
तुलसी रहस्य
प्रस्तावना
तुलसी सम्पूर्ण धरा के लिए वरदान है, अत्यंत उपयोगी औषधि है, मात्र इतना ही नहीं, यह तो मानव जीवन के लिए अमृत है ! यह केवल शरीर स्वास्थ्य की दृष्टि से ही नहीं, अपितु धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यावरणीय एवं वैज्ञानिक आदि विभिन्न दृष्टियों से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है।
एक ओर जहाँ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता जैसे आयुर्वेद के ग्रंथों, पद्म पुराण, स्कंद पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण आदि पुराणों तथा उपनिषदों एवं वेदों में भी तुलसी की महत्ता, उपयोगता बतायी गयी है, वहीं दूसरी ओर युनानी, होमियोपैथी एवं एलोपैथी चिकित्सा पद्धति में भी तुलसी एक महत्त्वपूर्ण औषधि मानी गयी है तथा इसकी खूब-खूब सराहना की गयी है।
विज्ञान ने विभिन्न शोधों के आधार पर माना है कि तुलसी एक बेहतरीन रोगाणुरोधी, तनावरोधी, दर्द-निवारक, मधुमेहरोधी, ज्वरनाशक, कैंसरनाशक, चिंता-निवारक, अवसादरोधी, विकिरण-रक्षक है। तुलसी इतने सारे गुणों से भरपूर है कि इसकी महिमा अवर्णनीय है। पद्म पुराण में भगवान शिव कहते हैं "तुलसी के सम्पूर्ण गुणों का वर्णन तो बहुत अधिक समय लगाने पर भी नहीं हो सकता।"
अपने घर में, आस पड़ोस में अधिक-से-अधिक संख्या में तुलसी के पौधे लगाना-लगवाना माना हजारों-लाखों रूपयों का स्वास्थ्य खर्च बचाना है, पर्यावरण-रक्षा करना है।
हमारी संस्कृति में हर घर आँगन में तुलसी लगाने की परम्परा थी। संत विनोबाभावे की माँ बचपन में उन्हें तुलसी को जल देने के बाद ही भोजन देती थीं। पाश्चात्य अंधानुकरण के कारण जो लोग तुलसी की महिमा को भूल गये, अपनी सस्कृति के पूजनीय वृक्षों, परम्पराओं को भूलते गये और पाश्चात्य परम्पराओं व तौर तरीकों को अपनाते गये, वे लोग चिंता, तनाव, अशांति एवं विभिन्न शारीरिक-मानसिक बीमारियों से ग्रस्त हो गये।
इस घोर नैतिक पतन से व्यस्थित होकर पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू ने प्रेरणा दी कि तुलसी, पीपल, आँवला, नीम – इन लाभकारी वृक्षों के रोपण का अभियान चलाया जाय। प्रतिदिन तुलसी को जल देकर उसकी परिक्रमा करें, तुलसी पत्रों का सेवन करें। प्रतिवर्ष 25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस मनायें।
तुलसी की महत्ता जन-जन तक पहुँच सके और लोग इसका लाभ ले सकें इस उद्देश्य से पूज्य बापू जी की प्रेरणा व विश्वमांगल्य की दृष्टि से यह पुस्तक बनाने का प्रयास किया गया है।
प्रकाशक एवं वितरकः महिला उत्थान ट्रस्ट
संत श्री आशाराम जी आश्रम, अहमदाबाद-380005 (गुजरात)
मुद्रकः हरि ॐ मैन्युफैक्चरर्स, कुंजा मतरालियों, पौंटा साहिब (हि.प्र.)
1. तुलसी हमारी रक्षक और पोषक है।
3. तुलसी देती आरोग्य-लाभ के साथ सुख शांति व समृद्धि भी।
4. शास्त्रों में वर्णित तुलसी-महिमा।
5. धन सम्पदा प्रदायिनी व दरिद्रतानाशक तुलसी।
7. जब तुलसी के पौधे से निकले दिव्य पुरुष।
9. कम लागत, कम मेहनत और लाभ कई गुना।
14. तुलसी के प्रयोग से कैंसर से मुक्ति।
15. 12 वर्षों के बाद मिला अनिद्रा से छुटकारा।
17. तुलसी द्वारा सदगति की सत्य घटना।
19. बापू जी से स्पर्शित तुलसी माला की संजीवनी बूटी।
20. क्रिसमस और खिस्ती नववर्ष पर तीन गुनी अल्कोहल खपतः एसोचैम।
21. तुलसी पूजन दिवसः 25 दिसम्बर।
23. 'घर-घर तुलसी लगाओ' अभियान।
25. सच.... जो आप तक पहुँच न सका।
26. उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायुष्य की प्राप्ति हेतु।
27. कलियुगी पूतनाएँ हैं तथाकथित विदेशी गायें ?
28. बल, बुद्धि, स्फूर्ति, स्मृतिवर्धक विभिन्न पेय।
29. अवतारों ने भी की तुलसी-पूजा।
"तुलसी आयु, आरोग्य, पुष्टि देती है। दर्शनमात्र से पाप समुदाय का नाश करती है। स्पर्श करने मात्र से यह शरीर को पवित्र बनाती है और जल देकर प्रणाम करने से रोग निवृत्त करती है तथा नरकों से रक्षा करती है। इसके सेवन से स्मृति व रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है।
जिसके गले में तुलसी लकड़ी की माला हो या तुलसी का पौधा निकट हो तो उसे यमदूत नहीं छू सकते। तुलसी माला धारण करने से जीवन में ओज तेज बना रहता है।
वैज्ञानिक बोलते हैं कि जो तुलसी का सेवन करता है उसका मलेरिया मिट जाता है अथवा होता नहीं है, कैंसर नहीं होता। लेकिन हम कहते हैं कि यह तुम्हारा नजरिया बहुत छोटा है, 'तुलसी भगवान की प्रसादी है, यह भगवत्प्रिया है। हमारे हृदय में भगवत्प्रेम देने वाली तुलसी माँ हमारी रक्षक और पोषक है।' ऐसा विचार करके तुलसी खाओ, बाकी मलेरिया आदि तो मिटना ही है। हम लोगों का नजरिया केवल रोग मिटाना नहीं है बल्कि मन प्रसन्न करना है, जन्म मरण का रोग मिटाकर जीते जी भगवद्रस जगाना है।" पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू
गुणों की खानः तुलसी
तुलसी बड़ी पवित्र एवं अनेक दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण है। यह माँ के समान सभी प्रकार से हमारा रक्षण व पोषण करती है। हिन्दुओं के प्रत्येक शुभ कार्य में, भगवान के प्रसाद में तुलसी-दल का प्रयोग होता है। जहाँ तुलसी के पौधे होते हैं, वहाँ की शुद्ध और पवित्र रहती है। तुलसी के पत्तों में एक विशिष्ट तेल होता है जो कीटाणुयुक्त वायु को शुद्ध करता है। तुलसी की गंधयुक्त वायु से मलेरिया के कीटाणुओं का नाश होता है। तुलसी में एक विशिष्ट क्षार होता है जो दुर्गन्ध को दूर करता है। जिसके मुँह से दुर्गन्ध आती है वो रोज तुलसी के पत्ते खाये तो मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है।
तुलसी के विभिन्न नामः वनस्पतिशास्त्र की भाषा में इसे 'ओसिमम सेन्क्टम' (Ocimum Sanctum) कहा जाता है। तुलसी को विष्णुप्रिया (भगवान विष्णु की प्रिय), सुरसा (जिसका रस सर्वोत्तम हो), सुलभा (सरलता से उपलब्ध हो), बहुमंजरी (बहुत सारी मंजरियाँ लगती हैं), ग्राम्या (गाँवों में अधिक होने वाली तथा घर-घर में लगायी जाने वाली), अपेतराक्षसी (दर्शनमात्र से राक्षस एवं राक्षसों जैसे पाप भाग जाते हैं), शूलघ्नी (शूल अर्थात् दर्द एवं रोगों का नाश करने वाली), देवदुंदुभी (देवों के लिए आनंददायक) आदि नामों से गौरवान्वित किया गया है।
तुलसी के मुख्य प्रकारः 1. राम तुलसी (हरे पत्तों वाली) 2. कृष्ण तुलसी (काले पत्तों वाली)। औषधि के रूप में प्रायः कृष्ण तुलसी का उपयोग किया जाता है।
तुलसी के गुणधर्मः आयुर्वेद के अनुसार तुलसी कड़वी, तिक्त, ऊष्ण, कफ-वातशामक, कृमि-दुर्गन्धनाशक, जठराग्निवर्धक, रक्तशोधक, हृदयोत्तेजक तथा पित्तवर्धक है।
तुलसी अनेक रोगों की रामबाण औषधि है। पद्म पुराण में लिखा है कि संसार भर के फूलों और पत्तों से जितने भी पदार्थ या दवाईयाँ बनती हैं, उनसे जितना आरोग्य मिलता है, उतना ही आरोग्य तुलसी के आधे पत्ते से मिल जाता है।
तुलसी देती आरोग्य लाभ के साथ सुख-शांति व समृद्धि भी
जिसकी तुलना सम्भव न हो ऐसी तुलसी का नाम उसकी अतिशय उपयोगिता को सूचित करता है। विश्वमानव तुलसी के अदभुत गुणों का लाभ लेकर स्वस्थ, सुखी, सम्मानित जीवन की ओर चले और वृक्षों के अंदर भी उसी एक परमात्म-सत्ता को देखे व अपने भावों को दिव्य कई दशकों से अपने सत्संगों में तुलसी की महत्ता बताते आ रहे हैं और उनकी पावन प्रेरणा से वर्ष 2014 से तो 25 दिसम्बर को भारतसहित विश्व के कई देशों में तुलसी पूजन दिवस भी मनाना प्रारम्भ हो गया है। तुलसी पूजन से बुद्धिबल, मनोबल. चारित्र्यबल व आरोग्यबल बढ़त है। मानसिक अवसाद, आत्महत्या आदि से रक्षा होती है और समाज को सूक्ष्म ऋषि विज्ञान का लाभ मिलता है।
शास्त्रों में वर्णित तुलसी महिमा
अनेक व्रतकथाओं, धर्मकथाओं, पुराणों में तुलसी महिमा के अनेक आख्यान हैं। भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की कोई भी पूजा विधि तुलसी दल के बिना परिपूर्ण नहीं मानी जाती।
पद्म पुराण के अनुसार
या दृष्टा निखिलाघसंघशमनी स्पृष्टा वपुष्पावनी।
रोगाणामभिवन्दिता निरसनी सिक्तान्तकत्रासिनी।।
प्रत्यासत्तिविधायिनी भगवतः कृष्णस्य संरोपिता।
न्यस्ता तच्चरणे विमुक्तिफलदा तस्यै तुलस्यै नमः।।
जो दर्शन करने पर सारे पाप-समुदाय का नाश कर देती है, स्पर्श करने पर शरीर को पवित्र बनाती है, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण करती है, जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुँचाती है, आरोपित करने पर भगवान श्रीकृष्ण के समीप ले जाती है और भगवान के चरणों में चढ़ाने पर मोक्षरूपी फल प्रदान करती है, उस तुलसी देवी को नमस्कार है। (पद्म पुराणः उ.खं. 56.22)
तुलसी के निकट जो भी मंत्र-स्तोत्र आदि का जप-पाठ किया जाता है, वह सब अनंत गुना फल देने वाला होता है।
प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, भूत दैत्य आदि सब तुलसी के पौधे से दूर भागते हैं।
ब्रह्महत्या आदि पाप तथा पाप और खोटे विचार से उत्पन्न होने वाले रोग तुलसी के सामीप्य एवं सेवन से नष्ट हो जाते हैं।
श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी का एक पत्ता भी महान पुण्य देने वाला है।
तुलसी के नाम-उच्चारण से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
तुलसी ग्रहण करके मनुष्य पातकों से मुक्त हो जाता है।
जो तुलसी पत्ते से टपकता हुआ जल आपने सिर पर धारण करता है, उसे गंगास्नान और 10 गोदान का फल प्राप्त होता है।
जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगास्नान का फल मिलता है।
कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान, रोपण और धारण करने से वह पाप को जलाती और स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करती है।
कैसा भी पापी, अपराधी व्यक्ति हो, तुलसी की सूखी लकड़ियाँ उसके शव के ऊपर, पेट पर, मुँह पर थोड़ी सी बिछा दें और तुलसी की लकड़ी से अग्नि शुरु करें तो उसकी दुर्गति से रक्षा होती है। यमदूत उसे नहीं ले जा सकते।
गरुड़ पुराण (धर्म काण्ड – प्रेत कल्पः 38.11) में आता है कि तुलसी का पौधा लगाने, पालन करने, सींचने तथा ध्यान, स्पर्श और गुणगान करने से मनुष्यों के पूर्व जन्मार्जित पाप जलकर विनष्ट हो जाते हैं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण (प्रकृति खण्डः 21.43) में आता है कि मृत्यु के समय जो तुलसी पत्ते सहित जल का पान करता है, वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक में जाता है।
स्कन्द पुराण के अनुसारः जिस घर में तुलसी का बग़ीचा होता है (एवं प्रतिदिन पूजन होता है), उसमें यमदूत प्रवेश नहीं करते।
बासी फूल और बासी जल पूजा के लिए वर्जित हैं परन्तु तुलसीदल और गंगाजल बासी होने पर भी वर्जित नहीं हैं। (स्कन्द पुराण, वै. खं. मा.मा. 8.9)
घर में लगायी हुई तुलसी मनुष्यों के लिए कल्याणकारिणी, धन पुत्र प्रदान करने वाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देने वाली होती है। प्रातःकाल तुलसी का दर्शन करने से (सवा मासा अर्थात् सवा ग्राम) सुवर्ण दान का फल प्राप्त होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्णजन्म खंडः 103.62-63)
अपने घर से दक्षिण की ओर तुलसी-वृक्ष का रोपण नहीं करना चाहिए, अन्यथा यम-यातना भोगनी पड़ती है। (भविष्य पुराण)
तुलसी की उपस्थितिमात्र से हलके स्पंदनों, नकारात्मक शक्तियों एवं दुष्ट विचारों से रक्षा होती है।
दरिद्रतानाशक तुलसी
ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने तथा पूजा के स्थान र गंगाजल रखने से बरकत होती है।
तुलसी को रोज जल चढ़ाने तथा गाय के घी का दीपक जलाने से घर में स ख-समृद्धि बढ़ती है।
जो दारिद्रय मिटाना व सुख-सम्पदा पाना चाहता है, उसे तुलसी पूजन दिवस के अवसर पर शुद्ध भाव व भक्ति से तुलसी के पौधे की 108 परिक्रमा करनी चाहिए। पूज्य बापू जी।*
*1. श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वृन्दावन्यै स्वाहा। इस दशाक्षर मंत्र के द्वारा विधिसहित तुलसी का पूजन करने से मनुष्य को समस्त सिद्धि प्राप्त होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण प्र. खं. 22.10.11)
2. जिस घर में तुलसी का पौधा हो उस घर में दरिद्रता नहीं रहती। जहाँ तुलसी विराजमान होती हैं, वहाँ दुःख, भय और रोग नहीं ठहरते। (पद्म पुराण, उत्तर खण्ड)
3. सोमवती अमावस्या को तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है। (हिन्दुओं के रीति रिवाज तथा मान्यताएँ)
तुलसी या पीपल की जड़ की मिट्टी अथवा गाय के खुर की मिट्टी पुण्यदायी, कार्यसाफल्यदायी व सात्विक होती है, उसका तिलक हितकारी है।
जिसकी मृत्यु के समय श्रीहरि का कीर्तन और स्मरण हो तथा तुलसी की लकड़ी से जिसके शरीर का दाह किया जाय, उसका पुनर्जन्म नहीं होता। जो चोटी में तुलसी स्थापित करके प्राणों का परित्याग करता है, वह पापराशि से मुक्त हो जाता है। जो मृत पुरुष के सम्पूर्ण अंगों में तुलसी का काष्ठ देने के बाद उसका दाह-संस्कार करता है, वह भी पाप से मुक्त हो जाता है। (पद्म पुराण)
मुख में, पेट एवं सिर पर यथायोग्य तुलसी – लकड़ी का उपयोग करें।
अग्निसंस्कार में तुलसी की लकड़ी का प्रयोग करने से मृतक की सदगति सुनिश्चित है।
यदि तुलसी के पौधे के निकट बैठकर प्राणायाम किये जायें तो इसकी रोगशामक सुगंधित वायु शरीर में प्रविष्ट होकर कीटाणुओं का नाश करती है, जिससे शरीर पुष्ट, बलवान, वीर्यवान बनता है, ओज-तेज की वृद्धि होती है।
प्रातः खाली पेट तुलसी का रस पीने अथवा 5-7 पत्ते चबाकर पानी पीने से बल, तेज और स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है।
तुलसी के सेवन व इसके निकट रहने से बुरे विचारों, क्रोधावेश एवं कामोत्तेजना पर नियंत्रण रहता है।
तुलसी रक्त की कमी दूर करती है। इसके नियमित सेवन से हीमोग्लोबिन अत्यंत तेजी से बढ़ता है व दिनभर स्फूर्ति रहती है।
तुलसी गुर्दे की कार्यशक्ति बढ़ाती है। कोलेस्ट्रॉल को सामान्य बना देती है। हृदयरोगों में आश्चर्यजनक लाभ करती है। आँतों के रोगों के लिए तो यह रामबाण औषधि है।
जब तुलसी के पौधे से निकले दिव्य पुरुष
बंगाल के फरीदपुर जिले के बाजितपुर गाँव में विनोद नाम का एक पवित्रबुद्धि बालक रहता था। हर कार्य में उसकी दृष्टि हमेशा सत्यान्वेषी होती थी। वह देखता कि माँ रोज तुलसी के पौधे को प्रणाम करती है, जल चढ़ाकर दीप जलाती है, फिर परिक्रमा लगाती है। एक दिन वह सोचने लगा, आखिर तुलसी का यह पौधा इतना पवित्र क्यों ?
उसने इसकी परीक्षा करनी चाही। मन ही मन दृढ़ संकल्प करके वह दोहराता गया कि तुम अगर पवित्र हो तो मुझे प्रमाण दो वरना मैं तुम्हें पवित्र नहीं मान सकता।
एक दिन उसने देखा कि तुलसी के पौधे से एक दिव्य पुरुष निकले और बोलेः "मैं हूँ नारायण, तुलसी के पौधे में मेरा निवास है।"
इस घटना के बाद विनोद तुलसी के पौधे का बहुत सम्मान-पूजन करने लगा। तुलसी माता का कोई अपमान करे, यह उससे सहन नहीं होता था। आगे चलकर इसी बालक ने योगिराज गम्भीरनाथजी से गुरुमंत्र की दीक्षा ली और स्वामी प्रणवानंद जी के नाम से विख्यात हुए।
संकल्प की दृढ़ता व हृदय की पवित्रा नहीं हो तो हर किसी को भगवत्प्रभाव का प्रमाण नहीं मिलता। विनोद सरल हृदय बालक था। आप भी विनोद के अनुभव से लाभ उठाकर तुलसी माता का सम्मान पूजन किया करें। तुलसी को प्रतिदिन जल देकर नौ परिक्रमा करें। आधुनिक विज्ञान ने यह सिद्ध किया है कि इससे आभा बढ़ती है। तुलसी की जड़ की मिट्टी का तिलक करें।
तुलसी की जड़ की मिट्टी का तिलक करने से आपका शिवनेत्र विकसित होगा। विज्ञानी शिवनेत्र को पीनियल ग्रंथि बोलते हैं, यहाँ बहुत सामर्थ्य छुपा है। यह जितना संवेदनशील होगा, आदमी उतना प्रभावशाली होगा, सूझबूझ का धनी होगा।
भारत के महान वैज्ञानिक श्री जगदीशचन्द्र बसु ने क्रेस्कोग्रॉफ संयत्र की खोज कर यह सिद्ध कर दिखाया कि वृक्षों में भी हमारी तरह चैतन्य सत्ता का वास होता है। इस खोज से भारतीय संस्कृति की वृक्षोपासना के आगे सारा विश्व नतमस्तक हो गया। आधुनिक विज्ञान भी तुलसी पर शोध कर इसकी महिमा के आगे नतमस्तक है।
तुलसी में विद्युतशक्ति अधिक होती है। इससे तुलसी के पौधे के चारों ओर की 200-200 मीटर तक की हवा स्वच्छ और शुद्ध रहती है। ग्रहण के समय खाद्य पदार्थों में तुलसी की पत्तियाँ रखने की परम्परा है। ऋषि जानते थे कि तुलसी में विद्युतशक्ति होने से वह ग्रहण के समय फैलने वाली सौरमंडल की विनाशकारी, हानिकारक किरणों का प्रभाव खाद्य पदार्थों पर नहीं होने देती। साथ ही तुलसी-पत्ते कीटाणुनाशक भी होते हैं।
तुलसीपत्र में पीलापन लिए हुए हरे रंग का तेल होता है, जो उड़नशील होने से पत्तियों से बाहर निकलकर हवा में फैलता रहता है। यह तेल हवामान को कांति, ओज-तेज से भर देता है। तुलसी का स्पर्श करने वाली हवा जहाँ भी जाती है, वहाँ वह स्वास्थ्य के लिए लाभदायी है। तुलसी पत्ते ईथर (eugenol methyl ether) नामक रसायन से युक्त होने से जीवाणुओं का नाश करते हैं और मच्छरों को भगाते हैं।
तुलसी का पौधा उच्छवास में ओजोन गैस छोड़ता है, जो विशेष स्फूर्तिप्रद है।
आभामंडल नापने के यंत्र यूनिवर्सल स्कैनर द्वारा एक व्यक्ति पर परीक्षण करने पर यह बात सामने आयी कि तुलसी के पौधे की 9 बार परिक्रमा करने पर उसके आभामंडल के प्रभाव क्षेत्र में 3 मीटर की आश्चर्यकारक बढ़ोतरी हो गयी। आभामंडल का दायरा जितना अधिक होगा, व्यक्ति उतना ही अधिक कार्यक्षम, मानिस रूप से क्षमतावान व स्वस्थ होगा।
लखनऊ के किंग जार्ज कॉलेज में तुलसी पर अनुसंधान किया गया। उसके अनुसार पेप्टिक अल्सर, हृदयरोग, उच्च रक्तचाप, कोलाइटिस और दमे (अस्थमा) में तुलसी का उपयोग गुणकारी है। तुलसी में एंटीस्ट्रेस (तनावरोधी) गुण है। प्रतिदिन तुलसी की चाय (दूधरहित) पीने या नियमित रूप से उसकी ताजी पत्तियाँ चबाकर खाने से रोज के मानसिक तनावों की तीव्रता कम हो जाती है।
पूज्य बापू जी कहते हैं- वैज्ञानिक बोलते हैं कि जो तुलसी का सेवन करता है उसका मलेरिया मिट जाता है अथवा होता नहीं है, कैंसर नहीं होता। लेकिन हम कहते हैं यह तुम्हारा नजरिया बहुत छोटा है, तुलसी भगवान की प्रसादी है। यह भगवत्प्रिया है, हमारे हृदय में भगवत्प्रेम देने वाली तुलसी माँ हमारी रक्षक और पोषक है, ऐसा विचार करके तुलसी खाओ, बाकी मलेरिया आदि तो मिटना ही है। हम लोगों का नजरिया केवल रोग मिटाना नहीं है बल्कि मन प्रसन्न करना है, जन्म-मरण का रोग मिटाकर जीते जी भगवद्रस जगाना है।
कम लागत, कम मेहनत और लाभ कई गुना
तुलसी के पत्ते खाने, तुलसी के वातावरण में रहने व प्राणायाम करने से तथा तुलसी का पूजन, रोपण करने से कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक लाभ होते हैं, जिससे दवाओं में होने वाले खर्च एवं उनके दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) से बचाव होता है।
तुलसी की खेती से किसानों की जिंदगी बदल रही है। मालवांचल में एक कृषि वैज्ञानिक की बात मानकर दो किसानों ने तुलसी की खेती शुरू की, जिसमें 15 हजार की लागत पर उन्होंने 3 लाख रूपये कमाये। औषधिये गुणों से भरपूर होने के कारण बाजार में इसकी भारी माँग है। कम्पनियाँ पहले ही किसानों से खरीद का करार कर लेती हैं। (इंडो-एशियन न्यूज सर्विस, दैनिक भास्कर)
फ्रेंच डॉक्टर विक्टर रेसीन ने कहा हैः "तुलसी एक अदभुत औषधि (Wonder Drug) है। इस पर किये गये प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ है कि रक्तचाप और पाचनतंत्र के नियमन में तथा मानसिक रोगों में तुलसी अत्यंत लाभकारी है। इससे रक्तकणों की वृद्धि होती है। मलेरिया तथा अन्य प्रकार के बुखारों में तुलसी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है।"
तुलसी रोगों को तो दूर करती ही है, इसके अतिरिक्त ब्रह्मचर्य की रक्षा करने एवं याद्दाश्त बढ़ाने में भी अनुपम सहायता करती है।
तुलसी की जड़ और पत्ते ज्वर (बुखार) में उपयोगी हैं। वीर्यदोष में इसके बीजों का उपयोग उत्तम है। तुलसी की दूधरहित चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वात-कफ के विकार दूर होते हैं, भूख बढ़ती है। तुलसी की महिमा बताते हुए भगवान शिवजी नारदजी से कहते हैं-
पत्रं पुष्पं फलं मूलं शाखा त्वक् स्कन्धसंज्ञितम्।
तुलसीसंभवं सर्वं पावनं मृत्तिकादिकम्।।
तुलसी का पत्ता, फूल, फल, मूल, शाखा, छाल, तना और मिट्टी आदि सभी पावन हैं। पद्म पुराण, उत्तर खंड 24.2)
आधासीसीः तुलसी पत्ते व काली मिर्च पीसकर उनका रस निकाल लें। एक-एक बूँद रस नाक में डालने से आधासीसी में लाभ होता है।
कान के रोगः तुलसी की पत्तियों को ज्यादा मात्रा में लेकर सरसों के तेल में पकायें। पत्तियाँ जल जाने पर तेल उतार कर छान लें। ठंडा होने पर इस तेल की 1-2 बूँदें कान में डालने से कान के रोग में लाभ होता है।
खाँसीः आधा चम्मच तुलसी रस में आधा चम्मच अदरक रस व 1 चम्मच शहद मिलाकर चाटने से खाँसी में लाभ होता है।
तुलसी व अडूसे के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से पुरानी खाँसी में लाभ होता है।
वातव्याधिः 10-15 तुलसी के पत्ते, 1 या 2 काली मिर्च व 10-15 ग्राम गाय का घी मिलाकर खाने से वातव्याधि में लाभ होता है।
वीर्यरक्षण हेतुः तुलसी बीज का एक चुटकी चूर्ण रात को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट लेने से वीर्यरक्षण में बहुत-बहुत मदद मिलती है।
ज्वर (बुखार)- 15-20 तुलसी पत्ते और 4-5 काली मिर्च का काढ़ा पीने से ज्वर का शमन होता है।
दादः तुलसी पत्तों का रस और नींबू का रस समभाग मिलाकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
वज़न घटाने के लिएः 1 गिलास गुनगुने पानी में 1 नींबू व 25 तुलसी पत्तों का रस व 1 चम्मच शहद मिलाकर सप्ताह में 2-3 दिन सुबह खाली पेट लें। रविवार के दिन न लें।
सौंदर्य- तुलसी और नींबू का रस समभाग मिलाकर सुबह शाम चेहरे पर घिसने से काले दाग दूर होते हैं और सुंदरता बढ़ती है।
बाल झड़ना व सफेद बालः तुलसी पत्ते व आँवला चूर्ण रात को पानी में भिगोकर रख दीजिए। प्रातःकाल उसे छानकर उसी पानी से सिर धोने से सफेद बाल भी काले हो जाते हैं तथा बालों का झड़ना रुक जाता है।
कैंसर के रोगी को 10 ग्राम तुलसी का रस तथा 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह दोपहर शाम देने से अथवा 10 ग्राम तुलसी का रस एवं 50 ग्राम ताजा दही (खट्टा नहीं) देने से उसे राहत मिलती है। एक-एक घंटे के अंतर से दो-दो तुलसी के पत्ते भी मुँह में रखकर चूसते रहें।
सुबह दोपहर शाम दही व तुलसी का रस कैंसर मिटा देता है (सूर्यास्त के बाद दही नहीं खाना चाहिए।) वज्र रसायन की आधी गोली दिन में 2 बार लें। (सभी आश्रमों व समितियों में उपलब्ध)
ओजवान तेजवान बनने का प्रयोग
पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू
जितने तुलसी के बीज हों उनसे दुगना गुड़ ले लो। मान लो 100 ग्राम तुलसी के बीज हैं तो 200 ग्राम गुड़ ले लो।
तुलसी के बीजों को मिक्सी में पीस लो और फिर उस चूर्ण में गुड़ की चाशनी मिलाकर 1-1 ग्राम की गोलियाँ बना लो। बड़े लोग 2 गोली और छोटे बच्चे 1 गोली खाली पेट चूसें। यह गोली सुबह शाम लेने वाले विद्यार्थी की यादशक्ति तो बढ़ेगी, साथ ही साथ वह वीर्यवान, ओजवान, तेजवान एवं बुद्धिमान बनेगा। डरपोक में भी बल आ जायेगा। इसके प्रयोग से कई बीमारियाँ भाग जाती हैं, जैसे स्वप्नदोष, कमजोरी, चमड़ी के रोग, पेट की खराबियाँ, पेट के कृमि, गैस, एसिडिटी, घुटनों का दर्द, ट्यूमर, कैंसर आदि। इससे बहुत फायदा होता है।
शास्त्रों में तो यहाँ तक लिखा है कि ये गोलियाँ यदि कोई नपुंसकता से ग्रस्त व्यक्ति भी खाये तो उसमें भी मर्दानगी आ जायेगी, तो पुरुषों और महिलाओं की तो बात ही क्या ! तुलसी के बीज सभी के लिए लाभप्रद हैं। गर्मियों में यह प्रयोग बंद कर देना या कम कर देना। ये गोलियाँ पानी से भी ले सकते हैं।
कुछ स्फूर्तिदायक प्रयोग
शीतल तुलसी पेय
सामग्रीः तुलसी, सौंफ, सफेद मिर्च, मिश्री आदि।
विधिः 200 मि.ली. पानी में 3 ग्राम सूखे तुलसी पत्तों का चूर्ण, 3 ग्राम पिसी सौंफ, 2-3 पिसी हुई सफेद मिर्च और आवश्यकतानुसार मिश्री डालें। यह पेय शीतलता, शक्ति एवं ताजगी प्रदान करता है।
तुलसी की चायः तुलसी के 5 पत्ते मसलकर एक कटोरी पानी में इतनी देर तक उबालें कि पानी की रंग पीला हो जाये। इसमें एक-दो काली मिर्च, सौंफ, अदरक व थोड़ी सी मिश्री आदि का मिश्रण पीसकर डाल के थोड़ी देर उबालें। तुलसी की चाय तैयार ! यह दिमाग की थकान को दूर कर दिमाग को तेज करती है। इससे नसों का तनाव दूर होकर स्फूर्ति आ जाती है।
सावधानीः इसमें दूध नहीं डालें।
टिप्पणीः यदि दूध मिलाना हो तो आश्रमनिर्मित ओजस्वी चाय का प्रयोग करें। 14 बहुमूल्य औषधियों के संयोग से बनी ओजस्वी चाय भूखवर्धक तथा दिमाग व हृदय के लिए बलदायक है। यह मनोबल बढ़ाती है। मस्तिष्क को तनावमुक्त करती है, जिससे नींद अच्छी आती है। यह यकृत के कार्य को सुधारकर रक्त की शुद्धि करती है।
स्मृतिवर्धक, कैंसर निवारक, त्रिदोषनाशक तुलसी अर्क
यह सर्दी-जुकाम, खाँसी, एसिडिटी, ज्वर, दस्त, उलटी, हिचकी, मुख की दुर्गन्ध, मंदाग्नि, पेचिश में लाभदायी व हृदय के लिए हितकर है। यह रक्त में से अतिरिक्त स्निग्धांश को हटाकर रक्त को शुद्ध करता है। यह सौंदर्य, बल, ब्रह्मचर्य एवं स्मृतिवर्धक व कीटाणु, त्रिदोष और विषनाशक है।
तुलसी टेबलेट
तुलसी टेबलेट पौष्टिक, शक्तिवर्धक व उत्कृष्ट वीर्यवर्धक है। यह स्निग्ध, त्रिदोषशामक, कृमिनाशक तथा हृदय, मूत्र व प्रजनन संस्थान एवं आँतों के लिए विशेष हितकारी है। इसके सेवन से भूख खुलकर लगती है, धातु की रक्षा होती है। रोगप्रतिकारक शक्ति, ओज तेज व बल में वृद्धि होती है।
संजीवनी गोली
यह गोली व्यक्ति को शक्तिशाली, ओजस्वी, तेजस्वी व मेधावी बनाती है। इसमें सभी रोगों का प्रतिकार करने तथा उन्हें नष्ट करने की प्रचंड क्षमता है। यह श्रेष्ठ रसायन द्रव्यों से सम्पन्न होने से सप्तधातु व पंचज्ञानेन्द्रियों को दृढ़ बनाकर वृद्धावस्था को दूर रखती है। हृदय, मस्तिष्क व पाचन संस्थान को विशेष बल प्रदान करती है। इसमें तुलसी बीज होने से सभी उम्रवालों के लिए यह बहुत लाभदायी है।
होमियो तुलसी गोलियाँ
ये हृदयरोग, दमा, टी.बी., हिचकी, विष-विकार, ऋतु परिवर्तनजन्य सर्दी-जुकाम, श्वास-खाँसी, खून की कमी, दंत रोग, त्वचासंबंधी रोग, सिरदर्द, संधिवात, मधुमेह (डायबिटीज), यौन दुर्बलता, प्रजनन व मूत्रवाही संस्थान के रोगों में लाभकारी हैं।
ये हर आयु वर्ग के रोगी तथा निरोगी-सभी के लिए लाभदायी हैं।
उपरोक्त के अलावा अन्य अनेक बीमारियों में भी ये अत्यंत लाभदायी हैं, जिनकी जानकारी के लिए इन गोलियों के साथ दिये गये पर्चे को पढ़ें।
ओजस्वी चाय एवं उपरोक्त चारों औषधियाँ सभी संत श्री आशाराम जी आश्रमों व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं।
सम्पर्क 09218112233, ईमेलः hariomcare@gmail.com
तुलसी पत्र तोड़ें तो ॐ सुप्रभायै नमः, ॐ सुभद्रायै नमः मंत्र बोलते हुए तोड़ें, इससे तुलसी पत्र दैवी औषधि का काम करेंगे।
रविवार को तुलसी पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
तुलसी के पत्ते सूर्योदय के पश्चात ही तोड़ें।
दूध सेवन के आगे पीछे 2 घंटे तक तुलसी नहीं खानी चाहिए।
पूर्णिमा, अमावस्या, द्वादशी और सूर्य-संक्रान्ति गे दिन, मध्याह्नकाल, रात्रि दोनों संध्याओं के समय और अशौच के समय, तेल लगा के, नहाये धोये बिना जो मनुष्य तुलसी का पत्ता तोड़ता है, वह मानो भगवान का मस्तक छेदन करता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खण्ड 21.50-51)
तुलसी के प्रयोग से कैंसर से मुक्ति
पूज्य सदगुरुदेव के श्रीचरणों में सादर प्रणाम !
करीब ढाई वर्ष पूर्व मुझे मुँह का कैंसर हो गया था। डॉक्टरों के अनुसार मेरे बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। ऐसे समय में पूज्य बापू जी के सत्संग के द्वारा मुझे पानी एवं तुलसी के प्रयोग की जानकारी मिली। मैंने प्रतिदिन प्रातःकाल पानी प्रयोग (आधा से डेढ़ गिलास पानी सुबह बासी मुँह पीना), तुलसी का प्रयोग एवं गुरुमंत्र का जप जारी रखा। आज मैं पूर्ण स्वस्थ हूँ। यह केवल पूज्य गुरुदेव की कृपा का ही चमत्कार है। शकुंतला पाटिल, गांधीनगर, गुजरात
तुलसी से बनी दवा के प्रभाव से
12 वर्षों के बाद मिला अनिद्रा से छुटकारा
मुझे पिछले 12 सालों से अनिद्रा का रोग था। बड़े-बड़े डॉक्टरों से इलाज कराया। ई.एन.टी. (नाक, कान एवं गला) के डॉक्टरों ने साइनस बताकर ऑपरेशन का परामर्श दिया तो मनोरोग विशेषज्ञों ने नींद की गोलियाँ देकर सुलाया। परंतु जैसे-जैसे इलाज करता गया, मर्ज भी बढ़ता गया। सिर में हजारों झींगुरों, चिड़ियों की चूँ-चूँ बजती रहती। रात के सन्नाटे में आवाजें और बढ़ जातीं। मैं सारी रात जागता रहता था। प्रातः 5 बाद के एक आध घंटे की हलकी सी नींद आती थी।
मैंने नवम्बर 2011 में हरिद्वार आश्रम में पूज्य बापू जी को अपनी व्यथा सुनायी और प्रार्थना की कि मुझे 12 साल से नींद नहीं आ रही है। अब तो नींद की गोलियों ने भी अपना असर बंद कर दिया है और मैं अवसाद में चला गया हूँ।
करूणसागर बापू जी ने मुझे प्रसादरूप में तुलसी से बनी संजीवनी गोली की एक डिब्बी तथा नींद लाने का मंत्र दिया। मंत्रदाता समर्थ बापू जी द्वारा दिये गये मंत्र व संजीवनी गोली ने गजब का काम किया ! उसी रात मुझे नींद की गोली बिना 7 घंटे खूब गहरी नींद आयी।
पूज्य बापू जी कृपा से मैं रोगमुक्त हुआ। अब पर्याप्त व प्राकृतिक नींद आने लगी। कृपामूर्ति पूज्य बापू जी को कोटि-कोटि प्रणाम !
इन्द्रनारायण शाह, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) सचल दूरभाष 09411352846
गले में तुलसी की माला धारण करने से जीवनीशक्ति बढ़ती है, बहुत से रोगों से मुक्ति मिलती है। शरीर निर्मल, रोगमुक्त व सात्त्विक बनता है।
तुलसी माला से भगवन्नाम जप करने एवं इसे गले में पहनने से आवश्यक एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव में लाभ होता है, संक्रामक रोगों से रक्षा होती है तथा शरीर-स्वास्थ्य में सुधार होकर दीर्घायु में मदद मिलती है।
तुलसी को धारण करने से शरीर में विद्युतशक्ति का प्रवाह बढ़ता है तथा जीव-कोशों का विद्युतशक्ति धारण करने का सामर्थ्य बढ़ता है।
गले में तुलसी माला पहनने से विद्युत तरंगे निकलती हैं जो रक्त संचार में रुकावट नहीं आने देतीं। प्रबल विद्युतशक्ति के कारण धारक के चारों ओर आभामंडल विद्यमान रहता है।
गले में तुलसी माला धारण करने से आवाज सुरीली होती है। हृदय पर झूलने वाली तुलसी माला हृदय व फेफड़े को रोगों से बचाती है। इसे धारण करने वाले के स्वभाव में सात्त्विकता का संचार होता है।
तुलसी की माला धारक के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है। कलाई में तुलसी का गजरा पहनने से नाड़ी संबंधी समस्याओं से रक्षा होती है, हाथ सुन्न नहीं होता, भुजाओं का बल बढ़ता है।
तुलसी की जड़ें अथवा जड़ों के मनके कमर में बाँधने से स्त्रियों को विशेषतः गर्भवती स्त्रियों को लाभ होता है। प्रसव वेदना कम होती है और प्रसूति भी सरलता से हो जाती है। कमर में तुलसी की करधनी पहनने से पक्षाघात (लकवा) नहीं होता एवं कमर, जिगर, तिल्ली, आमाशय और यौनांग के विकार नहीं होते हैं।
यदि तुलसी की लकड़ी से बनी हुई मालाओं से अलंकृत होकर मनुष्य देवताओं और पितरों के पूजनादि कार्य करे तो वे कोटि गुना फल देने वाले होते हैं। जो मनुष्य तुलसी लकड़ी से बनी माला भगवान विष्णु को अर्पित करके पुनः प्रसादरूप से उसे भक्तिपूर्वक धारण करता है, उसके पातक नष्ट हो जाते हैं।
राजस्थान में जयपुर के पास एक इलाका है – लदाणा। पहले वह एक छोटी सी रियासत थी। उसका राजा एक बार शाम के समय बैठा हुआ था। उसका एक मुसलमान नौकर किसी काम से वहाँ आया। राजा की दृष्टि अचानक उसके गले में पड़ी तुलसी की माला पर गयी। राजा ने चकित होकर पूछाः
"क्या बात है, क्या तू हिन्दू बन गया है ?"
"नहीं, हिन्दू नहीं बना हूँ।"
"तो फिर तुलसी की माला क्यों डाल रखी है ?"
"राजासाहब ! तुलसी की माला की बड़ी महिमा है।"
"क्या महिमा है ?"
"राजासाहब ! मैं आपको एक सत्य घटना सुनाता हूँ। एक बार हमैं अपने ननिहाल जा रहा था। सूरज ढलने को था। इतने में मुझे दो छाया-पुरुष दिखाई दिये, जिनको हिन्दू लोग यमदूत बोलते हैं। उनकी डरावनी आकृति देखकर मैं घबरा गया। तब उन्होंने कहाः 'तेरी मौत नहीं है। अभी एक युवक किसान बैलगाड़ी भगाता-भगाता आयेगा। यह जो गड्ढा है उसमें उसकी बैलगाड़ी का पहिया फँसेगा और बैलों के कंधे पर रखा जुआ टूट जायेगा। बैलों को प्रेरित करके हम उद्दंड बनायेंगे, तब उनमें से जो दायीं ओर का बैल होगा, वह विशेष उद्दंड होकर युवक किसान के पेट में अपना सींग घूसा देगा और इसी निमित्त से उसकी मृत्यु हो जायेगी। हम उसी का जीवात्मा लेने आये हैं।
राजासाहब ! खुदा की कसम, मैंने उन यमदूतों से हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि 'यह घटना देखने की मुझे इजाजत मिल जाय।' उन्होंने इजाजत दे दी और मैं दूर एक पेड़ के पीछे खड़ा हो गया। थोड़ी ही देर में उस कच्चे रास्ते से बैलगाड़ी दौड़ती हुई आयी और जैसा उन्होंने कहा था ठीक वैसे ही बैलगाड़ी को झटका लगा, बैल उत्तेजित हुए युवक किसान उन पर नियंत्रण पाने में असफल रहा। बैल धक्का मारते-मारते उसे दूर ले गये और बुरी तरह से उसके पेट में सींग घुसेड़ दिया और वह मर गया।"
राजाः "फिर क्या हुआ ?"
नौकरः "हुजूर ! लड़के की मौत के बाद मैं पेड़ की ओट से बाहर आया और दूतों से पूछाः 'इसकी रूह (जीवात्मा) कहाँ है, कैसी है ?'
वे बोलेः 'वह जीव हमारे हाथ नहीं आया। मृत्यु तो जिस निमित्त से थी, हुई किंतु वहाँ हुई जहाँ तुलसी का पौधा था। जहाँ तुलसी होती है वहाँ मृत्यु होने पर जीव भगवान श्रीहरि के धाम में जाता है।'
हुजूर ! तब से मुझे ऐसा हुआ कि मरने के बाद मैं बिहिश्त में जाऊँगा कि दोजख में यह मुझे पता नहीं, इसलिए तुलसी की माला तो पहन लूँ ताकि कम-से-कम आपके भगवान नारायण के धाम में जाने का तो मौका मिल ही जायेगा और तभी से मैं तुलसी की माला पहनने लगा।"
कैसी दिव्य महिमा है तुलसी माला धारण करने की ! इसीलिए हिन्दुओं में किसी का अंत समय उपस्थित होने पर उसके मुख में तुलसी का पत्ता और गंगाजल डाला जाता है ताकि जीव की सदगति हो जाय।
हम पति पत्नी दोनों ने पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू से मंत्रदीक्षा ली है। एक बार मैंने गोरेगाँव(मुंबई) आश्रम में ऋषि प्रसाद पत्रिका के सौ सदस्य बनाने का संकल्प लिया। संकल्प पूरा होने पर मुझे गुरुदेव के प्रसादरूप में तुलसी की माला मिली। घर आने पर माला देखते ही मेरे पतिदेव आनंदित होकर बोलेः "मुझे लगता है कि बापू जी ने यह माला मेरे लिए ही दी है।" मैंने वह माला उनको दे दी। अगले दिन जब वे स्कूटर से ऑफिस जा रहे थे तो अचानक सामने से आ रहे तेल के टैंकर से टकरा गये। आसपास खड़े लोगों ने देखते ही कहा, 'यह तो गया !' पतिदेव का हाथ उस तुलसी की माला पर गया और वे प्रार्थना करने लगे, 'हे गुरुदेव ! मेरी रक्षा करो।' उसी क्षण पूज्य बापू जी सामने प्रकट हो उन्हें सड़क के किनारे करके अदृश्य हो गये। पतिदेव के कपड़े पेट्रोल में भीगकर काले हो गये थे और फट गये थे किंतु शरीर पर एक भी चोट नहीं थी। पूज्य बापू जी की कृपा से मेरे पतिदेव के प्राणों की रक्षा हुई।
तब से मैंने निश्चय कर लिया कि 'जिस सेवा से मेरे पतिदेव की रक्षा हुई, वह सेवा और ज्यादा करूँगी और लोगों तक पूज्य बापू जी का कृपा प्रसाद यह ऋषि प्रसाद पत्रिका पहुँचाऊँगी।'
रूचि सिंह, कोलाबा, नेवी नगर, मुंबई, सचल दूरभाष 08108774877.
बापूजी से स्पर्शित तुलसी माला बनी संजीवनी बूटी
एक सड़क दुर्घटना में मेरी बहन के पति की हालत अधमरे जैसी हो गयी थी। उनकी हालत इतनी गम्भीर हो गयी कि उन्हें साँस लेने में भी तकलीफ होने लगी। डॉक्टरों ने वेंटीलेटर लगा दिया।
मेरे गले में पूज्य बापू जी द्वारा स्पर्श की हुई तुलसी माला थी। मेरी बहन ने वह माला अपने पति को स्पर्श कराने के लिए मुझसे ले ली और जब वह अंदर गयी तो देखा कि उसके पति लगभग प्राणहीन हो चुके हैं। फिर भी उसने गुरुदेव का ध्यान करके वह माला उनके माथे पर स्पर्श करायी और बापू जी से प्रार्थना की। आँखों में आँसू लेकर वह वापस आयी और बोलीः "दीदी ! उनमें कुछ नहीं बचा है, अब बापू जी ही कुछ कर सकते हैं।" मुझे गुरुदेव पर विश्वास था। मैंने सब रिश्तेदारों को श्री आशारामायण का पाठ करने के लिए कहा और मैंने पाठ भी आरम्भ कर दिया। अभी दस-ग्यारह ही पाठ हुए थे कि डॉक्टर ने मेरी बहन को अंदर बुलाया और उसके पति ने सजग होकर सिर हिला के उसके तरफ इशारा क्या। धन्य हैं मेरे गुरुदेव जिन्होंने मेरी बहन के पति के प्राण वापस ला दिये ! ऐसे गुरुदेव के उपकारों का बदला हम कभी नहीं चुका सकते।
श्रीमती दर्शना शर्मा, अम्बाला (हरि.), सचल दूरभाषः 09034290395
क्रिसमस और खिस्ती नववर्ष पर तीन गुनी अल्कोहल खपतः एसोचैम
वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम के क्रिसमस और खिस्ती नववर्ष पर अल्कोहल पर खपत किये गये सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष सामने आया है कि इन अवसरों पर 14 से 19 वर्ष के किशोर भी शराब का जमकर सेवन करते हैं और यही कारण है कि इस दौरान शराब की खपत तीन गुनी तक बढ़ जाती है। इन दिनों में दूसरे मादक पेय पदार्थों की भी खपत बढ़ जाती है। बड़ों के अलावा छोटी उम्रवाले भी बड़ी संख्या में इनका सेवन करते हैं। इससे किशोर-किशोरियों, कोमल वय के लड़के-लड़कियों को शारीरिक नुकसान तो होता ही है, उनका व्यवहार भी बदल जाता है और हरकतें भी जोखिमपूर्ण हो जाती हैं। उसका परिणाम कई बार एचआईवी संक्रमण (एड्स रोग) के तौर पर सामने आता है तो कइयों को टी.बी., लीवर की बीमारी, अल्सर और गले का कैंसर जैसे कई असाध्य रोग भी पैदा हो जाते हैं। करीब 70 प्रतिशत किशोर फेयरवेल पार्टी, क्रिसमस एवं खिस्ती नूतन वर्ष पार्टी, वेलेंटाइन डे और बर्थ डे जैसे अवसरों पर शराब का सेवन करते हैं। एक अन्य सर्वेक्षण के अनुसार भारत में कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 40 प्रतिशत शराब के कारण होती हैं।
समझदारों एवं सूत्रों का कहना है कि क्रिसमस (25 दिसम्बर) के दिनों में शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, युवाधन की तबाही, आत्महत्याएँ खूब होती हैं। इसलिए 25 दिसम्बर से 1 जनवरी तक विश्वगुरु भारत कार्यक्रम आयोजन करें। (देखें आगे)
घर के झगड़े मिटाकर सुख शांति लाने हेतु उपाय
पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू
तुलसी के थोड़े पत्ते पानी में डाल के उसे सामने रखकर भगवद्गीता का पाठ करें। फिर घर के सभी लोग मिल के भगवन्नाम-कीर्तन करके हास्य प्रयोग करें और वह पवित्र जल सब लोग ग्रहण करें। यह प्रयोग करने से घर के झगड़े मिटते हैं, शराबी की शराब छूटती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।
25 दिसम्बर को क्यों मनायें 'तुलसी पूजन दिवस'?
इन दिनों में बीते वर्ष की विदाई पर पाश्चात्य अंधानुकरण से नशाखोरी, आत्महत्या आदि की वृद्धि होती जा रही है। तुलसी उत्तम अवसादरोधक एवं उत्साह, स्फूर्ति, सात्त्विकता वर्धक होने से इन दिनों में यह पर्व मनाना वरदानतुल्य साबित होगा।
धनुर्मास में सभी सकाम कर्म वर्जित होते हैं परंतु भगवत्प्रीतिर्थ कर्म विशेष फलदायी व प्रसन्नता देने वाले होते हैं। 25 दिसम्बर धनुर्मास के बीच का समय होता है।
विदेशों में भी होती है तुलसी पूजा
मात्र भारत में ही नहीं वरन् विश्व के कई अन्य देशों में भी तुलसी को पूजनीय व शुभ माना गया है। ग्रीस में इस्टर्न चर्च नामक सम्प्रदाय में तुलसी की पूजा होती थी और सेंट बेजिल जयंती के दिन नूतन वर्ष भाग्यशाली हो इस भावना से चढ़ायी गयी तुलसी के प्रसाद को स्त्रियाँ अपने घर ले जाती थीं।
तुलसी पूजन विधि
25 दिसम्बर को सुबह स्नानादि के बाद घर के स्वच्छ स्थान पर तुलसी के गमले को जमीन से कुछ ऊँचे स्थान पर रखें। उसमें यह मंत्र बोलते हुए जल चढ़ायें-
महाप्रसादजननी सर्वसौभाग्यवर्धनी।
आधिव्याधि हरिर्नित्यं तुलसि त्वां नमोऽस्तु ते।।
फिर तुलस्यै नमः मंत्र बोलते हुए तिलक करें, अक्षत (चावल) व पुष्प अर्पित करें तथा कुछ प्रसाद चढ़ायें। दीपक जलाकर आरती करें और तुलसी जी की 7,11, 21, 51 या 111 परिक्रमा करें। उस शुद्ध वातावरण में शांत हो के भगवत्प्रार्थना एवं भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करें। तुलसी के पास बैठकर प्राणायाम करने से बल, बुद्धि और ओज की वृद्धि होती है।
तुलसी पत्ते डालकर प्रसाद वितरित करें। तुलसी के समीप रात्रि 12 बजे तक जागरण कर भजन, कीर्तन, सत्संग-श्रवण व जप करके भगवद्-विश्रांति पायें। तुलसी नामाष्टक का पाठ भी पुण्यकारक है। तुलसी पूजन अपने नजदीकी आश्रम या तुलसी वन में अथवा यथा अनुकूल किसी भी पवित्र स्थान पर कर सकते हैं।
तुलसी नामाष्टक
वृन्दां वृन्दावनीं विश्वपावनीं विश्वपूजिताम्।
पुष्पसारां नन्दिनीं च तुलसीं कृष्णजीवनीम्।।
एतन्नामष्टकं चैतस्तोत्रं नामार्थसंयुतम्।
यः पठेत्तां च संपूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत्।।
भगवान नारायण देवर्षि नारदजी से कहते हैं- "वृंदा, वृंदावनी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी – ये तुलसी देवी के आठ नाम हैं। यह सार्थक नामवली स्तोत्र के रूप में परिणत है। जो पुरुष तुलसी की पूजा करके इस नामाष्टक का पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।" (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड 22.32-33)
25 दिसम्बर से 1 जनवरी के दौरान शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, आत्महत्या जैसी घटनाएँ, किशोर-किशोरियों व युवक युवतियों की तबाही एवं अवांछनीय कृत्य खूब होते हैं। इसलिए विश्वमानव के कल्याण के लिए पूज्य बापू जी का आवाहन हैः "25 दिसम्बर से 1 जनवरी तक तुलसी पूजन, जप माला पूजन, गौ पूजन, हवन, गौ गीता गंगा जागृति यात्रा, सत्संग आदि कार्यक्रम आयोजित हों, जिससे सभी की भलाई हो, तन तंदुरुस्त व मन प्रसन्न रहे तथा बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रसाद प्रकट हो और न आत्महत्या करें, न गोहत्याएँ करें, न यौवन-हत्याएँ करें बल्कि आत्मविकास करें, गौ गंगा की रक्षा एवं विकास करें। गौ, गंगा, तुलसी से ओजस्वी तेजस्वी बनें व गीता ज्ञान से अपने मुक्तात्मा, महानात्मा स्वरूप को जानें।"
कार्यक्रम की रूपरेखा
सभी आश्रम, समितियाँ एवं साधक-परिवार अपने क्षेत्र में निम्नलिखित कार्यक्रमों का आयोजन करके लाभ लें एवं दूसरों को दिलायें।
25 दिसम्बर तुलसी पूजन दिवस। 27 दिसम्बरः जप माला पूजन, हवन, गौ पूजन। 30 दिसम्बरः सहज स्वास्थ्य एवं योग प्रशिक्षण शिविर (बाल संस्कार केन्द्रों एवं गुरुकुलों में इसका आयोजन अवश्य करें।)
31 दिसम्बरः राष्ट्र जागृति यात्रा, गौ गीता गंगा जागृति यात्रा।
विशेषः 25 दिसम्बर से 1 जनवरी के दौरान श्री आशारामायण जी के पाठ का अवश्य आयोजन करें। उपरोक्त कार्यक्रमों का आयोजन कैसे करें इस बारे में अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करें। (079-27505010-11)
'घर-घर तुलसी लगाओ' अभियान
प्रणेताः पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू आप भी बनें इस अभियान में भागीदार
25 दिसम्बर से पहले तुलसी का पौधा हर घर में पहुँचे ताकि हर कोई इस पुण्य-स्वास्थ्य प्रदायक, धन-धान्य-सौभाग्य वर्धक, हृदय में भगवद्भक्ति उत्पन्न करने वाले पूजन का लाभ ले सकें। पूज्य बापू जी द्वारा चलाया गया यह लोकहितकारी दैवी कार्य खूब व्यापक हो और समस्त विश्वमानव इससे लाभान्वित हो इस उद्देश्य से महिला उत्थान मंडल द्वारा घर-घर तुलसी लगाओ अभियान शुरु किया गया है।
मानव जीवन के लिए परम आवश्यक
पूज्य बापू जी कहते हैं- "हम 1 दिन में लगभग 1.5 किलो भोजन करते हैं, 2 से 3 लिटर पानी पीते हैं लेकिन 21 हजार 600 श्वास लेते हैं। उसमें 11 हजार लिटर हवा लेते छोड़ते हैं, जिससे हमें लगभग 10 किलो भोजन का बल मिलता है। अब वह वायु जितनी गंदी (प्रदूषित) होती है, उतना ही लोगों का स्वास्थ्य और (वायुरूपी) भोजन खराब हो जाता है।"
शुद्ध वायु-प्राप्ति के उपाय
पूज्य बापू जी कहते हैं- "नीलगिरी (सफेदा) के वृक्ष वायु को गंदा करते हैं, जीवनीशक्ति हरते हैं। इसके विपरीत तुलसी, पीपल के पेड़ जीवनीशक्ति विपुल प्रमाण में देते हैं। अतः तुलसी, पीपल, नीम तथा आँवले के वृक्ष दिल खोलकर लगाने चाहिए।
ये वृक्ष लगाने से आपके द्वारा प्राणिमात्र की बड़ी सेवा होगी। खुद वृक्ष लगाना और दूसरों को प्रेरित करना भी एक सेवा है।
राष्ट्रीय कर्तव्य है पर्यावरण के लिए पेड़ लगाना। पेड़ हमारे स्वास्थ्य के लिए और पर्यावरण के लिए वरदान हैं, आशीर्वाद हैं।"
देशव्यापी पर्यावरण-सुरक्षा अभियान
पूज्य बापू जी पर्यावरण सुरक्षा के सबल प्रहरी हैं। बापू जी वृक्षारोपण व हवामान-शुद्धि के लिए अपने सत्संगों में पिछले 50 वर्षों से विशेष जोर देते रहे हैं। इतना ही नहीं, अपने सभी आश्रमों तथा अन्य जगहों पर पीपल, नीम, आँवला, तुलसी आदि वृक्ष विशेष रूप से लगवाते रहे हैं। बापू जी अपने निवास स्थान के आसपास तुलसी वन लगवाते हैं और पेड़ पौधों का ध्यान भी रखते हैं।
सच.......... जो आप तक पहुँच न सका
आशाराम जी बापू पर आरोप लगाने वाली सूरत की महिल ने गांधीनगर कोर्ट में एक अर्जी डालकर बताया कि उसने धारा 164 के अंतर्गत (बापू जी के खिलाफ) पहले जो बयान दिया था वह डर और भय के कारण दिया था। अब वह 164 के अंतर्गत दूसरा बयान देकर केस का सत्य उजागर करना चाहती है।
मेडिकल रिपोर्ट ने दी बापू को क्लीन चिट
जोधपुर केस में लड़की का मेडिकल करने वाली दिल्ली के लोकनायक अस्पताल की गायनेकोलोजिस्ट डॉक्टर शैलजा वर्मा ने अदालत में दिये बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि मेडिकल के दौरान लड़की के शरीर पर रत्तीभर भी खरोंच के निशान नहीं थे और न ही प्रतिरोध के कोई निशान थे।"
यह केस तो तुरन्त रद्द होना चाहिए
सुप्रसिद्ध न्यायविद् डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी
"लड़की के टेलिफोन रिकॉर्डस के पता लगा कि जिस समय पर वह कहती है कि वह कुटिया में थी, उस समय वह वहाँ थी ही नहीं ! उसी समय बापू जी सत्संग में थे और आखिर में मँगनी के कार्यक्रम में व्यस्त थे। वे भी वहाँ कुटिया में नहीं थे। यह केस तो तुरन्त रद्द होना चाहिए।"
यह केस भी उसी षड्यंत्र की कड़ी है
श्री उदय सांगाणी
जोधपुर सत्र न्यायालय में श्री उदय सांगाणी ने षड्यंत्र की सच्चाई न्यायालय के सामने रखते हुए हो जो बयान दिये, उसके मुख्य अंशः
षड्यंत्र के सूत्रधार व उनकी चाल
8 अगस्त 2008 को षड्यंत्रकारियों ने आश्रम में बापू जी के नाम फेक्स किया कि 'हमें 50 करोड़ रूपये दो अन्यथा तुम और तुम्हारा परिवार जेल की हवा खाने को तैयार हो जाओ। बनावटी मुद्दे तैयार हैं, तुम्हें पैसों की हेराफेरी में, जमीनी एवं लड़कियों के झूठे केसों में फँसायेंगे।'
उसके बाद कई बार ऐसे प्रयास किये गये, कई लड़कियों को भी भेजा गया पर उनके प्रयास असफल रहे। यह केस भी उसी षड्यंत्र की एक कड़ी है।
उपरोक्त धमकी देने वाले लोगों तथा धर्मांतरणवालों ने एकजुट होकर आश्रम के विरुद्ध षड्यंत्र किया।
षड्यंत्र की खुली पोल
षड्यंत्रकारियों द्वारा किस प्रकार से लड़कियों को तैयार किया जाता है और क्या-क्या षड्यंत्र चल रहे हैं, उसका स्टिंग ऑपरेशन देखें इस लिंक पर https://goo.gl/sjfqid
उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्राप्ति हेतु
प्रातः 5 से 7 बजे के बीच जीवनीशक्ति बड़ी आँत में होती है। इस समय मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए। सुबह 7 बजे के बाद जो मल त्याग करते हैं उन्हें अनेक बीमारियाँ होती हैं।
सुबह 9 से 11 के बीच अग्नाशय व प्लीहा में तथा शाम 5 से 7 बजे के बीच गुर्दे में जीवनीशक्ति होती है। यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है। सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक भोजन न करें।
रात्रि 9 से 11 बजे तक जीवनीशक्ति रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरूरज्जू में होती है। इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है। रात्रि में 11 से 3 बजे तक जीवनीशक्ति पित्ताशय व यकृत में होती है। अतः रात्रि 9 से 3 बजे तक की नींद सर्वोत्तम है।
रात्र 11 के बाद के जागरण से पित्त विकार, अनिद्रा, नेत्ररोग, यकृत (लीवर) व पाचन तंत्र की खराबी होती है तथा बुढ़ापा जल्दी आता है।
कलियुगी पूतनाएँ हैं तथाकथित विदेशी गायें ?
आप गाय का दूध पी रहे हैं या कई विदेशी पशुओं का ?
आज बहुत से लोग जो जर्सी, होल्सटीन आदि नस्लों का दूध पी रहे हैं, सोचते होंगे कि हम गाय का पौष्टिक दूध पी के तंदुरुस्त हो रहे हैं' लेकिन क्या यह सच है ? कई अनुसंधानों से पता चला है कि जर्सी, होल्सटीन आदि पशुओं का दूध पीने से अनेक गम्भीर बीमारियाँ होती हैं। मैड काऊ, ब्रुसेलोसिस, कई प्रकार के चर्मरोग, मस्तिष्क ज्वर आदि रोग जर्सी, होल्सटीन को पालने वालों, उनके परिवार व आसपास के लोगं में हो रहे हैं। एक शोध के अनुसार पशुओं से मनुष्यों में होने वाले रोगों से विश्वभर में प्रतिवर्ष 22 लाख लोग मरते हैं। कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री सुभाष पालेकर जी का कहना हैः "जर्सी आदि नस्लें गाय नहीं हैं।"
पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है संकर नस्ल
राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल के डॉक्टर डी.के. सदाना का कहना है कि "भारत की मान्य नस्लों (गीर, थारपारकर, कांकरेज, ओंगोल, कांगायम एवं देवनी) की क्रासब्रीडिंग पर पूर्णतया रोक लगा देनी चाहिए। इन मान्य नस्लों पर क्रासब्रीडिंग करके उनके मूल गुणों को नष्ट करना देश के लिए अत्यंत हानिप्रद होगा।" विदेशी संकरित जर्सी, होल्सटीन पशुओं को गाय कहना धरती की वरदानस्वरूपा गौ का घोर अपमान है। वे महज संकरित जर्सी, होल्सटीन पशु हैं। उन्हें गाय के रूप में प्रचारित कर भारतवासियों को गुमराह किया गया है। इनके दूध, मूत्र, गोबर और इनको छू के आने वाली हवाओं से भी होने वाली घातक बीमारियों को देखकर इन्हें जहरीले तत्त्व और रोग बीमारियों का उपहार ले के आयी हुई कलियुगी पूतनाएँ ही कहना ठीक रहेगा। द्वापर की पूतना तो केवल स्तन पर जहर का लेप करके आयी थी परंतु ये कलियुगी पूतनाएँ तो अपने दूध में ही धीमा जहर (स्लो पॉइजन) घोल के आयी हैं।
|
देशी गाय |
जर्सी आदि विदेशी गाय |
|
देशी गाय का दूध पेप्टिक अल्सर, मोटापा, जोड़ों का दर्द, दमा, स्तन व त्वचा का कैंसर आदि अनेक रोगों से रक्षा करता है। इसमें पाये जाने वाले विशिष्ट पोषक तत्त्व शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाते हैं। |
इनका दूध मान-शरीर मं वीटा केसोमार्फिन – 7 नामक विषाक्त तत्त्व छोड़ता है। इससे मधुमेह, धमनियों मं खून जमना, हृदयाघात, ऑटिज्म, स्किजोफ्रेनिया (मानसिक रोग) जैसी घातक बीमारियाँ होती हैं। |
|
रोगप्रतिरोधक क्षमता अधिक होने से इनको बीमारियाँ कम होती हैं। |
रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होने से इनमें थनैला, मुँहपका, पशु प्लेग आदि अनेक रोगों का प्रकोप होता है। |
|
इनका दूध सुपाच्य, पौष्टिक व सात्त्विक है। |
इनका दूध ऐसा गुणकारी नहीं है। |
|
इनमें स्थित सूर्यकेतु नाड़ी स्वर्ण-क्षार बनाती है, जिसका बड़ा अंश दूध और अल्पांश गोमूत्र में आता है। देशी गोदुग्ध पीला होता है। |
इनमें सूर्यकेतु नाड़ी नहीं होती इसलिए इनका दूध सफेद और सामान्य होता है। |
|
इनके पंचगव्य का विभिन्न धार्मिक कार्यों में औषधिय रूप में प्रयोग होता है। |
विदेशी नस्लों के दूध, मल, मूत्र आदि में ये विशेषताएँ दूर-दूर तक नहीं हैं। |
|
इनके रखरखाव में कम खर्च आता है। |
इनके रखरखाव में बहुत खर्च आता है। |
|
इनके जीने की दर है 80-90 प्रतिशत। |
इनके जीने की दर है मात्र 40-50 प्रतिशत। |
|
विपरीत मौसम में भी इनके दूध उत्पादन में 5-10 प्रतिशत की ही कमी होती है। |
इनका दूध उत्पादन 70-80 प्रतिशत कम हो जाता है। |
|
यह 15-17 बार गर्भवती हो सकती है। |
यह 5-7 बार गर्भवती हो सकती है। |
|
इनके बैल खेती हेतु उपयोगी होते हैं। |
इनके बैल खेती हेतु उपयोगी नहीं होते हैं। |
देशी गाय का दूध पीना सर्वश्रेष्ठ व अमृतपान के तुल्य है। यदि यह न मिले तो भैंस (प्राकृतिक पशु) के दूध से काम चला लें किन्तु जर्सी आदि विदेशी पशुओं का दूध भूलकर भी न पियें क्योंकि यह भैंस के दूध से अनेक गुना हानिकारक है।
लेखकः डॉक्टर उमेश पटेल, पशु-चिकित्सक
बल, बुद्धि, स्फूर्ति, स्मृतिवर्धक विभिन्न पेय
लीची पेयः यह कमजोरी दूर कर शरीर को पुष्ट करता है। हृदय के लिए हितकर है व पाचनक्रिया को मजबूत बनाता है। उत्त्म स्वास्थ्य हेतु यह स्वादिष्ट व शीतलता प्रद मिश्रण है।
संतरा पेय व संतरा शरबत- संतरे के स्वाद व किन्नु रस से युक्त। यह खून की कमी व कब्ज में लाभदायक है। पाचनतंत्र को मजबूत बनाता है तथा हृदय एवं आँखों के लिए हितकर है। शक्ति व स्फूर्ति प्रदायक है तथा त्वचा चमकदार व कोमल बनती है। यह कोलेस्ट्रोल को कम करने की क्षमता रखता है। कैल्शियम और विटामिन सी की कमी से होने वाले रोग दूर करने में यह बहुत उपयोगी है।
सेब पेयः उत्त्म सेवफलों का चयन करके आपके उत्तम स्वास्थ्य हेतु पोषण और स्वाद से भरपूर अनोखा मिश्रण। कहा गया है- "प्रतिदिन एक सेवफल खाओ और डॉक्टर को दूर ही रखो।"
आँवला अदरक पेयः यह आँवला अदरक पेय मानव शरीर के लिए अत्यंत गुणकारी है। यह रसायन का कार्य करता है, साथ ही रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसके निरंतर सेवन से कब्ज में राहत मिलती है, आँखों की रोशनी बढ़ती है, शरीर का अम्लीय और क्षारीय स्तर संतुलित रहता है।
मैंगो ओज- आम के रस से सातों धातुओं की वृद्धि होती है। यह उत्तम हृदयपोषक है। वीर्य की शुद्धि व वृद्धि करता है तथा आलस्य को दूर करता है। मूत्र साफ लाता है। गुर्दे व मूत्राशय के लिए शक्तिदायक है। दुबले-पतले एवं वृद्ध लोगों को पुष्ट बनाने हेतु यह उत्तम पेय है।
अनानास पेय- यह पित्त विकारों, पीलिया, गले एवं मूत्र संस्थान के रोगों में लाभदायक है। इससे रोगप्रतिरोधक क्षमता, पाचनशक्ति बढ़ती है। यह हड्डियों को मजबूती तथा शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
पलाश शरबत- इसके सेवन से तुरंत शीतलता व स्फूर्ति आती है। पित्तजन्य रोग (जलन, तृष्णा आदि) शांत हो जाते हैं। गर्मी सहन करने की शक्ति मिलती है तथा कई प्रकार के चर्मरोगों में लाभ होता है। यह मूत्रसंबंधी विकारों में भी लाभदायी है। पलाश रसायन अर्थात् बुढ़ापा एवं उससे उत्पन्न रोगों को दूर रखने वाला तथा नेत्रज्योति व बुद्धि वर्धक है।
ब्राह्मी शरबत- बुद्धिवर्धक तथा स्फूर्तिदायक इस शरबत के सेवन से ज्ञानतंतु व मस्तिष्क पुष्ट होते हैं, दिमाग शांत व ठंडा होता है। बौद्धिक थकावट, स्मरणशक्ति की कमी, मानसिक रोग, क्रोध, चिड़चिड़ापन दूर होकर मन बुद्धि को विश्रांति मिलती है। ब्राह्मी जैसे गंध वाले कृत्रिम फ्लेवर नहीं, शुद्ध ब्राह्मी का शरबत हो तब ये लाभ मिलते हैं।
आँवला रस- यह गर्मीनाशक, वीर्यवर्धक व त्रिदोषशामक है। यह दीर्घायु तथा यौवन प्रदान करता है। कांति तथा नेत्रज्योति वर्धक व पाचनतंत्र को मजबूती देने वाला है। इसके सेवन से स्फूर्ति, शीतलता व ताजगी आती है। हृदय व मस्तिष्क को शक्ति मिलती है। आँखों व पेशाब की जलन, अम्लपित्त, श्वेतप्रदर, बवासीर आदि पित्तजन्य अनेक विकारों में लाभ होता है। हड्डियाँ, दाँत व बालों की जड़ें मजबूत बनती हैं एवं बाल काले होते हैं।
प्राप्ति स्थान- सभी संत श्री आशाराम जी आश्रम व समितियों के सेवाकेन्द्र।
सम्पर्कः 09218112233 ईमेल- hariomcare@gmail.com



अवतारों ने भी की तुलसी पूजा
पूजनीय वृक्षों में तुलसी का बड़ा महत्त्वपूर्ण स्थान है। तुलसी का पूजन, दर्शन, सेवन व रोपण आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक – तीनों प्रकार के तापों का नाश कर सुख-समृद्धि देने वाला है।
भगवान शिव कहते हैं- "तुलसी सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली है।" (पद्म पुराण)
अपने हित साधन की इच्छा से दंडकारण्य में व राक्षसों का वध करने के उद्देश्य से सरयू तट पर भगवान श्री राम जी ने एवं गोमती तट पर व वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने तुलसी लगायी थी। अशोक वाटिका में सीता जी ने रामजी की प्राप्ति के लिए तुलसी जी का मानस पूजन ध्यान किया था। हिमालय पर्वत पर पार्वती जी ने शंकर जी की प्राप्ति के लिए तुलसी का वृक्ष लगाया था। (पद्म पुराण)
भगवान विष्णु की कोई भी पूजा बिना तुलसी के पूर्ण नहीं मानी जाती। हमारे ऋषि-मुनि अपने आसपास तुलसी का पौधा लगाते व तुलसीयुक्त जल का आचमन लेते थे। पूज्य बापू जी ने भी रविवार, द्वादशी आदि कुछ दिनों को छोड़कर प्रायः प्रतिदिन तुलसी के पत्तों का सेवन करते हैं। बापू जी करोड़ों सत्संगी भी इस सहज उपलब्ध तुलसी अमृत का लाभ लेकर स्वस्थ, प्रसन्न व भगवदीय भाव से ओतप्रोत होते आ रहे हैं।
'पद्म पुराण' के अनुसार 'जिनके दर्शनमात्र से करोड़ों गोदान का फल होता है, उन तुलसी का पूजन और वंदन क्यों न करें !' (अर्थात् अवश्य करें।)
तकनीकी विशेषज्ञ श्री के.एम.जैन ने एक विशेष यंत्र के माध्यम से परीक्षण करके यह निष्कर्ष निकाला कि 'यदि कोई व्यक्ति तुलसी के पौधे या देशी गाय की नौ बार परिक्रमा करे तो उसके आभामंडल के प्रभाव क्षेत्र में तीन मीटर की आश्चर्यकारक बढ़ोतरी होती है।'
आभामंडल का दायरा जितना अधिक होगा, व्यक्ति उतना ही अधिक कार्यक्षम, मानसिक रूप से क्षमतावान व स्वस्थ होगा।
ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने से बरकत होती है।
चरक सूत्र में आता है कि 'तुलसी हिचकी, खाँसी, विषदोष, श्वास-रोग और पार्श्वशूल को नष्ट करती है। यह वात, कफ और मुँह की दुर्गन्ध को नष्ट करती है।'
फ्रेच डॉक्टर विक्टर रेसीन ने कहा है- "तुलसी एक अदभुत औषधि (Wonder Drug) है।
इजरायल में धार्मिक, सामाजिक, वैवाहिक और अन्य मांगलिक अवसरों पर तुलसी द्वारा पूजन कार्य सम्पन्न होते रहे हैं, यहाँ तक कि अंत्येष्टि क्रिया में भी।
'इम्पीरियल मलेरियल कॉन्फ्रेंस का दावा है कि 'मलेरिया की विश्वसनीय, प्रामाणिक दवा है – तुलसी।'
"तुलसी संक्रामक रोगों, जैसे – यक्ष्मा (टी.बी.), मलेरिया इत्यादि की चिकित्सा में बहुत उपयोगी है।"
''तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में विद्युतीय शक्ति का प्रवाह नियंत्रित होता है और व्यक्ति की जीवन-अवधि में वृद्धि होती है।" वनस्पति वैज्ञानिक डॉक्टर जी.डी. नाडकर्णी
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ