माँ-बाप को भूलना नहीं

14 फरवरी को वेलेंटाइन डे नहीं, मातृ-पितृ पूजन दिवस मनायें

क्योंकि प्रेम तो पवित्र होता है ।

हर देश धर्म जाति और पंथ,

सबका यही आह्वान ।

आदर माता-पिता-प्रभु-गुरु का,

करके बनें महान ।।

पूज्य बापू जी का संकल्पः विश्वगुरु भारत

मातृ-पितृ पूजन दिवस पर संत श्री आशाराम जी बापू का सर्वहितकारी सन्देश

जागृत देव हैं माता-पिता

14 फरवरी को वेलेंटाइन डे के नाम पर लाखों-लाखों बच्चे-बच्चियों की जिंदगी तबाह हो रही है । नशीली चीजों का सेवन, घर से भाग जाना, दारू पीना, 'आई  लव यू' कह के एक-दूसरे को स्पर्श करके यादशक्ति बरबाद करना – यह सब माँ-बाप के लिए और संतानों के लिए मुसीबत पैदा कर रहा है । जैसे गणेश जी ने माता पार्वती और शिवजी का पूजन किया ऐसे ही तुम लोग 14 फरवरी को माता-पिता का पूजन करना । माता-पिता को सदा साथ रखना । कलियुग में तप, उपवास, व्रत, धारणा, ध्यान, समाधि तो कठिन है लेकिन चलते फिरते जागते देव सर्वतीर्थमयी माता, सर्वदेवमय पिता का आदर-सत्कार करना तो सरल है । उनके बुढ़ापे में उनसे उद्दण्ड व्यवहार न करना, उनको नर्सिंग होम में, वृद्धाश्रम में, अनाथाश्रम में मत छोड़ना, उनसे मुँह मत मोड़ना ।

और सब मिलेगा लेकिन माता-पिता नहीं मिलेंगे । माता-पिता तो जागृत देवता हैं । कितने दुःख सहकर माता ने हमें जन्म दिया, पाला-पोसा, बड़ा किया । पिता ने कितनी कठिनाइयों से हमारा भरण-पोषण किया । माता-पिता को साथ रखना, उनका आशीर्वाद लेना, मंगलमय जीवन निभाना, आपका मंगल होगा बेटे-बेटियो ! और फिर आपके बच्चे भी ऐसे ही आपका आदर करेंगे । मैंने मेरे माता-पिता का आदर किया तो मेरे बेटा-बेटी मेरा आदर करते हैं, तुम भी करते हो । तो जो माता-पिता और गुरुओं का आदर करते हैं वे स्वयं भी आदरणीय हो जाते हैं । भगवान तुम्हें ऐसी सद्बुद्धि दें । .... .... ....

"14 फरवरी को लड़के-लड़कियाँ एक दूसरे को फूल देते हैं । एक दूसरे को फूल देना, 'मैं तुमसे प्रेम करता हूँ/करती हूँ...' कहना बड़ी बेशर्मी की बात है । इससे लोफर-लोफरियाँ पैदा हो रहे हैं । यह गंदगी विदेश से आयी है । इस विदेशी गंदगी से बचाकर हमें भारतीय संस्कृति की सुगंध से बच्चे-बच्चियों को सुसज्ज करना है ।" – पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू

 

'सर्वतीर्थमयी माता, सर्वदेवमयः पिता'

"गणेशजी 'सर्वतीर्थमयी माता, सर्वदेवमयः पिता' करके शिव-पार्वती की सात प्रदक्षिणा की, दंडवत् प्रणाम किया तो गणेश जी पर शिवजी और माँ पार्वती ने कृपा बरसायी और गणेशजी प्रथम पूजनीय हुए, दुनिया जानती है । इसलिए मैंने 'वेलेंटाइन डे' का विरोध नहीं परन्तु 'वेलेंटाइन डे' के कुप्रभावों से बचकर माता-पिता का सत्कार करने को कहा ।" – पूज्य बापू जी

प्राचीन काल में लोग लम्बी उम्र तक जीते थे ? क्योंकि उस समय लोग अपने माता-पिता को प्रतिदिन प्रणाम करते थे । शास्त्र कहता हैः

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः ।

चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ।। (- मनुस्मृतिः 2.121)

'जो माता-पिता और गुरुजनों को प्रणाम करता है और उनकी सेवा करता है, उसकी आयु, विद्या, यश और बल चारों बढ़ते हैं ।'

प्रातकाल उठि कै रघुनाथा ।

मातु पिता गुरु नावहिं माथा ।। (श्री रामचरितमानस)

अनादिकाल से महापुरुषों ने  अपने जीवन में माता-पिता और सदगुरु का आदर-सम्मान किया है । पूज्य बापू जी ने भी बाल्यकाल से ही अपने माता-पिता की सेवा की ओर उनसे ये आशीर्वाद प्राप्त कियेः

पुत्र तुम्हारा जगत में, सदा रहेगा नाम ।

लोगों के तुमसे सदा, पूरण होंगे काम ।।

पूज्य बापू जी अपने सद्गुरु भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाह जी महाराज की आज्ञा में रहकर खूब श्रद्धा व प्रेम से गुरुसेवा करते थे । माता-पिता और सद्गुरु की कैसी सेवा-पूजा करनी चाहिए इसका प्रत्यक्ष उदाहरण पूज्य बापू जी के जीवन में देखने को मिलता है ।

 

 

 

 

 

सब धर्मों की एक पुकार

मात-पिता का करें सत्कार

-    पूज्य बापू जी

ऐसा कोई माँ-बाप नहीं चाहते कि हमारा बेटा लोफर हो, किसी लड़की के चक्कर में आये । हमारी बेटी किसी लड़के के चक्कर में आये, शादी के पहले ही ओज-तेजहीन हो जाय । ऐसा ईसाई नहीं चाहते, मुसलमान भाई भी नहीं चाहते हैं, पारसी, यहूदी भी नहीं चाहते हैं और हिन्दू तो कभी नहीं चाहेंगे । सभी के माता-पिता चाहते हैं कि 'हमारी संतान ओजस्वी-तेजस्वी हो, बलवान बुद्धिमान हो, स्वयं के पैरों पर खड़ी रहे और बुढ़ापे में हमारा ख्याल रखे । छोटी उम्र में लड़के-लड़कियाँ बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड होकर तबाही की खाई में न गिरें ।' ऐसा सब चाहते हैं । बच्चे हमारा आदर करें ऐसा सभी चाहते हैं और मैं वही कर रहा हूँ । विश्वामानव को 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' का फायदा मिले, ऐसा हमने पिछले 14 वर्षों से अभियान शुरु किया है ।

भेदभाव के सारे बन्धन,

बापू जी ने तोड़ दिये ।

हिन्दू, मुसलिम, सिख, ईसाई,

इक धागे में जोड़ दिये ।।

भारत को विश्वगुरु बनाने हेतु

पूर्व राष्ट्रपति के प्रेस सचिव वेणु राजमणिः "भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी को यह जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई है कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने हेतु वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष 14 फरवरी को 'मातृ-पितृ पूजन' अभियान चलाया जा है ।

हम मातृ पितृ पूजन दिवस मनायें

संत श्री देवकीनंदन जी ठाकुरः "हम लोग 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' मनायें तो यह दिवस एक महाकुम्भ बनकर हमारे घर में हमेशा-हमेशा के लिए विराजमान हो जायेगा ।"

जागरण का शंखनादः श्री अटल बिहारी बाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्रीः "पूज्य बापू जी सारे देश में भ्रमण करके जागरण का शंखनाद कर रहे हैं, सर्वधर्म-समभाव की शिक्षा दे रहे हैं तथा अच्छे और बुरे में भेद करना सिखा रहे हैं । मैं बापू जी के चरणों में विनम्र होकर नमन करना चाहता हूँ ।"

विश्व कल्याण का रास्ता श्री अशोक सिंहल, तत्कालीन अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषदः "परम पूज्य बापू जी ने 'मातृदेवो भव । पितृदेवो भव ।'

इस महान सन्देश को विश्वव्यापी बनाकर समस्त विश्व का कल्याण करने के लिए जो रास्ता अपनाया है, वास्तव में वही सही रास्ता है ।"

प्रशंसनीय कार्य सैम थॉम्पसन, सिनेटर, न्यूजर्सी (यू.एस.ए.) "यह दुःखद है कि ऐसी प्रथा हमारे अमेरिकन समाज में नहीं है । इस कारण से हमारे बहुत से बच्चे रास्ता भटक जाते हैं । मैं आपको 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' के लिए बधाई देता हूँ और संत आशाराम जी बापू की प्रशंसा करता हूँ ।"

अच्छी शुरुआत की है हजरत मौलाना असगर अली, अजमेर शरीफ के शाही इमामः "यह वेलेंटाइन डे सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं बल्कि मुसलमानों तथा पूरी दुनिया के इन्सानों के लिए एक मसला खड़ा है । बापू जी ने एक बड़ी अच्छी शुरुआत की है ।"

मातृदेवो भव, पितृदेवो भव,  बात न यह बिसरायें हम ।

श्रद्धा प्रेम से 14 फरवरी को, मातृ-पितृ पूजन दिवस मनायें हम ।।

पूज्य संत श्री आशाराम जी बापूः सभी संतानें – फिर चाहे वे हिन्दुस्तान को हों, चाहे ब्रह्मांड के किसी भी कोने की हों, सभी बालक-बालिकाएँ उन्नत हों । सभी के माता-पिता प्रसन्न हों । और माता-पिता वृद्धाश्रम के हवाले न हों, पराधीन जीवन न जियें । माता-पिता बच्चों से सम्मानित रहें और बच्चे उनसे आशीर्वाद लेकर सुश्रेष्ठ बनें इसलिए यह भगीरथ कार्य हुआ ।"

यौन-जीवन संबंधी परम्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों के लोगों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण 'वेलेंटाइन डे' है । यह लोगों को अनैतिक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करता है । इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है । अमेरिका में 7% बच्चे 13 वर्ष की उम्र के पहले ही यौन-संबंध कर लेते हैं । 85%  लड़के और 77% लड़कियाँ 19 वर्ष के पहले ही यौन-संबंध कर लेते हैं । इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटाने के लिए वहाँ की सरकारों को करोड़ों डॉलर खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिलती । अतः भारत जैसे देशों को अपने परम्परागत नैतिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए ऐसे 'वेलेंटाइन डे' का बहिष्कार करना चाहिए और नैतिक मूल्यों का सिंचन करने वाली संस्थाओं को सरकार के द्वारा प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि ऐसी समस्याएँ इस देश में उत्पन्न ही न हों ।

एक छोटा सा राज्य बना विश्व के लिए प्रेरणा-स्थान

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री और दूसरे मंत्रियों ने घोषित किया कि 'हमारे छत्तीसगढ़ में वेलेंटाइन डे नहीं मनाया जायेगा, सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों में 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' मनाया जायेगा ।' और उन बहादुरों ने जो कहा वह करके दिखाया । 16 फरवरी 2012 को मेरे पास एक अख़बार आया, उसमें देखा कि किसी सरकारी उद्यान में सिपाही खड़ा है और प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे के कान  पकड़ के उठ-बैठ कर रहे हैं । लड़के बेशर्मी करके माता-पिता का अपमान न करें और लफंगे-लफंगियों वाली जिंदगी, तबाही करने वाली जिंदगी न जियें, ऐसा सरकारी कानून बने । मैं तो देशभर के मुख्यमंत्रियों और दुनिया के लोगों को भी संदेशा देता हूँ कि वेलेंटाइन डे मनाकर बच्चे-बच्चियाँ तबाही के रास्ते न जायें बल्कि 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' मनाकर बच्चों के जीवन में नित्य उत्सव, नित्य श्री और नित्य मंगल हो । - पूज्य बापू जी ।

कुछ वर्ष पूर्व पूज्य बापू जी द्वारा किया गया ब्रह्मसंकल्प

"मातृ-पितृ पूजन दिवस में पंच महाभूत, देवी-देवता, मेरे साधक और मुसलमान, हिन्दु, ईसाई, पारसी सभी जुड़ जायें – ऐसा संकल्प मैं आकाश में फैला रहा हूँ । देवता सुन लें, यक्ष सुन लें, गंधर्व सुन लें, पितर सुन लें कि भारत और विश्व में 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' का कार्यक्रम मैं व्यापक करना चाहता हूँ और सभी लोग अपने माता-पिता का सत्कार करें, ऐसा मैं एक अभियान चलाना चाहता हूँ । आप सभी इसमें प्रसन्न होंगे और सहभागी होंगे ।"

ब्रह्मसंकल्प हुआ साकार

मातृ-पितृ पूजन दिवस कैसे मनायें ?

आरती

(आरती की तर्ज – जय जगदीश हरे....)

जय जय मात-पिता, प्रभु गुरु जी मात-पिता ।

सद्भाव देख तुम्हारा – 2, मस्तक झुक जाता ।। जय जय...

कितने कष्ट उठाये हमको जन्म दिया, मइया पाला – बड़ा किया ।

सुख देती, दुःख सहती – 2, पालनहारी माँ ।। जय जय...

अनुशासित कर आपने उन्नत हमें किया, पिता आपने जो है दिया ।

कैसे ऋण मैं चुकाऊँ – 2, कुछ न समझ आता ।। जय जय....

सर्व तीर्थमयी माता सर्व देवमय पिता, सर्व देवमय पिता ।

जो कोई इनको पूजे – 2, पूजित हो जाता ।। जय जय....

मात-पिता की पूजा गणेश जी ने की, श्री गणेश जी ने की ।

सर्वप्रथम गणपति को – 2, ही पूजा जाता ।। जय जय...

बलिहारी सद्गुरु की मारग दिखा दिया, सच्चा मारग दिखा दिया ।

मातृ-पितृ पूजन कर – 2, जग जय जय माता ।। जय जय....

मात-पिता प्रभु गुरु जी का आरती जो गाता, है प्रेम सहित गाता ।

वो संयमी हो जाता, सदाचारी हो जाता, भव से तर जाता ।। जय जय...

लफंगे-लफंगियों की नकल छोड़, गुरु सा संयमी होता, गणेश सा संयमी होता ।

स्वयं आत्मसुख पाता -2, और को पवाता ।। जय जय....

"पूजन विधि हो जाय तब बच्चे थोड़ी देर चुप बैठें । माँ-बाप बच्चों को देखें और मन-ही-मन उनके प्रति आत्मकृपा बरसायें । इस समय बच्चे आदर से, सद्भाव से माँ-बाप की तरफ देखें और चिंतन करें कि उनका अंतर्यामी परमात्मा हम पर आशीर्वाद बरसा रहा है, अपना शुभ आशीष बरसा रहा है । इससे तुम्हारा मंगल होगा बेटे-बेटियो ! माँ-बाप ऐसे ही तुम्हारा मंगल चाहते हैं और इस दिन तो विशेष कृपा बरसाते हैं । माँ-बाप बच्चों को आशीर्वाद दें कि इनका मंगल हो ।" – पूज्य बापू जी

 

 

बेटे-बेटियाँ माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश देखें । बेटे-बेटियाँ माता-पिता को मधुर प्रसाद खिलायें एवं माता-पिता अपने बच्चों को प्रसाद खिलायें । यही है असली प्रेम दिवस ! पूज्य बापू जी द्वारा प्रेरित पूजन दिवस' !

देकर अपनी श्वासें माँ ने, तुझको जीवन दान दिया ।

भूल गई सुख-दुःख अपनी, बस हर पल तुझको ध्यान दिया ।।

तेरे सपने हों पूरे इसलिए पिता न सोते थे ।

तेरे सुख में हँस लेते थे, तेरे दुःख में रोते थे ।।

 

आध्यात्मिक क्रान्ति के प्रणेता

जैसे पृथ्वी पर प्रकाश के स्रोत सूर्यनारायण हैं वैसे समाज में सत्प्रेरणा, सद्भाव, सत्प्रवृत्तियों के मूल स्रोत ब्रह्मनिष्ठ संत-महापुरुष होते हैं ।

पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू एक ऐसे संत हैं जो कि सूर्य की तरह सारे विश्व को सच्चे ज्ञान का प्रकाश दे रहे हैं । आधुनिकता की तपन में तप रहे मानव-समाज को चन्द्रमा की तरह शीतलता का दान दे रहे हैं । प्राणिमात्र की पीड़ा जिनको अपनी पीड़ा लगती है, परदुःखकातरता जिनका सहज स्वभाव है, ऐसे जीवमात्र के हितैषी लोकसंत पूज्य बापू जी आज समूची मानवता को जीवन की सही राह दिखा रहे हैं ।

कुल गुरु परशुराम जी ने बचपन में आपके तेजस्वी मुखमंडल को देखकर भविष्यवाणी की थीः

"यह तो महान संत बनेगा, लोगों का उद्धार करेगा ।"

पूज्य बापू जी के सद्गुरु भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाह जी महाराज ने पूज्य बापू जी कहा थाः "तू गुलाब होकर महक.... तुझे जमाना जाने ।" उनके आशीर्वचन आज प्रकट रूप धारण कर चुके हैं । ब्रह्मनिष्ठ के मूर्तिमंत स्वरूप, लोकसेवा के आदर्श, प्राणिमात्र के परम सुहृद, कुंडलिनी योग के समर्थ आचार्य पूज्य बापू जी अपने सत्संग-प्रवचनों के माध्यम से लोगों में प्राणिमात्र के हित की भावना जगाकर भारतीय संस्कृति के प्रति जागृति की लहर फैला रहे हैं । उनकी पावन आत्मसुवास से विश्व के करोड़ों मुरझाये दिल खिल रहे हैं ।

सुखी, स्वस्थ तथा सम्मानित जीवन प्राप्त करने हेतु पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू भगवत्कीर्तन व भगवत्प्रार्थना की कुंजी प्रदान करते हैं ।

अपने सत्संगों में आप बीजमंत्र कार सहित देव-मानव हास्य प्रयोग करते हैं, जिससे 70000 बोविस ऊर्जा उत्पन्न होती है । इससे एक ओर वातावरण का वैचारिक प्रदूषण दूर होता है तो दूसरी ओर सत्संगियों की तीव्र गति से आध्यात्मिक उन्नति होती है ।

सत्संग एवं मंत्रदीक्षा से बहुआयामी उत्थान

बापू जी वैदिक मंत्रो की दीक्षा देते हैं, सत्संग-मार्गदर्शन द्वारा मानव-जन्म को सार्थक बनाने की कला सिखाते हैं और अपने असीम योग-सामर्थ्य द्वारा साधक-भक्तों को कँटीले मार्गों में फँसने से बचा लेते हैं । आप जीवन के हर मोड़ पर अदृश्य सहायता प्रदान करते हैं ।

आपसे प्राप्त वैदिक मंत्र की दीक्षा से साधकों के जीवन में बहुआयामी उत्थान होता है । साधकों के जीवन में भिन्न-भिन्न प्रकार के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ सुस्पष्ट देखने को मिलते हैं । मंत्रदीक्षा के सारे लाभों का वर्णन करना असम्भव है । पूज्य श्री से दीक्षित साधक-भक्तों के विलक्षण अनुभव एवं हृदयोदगार आप आश्रम से प्रकाशित पुस्तक 'दिव्य प्रेरणा-प्रकाश में पढ़ सकते हैं व वेबसाइट www.ashram.org पर देख सकते हैं ।


 

सभी को वे अपने लगते हैं

विभिन्न संगठनों के मुखिया एवं प्रतिष्ठित गणमान्य लोग आपसे मार्गदर्शन प्राप्त कर धन्यता का अनुभव करते हैं । आपने अमेरिका, जर्मनी, स्विटजरलैंड, कनाडा, इंग्लैंड, हाँगकाँग, सिंगापुर, तैवान, बैंकॉक, इंडोनेशिया, केन्या, नेपाल, दुबई सहित पाकिस्तान में भी जाकर सुख, शांति, आपसी सौहार्द का संदेश दिया है ।

आपश्री ने सितम्बर 1993 में 'विश्व धर्म संसद, शिकागो' में हिन्दू धर्म का सफल प्रतिनिधित्व किया था । वक्तव्य हेतु जहाँ अनेक वक्ताओं को 3 से 5 मिनट का समय दिया गया था, वहीं आपश्री का पावन-प्रवचन सब लोग एक बार 55 मिनट तक व दूसरी बार सवा घंटे तक मंत्रमुग्ध हो सुनते ही रहे ।

चिंता, तनाव, अराजकता, असामायिकता और अशांति की आग में जल रहे विश्व को पूज्य बापू जी ने स्वयं गाँव-गाँव, नगर-नगर जाकर अपनी पावन वाणी से प्रेम, शांति, सद्भाव तथा आध्यात्मिकता का प्रवाह बहाकर शीतलता प्रदान की है ।

भलाई जो की बापू जी ने, निंदक कर सकेंगे क्या ?

पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू के सत्संग में ध्यानयोग की गहराई, भक्तियोग का माधुर्य और ज्ञानयोग की तत्त्वनिष्ठा का सुंदर सम्मिश्रण होता है, साथ ही आपके जीवन में कर्मयोग भी पूरी तरह निखरा है । आपकी सत्प्रेरणा से चल रही अनेकानेक सेवा-प्रवृत्तियों के माध्यम से आज समाज लाभान्वित हो रहा है । इन सेवा-प्रवृत्तियों में विघ्न डालने की कोशिश करने वाले निंदक क्या ये सेवाकार्य कर सकते हैं ?

बापू जी जन-जन को सदगुण-सदाचार युक्त निष्काम कर्म-भक्ति-ज्ञानमय जीवन जीने का संदेश देते हैं ।

संत श्री आशाराम जी आश्रमः देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर विश्वशांति के प्रसारक, आध्यात्मिक स्पंदनों से समृद्ध 425 से भी अधिक आश्रम है । यहाँ सभी वर्णों, जातियों और सम्प्रदायों के लोग आकर भक्तियोग, ज्ञानयोग, निष्काम कर्मयोग और कुंडलिनी योग के द्वारा हृदय में परमेश्वरीय शांति का प्रसाद पाकर अपने को धन्य-धन्य अनुभव करते हैं

कुसंस्कार, व्यसन, अभद्रता आदि को बढ़ावा देने वाले क्लब, बियर बार, डांस बार, सिनेमा-थियेटर आदि मानव-समाज को नैतिक पतन की खाई में धकेल रहे हैं ।

बाल संस्कार केन्द्रः देश-विदेश में निःशुल्क चलाये जा रहे हजारों 'बाल संस्कार केन्द्रों', 'छात्र संस्कार केन्द्रों' एवं 'कन्या संस्कार केन्द्रों' द्वारा बच्चों में अच्छे संस्कारों का सिंचन हो रहा है । साथ ही छुट्टियों में विद्यार्थियों को संस्कारवान, बुद्धिमान, उद्यमी, परोपकारी बनाने हेतु 'विद्यार्थी उज्जवल भविष्य निर्माण शिविरों का आयोजन होता है । पूज्य बापू जी 'विद्यार्थी तेजस्वी तालीम शिविरों' स्वयं मार्गदर्शन व सान्निध्य भी प्रदान करते हैं ।

मनोरंजन के नाम पर टी.वी., सिनेमा, विडियो गेम, इंटरनेट आदि के पीछे प्रति सप्ताह बच्चे लगभग 55 घंटे बिताते हैं । औसतन एक बच्चा 18 साल की उम्र होने तक टेलीविजन पर हजारों अश्लील दृश्यों व 200000 हिंसक दृश्यों को देख लेता है । सिनेमा, टीवी. के कुप्रभाव के कारण चोरी, दारू, भ्रष्टाचार, हिंसा, बलात्कार, निर्लज्जता जैसे कुसंस्कारों का गहरा प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है ।

युवाधन सुरक्षा अभियानः विद्यार्थियों, युवाओं व जनसामान्य में 2 करोड़ से भी अधिक 'दिव्य प्रेरणा-प्रकाश पुस्तकें बाँटी गयी हैं । इस पुस्तक में युवाओं को संयमी व संस्कारी जीवन जीने की प्रेरणा के साथ-साथ तन-मन को स्वस्थ करने की सरल युक्तियाँ सीखने को मिलती हैं । साथ ही 'युवा सेवा संघ' और 'महिला उत्थान मंडल' द्वारा युवकों एवं युवतियों के उत्थान के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं । 'युवाधन सुरक्षा अभियान' युवाओं में नवचेतना आयी है । यह अभियान अभी भी चालू है ।

अमेरिका में 7% बच्चे 13 वर्ष की उम्र के पहले ही यौन-संबंध कर लेते हैं । 85%  लड़के और 77% लड़कियाँ 19 वर्ष के पहले ही यौन-संबंध कर लेते हैं । इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटाने के लिए वहाँ की सरकारों को करोड़ों डॉलर खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिलती ।

आदिवासी एवं पिछड़े लोगों का विकासः पूज्य बापू जी के मार्गदर्शन में चल रहे 425 से अधिक आश्रमों, 1400 से अधिक श्री योग वेदांत सेवा-समितियों एवं करोड़ों साधकों द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से भंडारे, जीवनोपयोगी सामग्रियों के वितरण आदि होते आये हैं । समय-समय पर पूज्य बापू जी द्वारा आदिवासियों व कमजोर वर्ग के लोगों में अन्न, वस्त्र, बर्तन व बच्चों में नोटबुकें, स्कूल ड्रेस आदि के वितरण का कार्य बड़े पैमाने पर होता रहा है । गरीबों, अनाश्रितों एवं विधवाओं के लिए आश्रम द्वारा हजारों राशनकार्ड वितरित किये गये हैं, जिनके माध्यम से कार्डधारकों को हर माह अनाज व जीवनोपयोगी वस्तुओं का निःशुल्क वितरण किया जाता है ।

'आदिवासी सबसे कमजोर वर्ग है । लगभग 50 प्रतिशत आदिवासी गरीबी रेखा के नीचे हैं । - इंडियन ह्यूमन डेवल्पमेंट सर्वे

http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2010-03-28/india/28124553_1_muslims-rangnath-mishra-commission-ncaer

महिला उत्थान मंडलः यह मंडल नारी समाज के सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर कार्यरत है । इस मंडल द्वारा संस्कार सभाएँ, गर्भपात रोको अभियान, बाल व कन्या संस्कार केन्द्र संचालन, तेजस्विनी अभियान-शिविर, दिव्य शिशु संस्कार आदि सेवाकार्य आदि चलाये जा रहे हैं ।

पिछले 10 वर्षों में भारत में 8 लाख अजन्मी लड़कियों को गर्भपात कराके मारा गया है । महिलाओं में शराब, धूम्रपान आदि व्यसनों का चलन बढ़ रहा है । दुनिया में लगभग 250 लाख महिलाएँ रोजाना धूम्रपान कर रही हैं ।

http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2009-08-27/india/28156183_1_female-smokers-tobacco-industry-world-lund-foundation

संत श्री आशाराम जी गौशालाएँ- इनमें कत्लखाने ले जाने से रोकी गयीं हजारों गायों की सेवा की जा  रही है । इन गायों के झरण, गोबर आदि से धूपबत्ती, खाद, फिनायल, औषधियाँ आदि का निर्माण कर गौशालाओं को स्वावलम्बी बनाया गया है ।

भारत में वैध रूप से लगभग 3600 व अवैध रूप से लगभग 30000 कत्लखाने चल रहे हैं ।

http://en.wikipedia.org/wiki/Cattle_slaughter_in_india

व्यसनमुक्ति अभियानः आश्रम द्वारा चलाये जा रहे व्यसनमुक्ति अभियान (यात्राएँ, प्रदर्शनी आदि) एवं पूज्य बापू जी के सत्संग से करोड़ों व्यसन करने वाले लोग व्यसनमुक्त हुए हैं और आज स्वस्थ, सुखी व सम्मानित जीवन जी रहे हैं ।

2008 में एक सर्वे के अनुसार, भारत में 15 वर्ष से कम उम्र के 5 लाख बच्चे गुटखे के आदी थे । उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश में 16 प्रतिशत बच्चों में मुँह के केंसर के लक्षण पाये गये ।

53.5 प्रतिशत भारतीय तम्बाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं ।

- ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे

90 प्रतिशत धूम्रपान करने वाले लोगों को 21 वर्ष के पहले ही यह आदत लगी थी । रोज 18 वर्ष से कम उम्र के 6000 बच्चे धूम्रपान शुरु करते हैं ।

http://en.wikipedia.org/wiki/Gutka

स्वास्थ्य चिकित्सा सेवाएँ- आयुर्वेदिक, होमियोपेथिक, एक्यूप्रेशर एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से निष्णात वैद्यों द्वारा विभिन्न आश्रमों में उपचार किया जाता है, साथ ही अभावग्रस्त क्षेत्रों में 'निःशुल्क चिकित्सा शिविरों' का आयोजन होता है । आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में चल-चिकित्सालयों द्वारा स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करायी जाती हैं ।

भारत में 50 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं ।

http://health.india.com/diseases-conditions/what-ails-india-healthcare-system/

भगवन्नाम संकीर्तनः समाज में वैचारिक प्रदूषण मिटाने तथा सांस्कृतिक चेतना जगाने के उद्देश्य से आश्रमों व श्री योग वेदांत सेवा समितियों द्वारा समय-समय पर देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर भगवन्नाम संकीर्तन यात्राएँ निकाली जाती है । इससे तन-मन व वातावरण पवित्र होता है व जीवनीशक्ति का खूब विकास होता है ।

पाश्चात्य जगत में प्रसिद्ध रॉक संगीत (Rock Music) बजाने वाले और सुनने वाले की जीवनशक्ति (Life Energy) क्षीण होती है । डॉ. डायमंड ने प्रयोगों से सिद्ध किया कि सामान्यतया हाथ का एक स्नायु 'डेल्टोइड' 40 से 45 कि.ग्रा. वज़न उठा सकता है । जब रॉक संगीत बजता है तब उसकी क्षमता केवल 10 से 15 कि. ग्रा. वज़न उठाने की रह जाती है ।

मातृ-पितृ पूजन दिवसः भारतीय संस्कृति पर हो रहे कुठाराघात से व्यथित लोकहितकारी महापुरुष पूज्य बापू जी के आह्वान से प्रेरणा पाकर पिछले 14 वर्षों से देश विदेश में करोड़ों लोग 'वेलेंटाइन डे' मनाने के बदले 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' मना रहे हैं । इससे करोड़ों लोग पतन से बचे हैं एवं उनके जीवन में संयम, सदाचार के पुष्प खिले हैं ।

'वेलेंटाइन डे के दुष्प्रभावः विकसित देशों में किशोरियों की दशा

प्रतिवर्ष कुल गर्भवती किशोरियाँ (उम्रः 13 से 19) 1250000

गर्भपात कराने वाली किशारियाः 500000

कुँवारी माता बनकर नर्सिंग होम, सरकार व माँ बाप के लिए बोझा बनने वाली अथवा वेश्यावृत्ति धारण करने वाली किशोरियाँ – 7 लाख कुछ हजार

जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या

अपनी दिनचर्या को कालचक्र के अनुरूप नियमित करें तो अधिकांश रोगों से रक्षा होती है और उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायुष्य की भी प्राप्ति होती है।

समय (उस समय विशेष सक्रिय अंगः सक्रिय अंग के अनुरूप कार्यों का विवरण

प्रातः 3 से 5 बजे (फेफड़े)- ब्राह्ममुहूर्त में उठने वाले व्यक्ति बुद्धिमान व उत्साही होते हैं। इस समय थोड़ा-सा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना चाहिए। दीर्घ-श्वसन भी करना चाहिए।

प्रातः 5 से 7 (बड़ी आँत)- जो इस समय सोये रहते हैं, मल त्याग नहीं करते, उन्हें कब्ज व कई अन्य रोग होते हैं। अतः प्रातः जागरण से लेकर सुबह 7 बजे के बीच मल त्याग कर लें।

सुबह 7 से 9 (आमाशय या जठर)- इस समय (भोजन के 2 घंटे पूर्व) दूध अथवा फलों का रस या कोई पेट पदार्थ ले सकते हैं।

सुबह 9 से 11 (अग्नाशय व प्लीहा)- यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है।

दोपहर 11 से 1 (हृदय)- करुणा, दया, प्रेम आदि हृदय की संवेदनाओं को विकसित एवं पोषित करने के लिए दोपहर 12 बजे के आसपास संध्या करें। भोजन वर्जित है।

दोपहर 1 से 3 (छोटी आँत)- भोजन के करीब 2 घंटे बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए। इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है।

दोपहर 3 से 5 (मूत्राशय)- 2-4 घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृत्ति होगी।

शाम 5 से 7 (गुर्दे)- इस काल में हलका भोजन कर लेना चाहिए। सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक (संध्याकाल में) भोजन न करें। शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं।

रात्रि 7 से 9 (मस्तिष्क)- प्रातः काल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है।

रात्रि 9 से 11 (रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरूरज्जु)- इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है और जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है।

11 से 1 (पित्ताशय)-  इस समय का जागरण पित्त को प्रकुपित कर अनिद्रा, सिरदर्द आदि पित्त विकार तथा नेत्र रोगों को उत्पन्न करता है। इस समय  जागते रहोगे तो बुढ़ापा जल्दी आयेगा।

1 से 3 (यकृत)- इस समय शरीर को गहरी नींद की जरूरत होती है। इसकी पूर्ति न होने पर पाचनतंत्र बिगड़ता है।

ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है। अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखें, जिससे ऊपर बताये समय में खुलकर भूख लगे।

सावधान ! बाल युवा पीढ़ी बन सकती है.... Teenage TimeBomb

वेलेंटाइन डे की परम्परा को बढ़ाने वाले देशों की बाल-युवा पीढ़ी की दुर्दशा के बारे में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के राजनीति के प्रोफेसर जॉन जे. डिलुलियो (जूनियर) कहते हैं- "ये बच्चे 'नैतिक दरिद्रता' में पलकर विकसित हुए हैं क्योंकि इनको माता-पिता, शिक्षकों, धर्मगुरुओं से यह ज्ञान नहीं मिला कि सही क्या है और गलत क्या है और उनका निःस्वार्थ प्रेम नहीं मिला ।"

तबाही की ओर...

कैथरीन मेयर (पत्रकार, टाइम मैगजीन) लिखती हैं- 'हिंसात्मक अपराध, अविवाहित गर्भवती किशोरियाँ शराब और नशीली दवाओं के व्यसन की महामारी युवाओं को तबाही की ओर ले जाने का भय दिखा रही है । अविवाहित गर्भवती किशोरियाँ व यौन संक्रमित रोगों में ब्रिटे पूरे यूरोप में सबसे आगे है ।

किड्स कम्पनी, जो लंदन के दरिद्रतम बच्चों की सेवा करने वाली एक संस्था है, की संस्थापक कैमिला कहती हैं- "यदि मैं सरकार में होती तो आतंकवादियों के बम से नहीं, इस (टीनेज टाइम बम) से चिंतित होती ।"

'इन्नोसंटी रिपोर्ट कार्ड के अनुसार 28 विकसित देशों में हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती है । उनमें से 5 लाख गर्भपात कराती हैं  और 7 लाख 50 हजार कुँवारी माता बन जाती हैं । अमेरिका में हर साल 4 लाख 94 हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं ।

यौन-संबंध करने वालों में 25% किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों से पीड़ित हैं । असुरक्षित यौन संबंध करने वालों में 50% को गोनोरिया, 33% को जैनिटल हर्पिस और 1% को एड्स का रोग होने की सम्भावना है । एड्स के नये रोगियों में 25% रोगी 22 वर्ष से छोटी उम्र के होते हैं । आज अमेरिका के 33% स्कूलों में यौन-शिक्षा के अंतर्गत केवल संयम की शिक्षा दी जाती है । इसके लिए अमेरिका ने 1996 से 2001 के बीच 40 करोड़ से अधिक डॉलर (20 अरब रूपये) खर्च किये हैं ।

वेलेंटाइन डे मनाकर भारत भी इसी दिशा में तो नहीं रहा ? जरा सोचें

"हजारों-हजारों युवक-युवतियाँ तबाही के रास्ते जा रहे हैं । वेलेंटाइन डे के बहाने 'आई लव यू – आई लव यू' कहते-कहते दिन दहाड़े लड़का-लड़की एक दूसरे को छुएँगे तो रज-वीर्य का नाश होगा । आने वाली संतति तो तबाह होगी लेकिन वर्तमान में वे बच्चे बच्चियाँ भी तो तबाह हो रहे हैं । तो लाखों-लाखों माता-पिताओं के हृदय पीड़ित हो रहे हैं और लाखों-लाखों बच्चे-बच्चियों का भविष्य तबाही के रास्ते जा रहा है । उनकी पीड़ा से मेरा हृदय द्रवित हुआ । मेरा हृदय इसका समाधान खोजते-खोजते जहाँ सभी समस्याओं का सही उत्तर मिलता है, उधर गया तो मैंने कहाः 'विरोध नहीं, विद्रोह नहीं ।'

तो फिर क्या ?

तो ऐसी गंदगी हमारे देश में न आये इसलिए मैंने वेलेंटाइन डे मनाने के बदले 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' मनाने का आह्वान किया है ।" – पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू

यदि पूज्य बापू जी जैसे संतों महापुरुषों द्वारा किये जा रहे संस्कारों, शिक्षाओं का लाभ समाज लेगा तो ही यह 'टीनेज टाइम बम' निष्क्रिय हो सकेगा अन्यथा विदेशों की जो स्थिति है वही स्थिति भारत की भी हो सकती है ।

संत आशाराम जी बापू पर लगे आरोपों में कितनी है सच्चाई ?

"लड़की के फोन रिकॉर्डस से पता लगा कि जिस समय पर वह कहती है कि वह कुटिया में थी, उस समय वह वहाँ थी ही नहीं । उसी समय बापू जी सत्संग में थे और आखिर में एक मँगनी के कार्यक्रम में व्यस्त थे । वे भी वहाँ कुटिया में नहीं थे । बापू जी पर 'पॉक्सो एक्ट' लगवाने हेतु एक झूठा सर्टिफिकेट निकाल के दिखा दिया गया कि लड़की 18 साल से कम उम्र की है । यह केस तो तुरन्त रद्द होना चाहिए ।" – प्रसिद्ध न्यायविद् डॉ. सुब्रहमण्यम स्वामी

जोधपुर मामले में लड़की की मेडिकल जाँच रिपोर्ट से रेप या यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई । लड़की का मेडिकल करने वाली डॉ. शैलजा वर्मा ने अदालत में दिये बयान में कहाः "मैडिकल के दौरान लड़की के शरीर पर रत्तीभर भी खरोंच के निशान नहीं थे और न ही प्रतिरोध के कोई निशान थे ।"

लड़की का विद्यालय के दाखिले का  आवेदन, रजिस्ट्रेशन फॉर्म तथा उसके एल.आई.सी. के कागजात में लिखी जन्मतिथि के अनुसार वह उस कल्पित घटना के समय बालिग थी, फिर भी उसे नाबालिग मानकर पॉक्सो एक्ट में केस चलाया जा रहा है ।

जिस रात को घटना घटी ऐसा आरोप लड़की लगा रही है उस रात को वह पंकज दुबे नाम के लड़के के साथ मोबाइल पर बातें कर रही थी । पंकज दुबे, भोलानंद तथा सतीश वाधवानी की गिरफ्तारी से संत आशाराम जी बापू व श्री नारायण साँईं के खिलाफ रची गयी साजिश के प्रमाण मिले हैं ।

मुख्य गवाह ने किया बड़ा खुलासा

 

जोधपुर सत्र न्यायालय में मुख्य सरकारी गवाह सुधा पटेल ने बताया कि उनके नाम पर पुलिस ने बापू जी के खिलाफ जो बयान दर्ज किया है वह झूठा एवं मनगढ़ंत है ।

आशारामजी बापू पर आरोप लगाने वाली सूरत की महिला ने गांधीनगर कोर्ट में एक अर्जी डालकर बताया कि उसने धारा 164 के अंतर्गत (बापू जी के खिलाफ) पहले जो बयान दिया था वह डर और भय के कारण दिया था । अब वह 164 के अंतर्गत दूसरा बयान देकर केस का सत्य उजागर करना चाहती है लेकिन पुलिस ने उसका बयान दर्ज नहीं होने दिया ।


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