bhaav se shigraha ho beda paar


Bhaarat sindhu nadi bakhaani Nawaab jile mein gaav berani
Rehata ek seth gunkhaani naam Thaumal Sirumalani
Aagya mein rehati Mehgiba pati parayan naam Mangiba
Chait vad chhaha unnees athaanve Aasumal avtarit aangne
Maa man mein umada sukh sagar dwaar pe aaya ek saudagar
Laaya ek ati sundar jhoola dekh pita man harsh se phula
Sabhie chakit ishwar ki maya uchit samay par kaise aaya
Ishwar ki yeh leela bhari baalak hai koi chamatkaari

Sant seva aur shruti shravan maat peetaa upkaari
Dharma purush janma koi punyo ka phal bhari

Surat thi baalak ki saloni, aate hi kar di anhoni
Samaaj mein hti maanyata jaisi, prachalit ek kahavat aisi
Teen behan ke baad jo aata putra woh trekhan kehalata
Hota ashubh amangal kaari daridrata laata hai bhari
Viparit kintu diya dikhaai ghar mein jaise Lakshmi aayi
Tirloki ka aasan dola Kuber ne bhandaar hi khola
Maan pratishtha aur badhai sab ke man sukh shanti chaai

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Tejomay baalak badha aanand badhaa apaar
Sheel shanti ka atmadhan karne lagaa vistaar

Ek dinaa Thaumal dwaare Kulguru Parshuraam padhaare
Jyun hi ve baalak ko nihaare anaayaas hi sahasa pukaare
Yah nahin baalak saadharan hai, daivee lakshan tej hai kaaran
Netron mein hai saatvik lakshan iske kaarya bade vilakshan
Yah to Mahaan Sant banega logon ka udhaar karega
Suni Guru ki bhavishya vaani gad gad ho gaye Sirumalani
Maata ne bhi maatha chooma har koi lekarke ghooma

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Gyaani vairaagi poorva ka tere ghar mein aaye
JanmA liya hai yogi ne putra tera kehalaye
Paawan tera kul hua janani kokha kritaarth
Naam amar tera hua, purna chaar purushaarth

Saitaalis mein desh vibhajan, pak mein choda bhu pashu au dhan
Bharat Ahmedabad mein aaye Maninagar mein shiksha paaye
Badi vilakshan smaran shakti Asumal ki ashu yukti
Tivra buddhi ekagra namrata tvarit kaarya aur sahansheelta
Asumal prasanna mukh rehate shikshak Hasmukhbhai kehate
Pista badam kaaju akhrota bhare jeb khaate bhar peta
De de makkhan mishri kuja maa ne sikhaya dhyan aur pooja
Dhyaan ka swaad lagaa tab aise, rahey na machhali jal bin jaise
Hue Bramhavidya se yukta ve vahi ahi vidya ya vimuktaye
Bahut raat tak pair dabaate bhare kanth pitu aashish paate

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Putra tumahara jagat mein sada rahega naam
Logon ke tumse sada puran honge kaam

Seer se hati pita ki chaaya tab maaya ne jaal phailaya
Badey bhai ka hua dushashan vyarth hue maa ke aashwashan
Chhoota vaibhav schooli shiksha shooro ho gai agni pariksha
Gaye Siddhpur naukari karne Krishna ke aage bahaaye jharne
Sevak sakha bhaav se bheeje, Govind Madhav tab reejhe
Ek dina ek maai aayi boli he bhagwan sukhdaayi
Pade putra dukh mujhe jhelne khoon case do bete jail mein
Bole Aasu sukh paavenge nirdosh chut jaldi aavenge
Bete ghar aaye maa bhaagi Aasumal ke paavon lagi

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Aasumal ka pushta hua aalokik prabhaav
Vaak siddhi ki shakti ka ho gaya pradurbhaav

Baras Siddhpur teen bitaaye laut ahmedabaad mein aaye
Karne lagi Lakshmi nartan kiya bahi ka dil parivartan
Daridrata ko door kar diya ghar vaibhav bharpur kar diya
Cinema unhe kabhi na bhaaye balat le gaye rote aaye
Jis maa ne tha dhyaan sikhaya usko hi ab rona aaya
Maa karna chahti thi shaadi Aasumal ka man bairaagi
Phir bhi sabne shakti laagayi jabran kar di unki sagaai
Shaadi ko jab hua unka man Aasumal kar gaye palaayan

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Pandit kaha Guru Samarth ko Ramdas savdhan
Shaadi phere phirte hue bhaaage chhuda kar jaan

Karat khoj mein nikal gaya dum mile bharuch mein ashok ashram
Kathinaai se mila raasta pratishtha ka diya vaasta
Ghar mein laaye aajmaaye Guru baarat le pahunche aadipur
Vivaah hua par man dridhaaya bhagat ne patni ko samajhaaya
Apna vyauhar hoga aise jal mein kamal rehata hai jaise
Saansaarik vyavahaar tab hogaa, jab mujhe Saakshaatkaar hoga
Saath rahe jyun aatma kaaya saath rahe vairaagi maya

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Anashwar hoon main jaanta sat-chit hoo anand
Sthiti mein jeene lagoon hove parmananda

Mool granth adhyayan ke hetu Sanskrit bhasha hai ek setu
Sanskrit ki shiksha paayi gati aur sadhana badhaai
Ek shlok hriday mein paitha vairagya soya uth baitha
Asha chhod nairashya avalambit uski shiksha purna anushthit
Lakshmi devi ko samjhaya isha praapti ka dhyeya bataaya
Chhod ke ghar main ab jaoonga lakshya prapta kar laut aaoonga
Kedarnath ke darshan paaye lakshadhipati ashish paye
Puni pooja punah sankalpaaye isha prapti ashish paye
Aaye Krishna leela sthali mein Vrindavan ki kunj galin mein
Krishna ne man mein aisa dhaala ve ja pahunche Nainitala
Wahan thhey Shrotriya Bramhanishthit Swami Leelashah Pratishtit
Bhitar taral thee bahar kathora nirvikalpa jyun kagaz kora
Purna swatantra param upkari brahmanishtha atma saakhshaatkaari

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Isha-krupa bina Guru nahin Guru bina nahin Gyaan
Gyaan bina atma nahin gavahi Ved-Puraan

Jaanne ko saadhak ki koti sattar din tak hui kasoti
Kanchan ko agni mein tapaaya, Guru ne Aasumal bulwaya
Kaha grihasth ho karma hi karna dhyan bhajan ghar par hi karna
Aagya maani ghar par aaye, paksha mein Moti-Coral dhaaye
Narmada tat par dhyan lagaaye, Lalji Maharaj aakarshaaye
Saprem shila swami paha dhaye Datta-kuteer mein sagrah laaye
Umada prabhu prem ka chaskaa anusthaan chaalis diwas ka
Mare chhaha shatru sthiti paayi bramha nishthata sahaja samai
Shubha-Ashubha sam ronaa-ganaa grishma thand maan aur apmana
Tripta ho khaana bhook aru pyaas mahal aur kutiyaa aas niraas
Bhakti yoga gyaan abhyaasi hue samaan Magahar aur Kaasi

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Bhaav hi kaaran ish hai na swarna kaashth paashan
Sata-Chita-Ananda roop hai vyaapak hai Bhagawaan
Bramheshaan Janaardan Saarad Shesh Ganesh
Niraakaar saakaar hai, hai sarvatra bhavesh

Hue Aasumal bramha-abhyaasi, janm aneko laage baasi
Dur ho gayi aadhi vyaadhi siddha ho gayi sahaj samaadhi
Ik raat nadi tat man aakarsha aai jor se aandhi varsha
Band makaan baramda khali baithe wahin samadhi lagaali
Dekha kisine socha daku laaye laathi bhaala chaku
Daude chikhe shor mach gayaa, tuti samaadhi dhyaan khinch gayaa
Sadhak utha, thhey bikhare keshaa raag dvesh naa kinchit leshaa
Saral logon ne saadhu manaa, hathyaaron ne kaal hi jaana
Bhairav dekh dusht ghabaraaye, pahalwaan jyun malla hi paaye
Kaami janon ne aashiq maana, sadhujan kinhe parnaama

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Ek drishti dekhe sabhie chaley shaant gambhir
Sashastron ki bheed ko sahaj gaye ve cheer

Maata aayi dharam ki sevi saath mein patni Lakshmi devi
Dono phut phut ke roi, rudan dekh karunaa bhi roi
Sant Lalji hridaya pasija, har darshak aansoo mein bhija
Kaha sabhie ne aap jaaiyo, Asumal bole ki bhaiyon
Chaalis diwas hua nahi pura, anusthaan hai mera adhura
Asumal ne chodi titiksha, maa patni ne ki partiksha
Jis din gaon se hui vidaai jaar jaar roe log lugai
Ahmedabad ko hue ravana, miyaa-gaon se kiya payana
Mumbai gaye Guru ki chaah, mile vahin pe Lilashah
Param pita ne putra ko dekha, surya ne ghat jal mein pekha
Ghatak tod jal jal mein milaya, jal prakash aakash mein chhaya
Nij swaroop ka gyaan dridhaya, dhai diwas tak hosh na aaya

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Aasoj sud do diwas , sanwat bees ikkis
Madhyaanh dhaai baje mila Eesh se Eesh
Deh sabhie mithya hui jagat hua nissar
Hua aatma se tabhi apna sakhshatkar


Param swatantra purush darshaya, jeev gaya aur shiv ko paaya
Jaan liya hoon shant niranjan, laagu mujhe na koi bandhan
Yah jagat sara hai nashwar, main hi shaashwat ek anashwar
Deed hai do par drishti ek hai, laghu guru mein wahi ek hai
Sarvatra ek kise batlaaye, sarv vyaapt kahaan aaye jaaye
Anant shaktiwala avinaashi, riddhi siddhi uski daasi
Saaraa hi bramhand pasaaraa, chale uski ichchaa anusaaraa
Yadi wah sankalp chalaaye, murda bhi jeevit ho jaaye

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Brahmi stithi prapt kar kaarya rahe na shesh
Moh kabhie na thag sake ichchaa nahin lavlesh
Purna guru kirpa mili purna guru ka gyaan
Asumal se ho gaye Sai Asaram

Jaagrat swapna sushupti chete, brahmanand ka anand letey
Khaate peete maun ya kahate, brahmanand masti mein rahate
Raho grihastha guru ka aadesh, grihast sadhu karo updesh
Kiye guru ne vaare nyaare, gujarat Disaa gaon padhare
Mrut gaay diya jeevan daanaa, tab se logon ne pehachana
Dwaar pe kehate Narayan Hari, lene jaate kabhie madhukari
Tab se ve satsang sunaate, sabhie aarti shanti paate
Jo aaya uddhar kar diya, bhakt ka beda paar kar diya
Kitne marnasann jilaaye, vyasan maans aur maddya chhudaaye

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Ek din man uktaa gayaa kiyaa Disaa se kooch
Aayi mauj fakir ki diyaa jhopadaa phuk

Ve Naareshwar dhaam padhare, ja pahunche Narmada kinare
Meelon peeche chhoda mandir, gaye ghor jungle ke andar
Ghane vriksha tale patthar par, baithe dhayaan Niranjan ka dhar
Raat gayi prabhaat ho aayi baal Ravi ne surat dikhaai
Praatah pakshi kooyal kuakanta, chhuta dhyaan uthe tab santaa
Praatarvidhi nivrit ho aaye, tab aabhas kshudhaa ka paaye
Socha main na kahin jaoonga, yahin baith kar ab khaoonga
Jisko garaj hogi aayega srishti karta khud laayega
Jyun hi man vichaar ve laaye tyun hi do kisan wahan aaye
Dono sir par baandhe saafa, khaadya peya liye dono haatha
Bole jeevan safal hai aaj arghya swikaro Maharaj
Bole Sant aur pe jao jo hai tumhara use khilao
Bole kisan apko dekha, swapna mein maarag raat ko pekha
Hamara na koi Sant hai duja, aao gaon karein tumhari pooja
Asaram tab man mein dhaare, niraakaar aadhaar hamare
Piya dudh thoda phal khaya, nadi kinare jogi dhaaya

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Gandhinagar gujarat mein hai Motera gram
Bramhanishta Shri Sant ka yahin hai paavan dhaam
Atmanand mein mast hai kare vedanti khel
Bhakti yog aur gyaan ka Sadguru karte mel
Saadhikaaon ka alag ashram naari uthhan
Naari shakti jagrit sada jiska nahin bayaan


Baalak vriddha aur nar naari sabhie prerna paaye bhari
Ek baar jo darshan paaye, shanti ka anubhav ho jaaye
Nitya vividh prayog karaye, naad-anusandhan bataye
Naabhi se ve Om kehalayen, hriday se ve Ram kehalayen
Samanya dhyaan jo lagaye unhein ve gehare mein le jaye
Sabko nirbhay yog sikhayen, sabka atmotthan karayen
Hajjaro ke rog mitaaye, aur laakhon ke shok chhudaaye
Amritmay prasad jab dete, bhakt ka rog shok har lete
Jisne naam ka daan liya hai, Guru amrit ka paan kiya hai
Unka yog kshem ve rakhte, ve na teen taapon se tapte
Dharm kamarath moksha ve paate aapad rogon se bach jaate
Sabhie shishya raksha pate hain sukshma shareer Guru aate hain
Sachmuch Guru hai deen dayal, sahaj hi kar dete hai nihaal
Ve chaahate sab jholi bhar le nij atma ka darshan kar lein
Ek sau aanth jo paath karenge, unke sare kaaj sarenge
Gangaram sheel hai dasa, hongi purna sabhie abhilasha

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

Varabhayadata Sadguru param hi bhakta krupal
Nischal prem se jo bhaje Sai kare nihaal
Man mein naam tera rahe, mukh pe rahe sugeet
Humko itna dijiye, rahe charan mein preet

Hari om Hari om Hari om Hari Om - Hari om Hari om Hari om Hari Om

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Shri Asharamayan Anushthan

श्री आसारामायण अनुष्ठान विधि
जहाँ पर अनुष्ठान करना हो, वहाँ ईशान कोण ( पूर्व व उत्तर के बीच की दिशा) में तुलसी का पौधा रखें । पाँच चीजों (गोमूत्र , हल्दी, कुमकुम, गंगाजल, शुद्ध इत्र या शुद्ध गुलाबजल) से पूर्व या उत्तर की दीवार पर समान लम्बाई - चौड़ाई का स्वस्तिक चिन्ह बनाये तथा उसके बाजू में पूज्य बापू जी की तस्वीर रख दें। फिर जमीन पर सफ़ेद या केसरी रंग का नया , पतला कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर गेहूँ के दानों से स्वस्तिक बना कर उस पर पानी का लोटा रख दें । लोटे के ऊपरी भाग में आम के पत्ते रखें व उन पर नारियल रख दें ।
उसके बाद तिलक करके ' ॐ गं गणपतये नमः ' मंत्र बोलते हुए , जिस उद्देश्य से अनुष्ठान करना है उसका संकल्प करें । फिर श्वास भरकर रोकें और महा मृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र का तीन बार जप करें तथा मन में संकल्प दोहराएँ कि 'म���रा अमुक कार्य अवश्य पूर्ण होगा ।' ऐसा तीन बार करें । अनुष्ठान जितने भी दिन में पूर्ण करना हो उनमें प्रत्येक सत्र (बैठक) में यह मंत्र व संकल्प दोहराना है । प्रतिदिन निश्चित संख्या में पाठ करें । अनुष्ठान के समय धूप करें तथा दीपक जलता रहे ।अनुष्ठान की समाप्ति पर लोटे का जल तुलसी की जड़ में डाल दें । गेहूँ के दाने पक्षियों कोे डालें , नारियल प्रसाद रूप में बाँट दें या बहती जल में प्रवाहित कर दें । गुरुमंत्र के जप से १०८ आहुतियाँ दे कर हवन कर लें तथा एक या तीन अथवा पाँच -सात कन्याओं को भोजन करायें । दृढ श्रद्धा -विश्वास , संयम तथा तत्परता पूर्वक इस विधि से अनुष्ठान करने वालो की मनोकामना पूर्ण होने में मदद मिलती है ।