सूर्यग्रहण

ग्रहण के समय जप -ध्यान विशेष फलदायी होते हैं

पूज्यश्री का पावन संदेश
 

 तीन ग्रहण आ रहे है। दो चंद्रग्रहण व एक सूर्यग्रहण। इसलिये धरती पर भयंकर उत्पात होने की संभावना है। इस समय जप में लग जायें सब। 5 जून (चंद्रग्रहण), 21 जून (सूर्यग्रहण) और 5 जुलाई (चंद्रग्रहण)। भाइयों के आश्रम व महिला आश्रम में खबर कर देना। एक महीने में तीन ग्रहण होना भारी खतरा है।

 पिछला चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण कोरोना देकर गया। यह (5 जून को आनेवाला) चन्द्रग्रहण इतना भयंकर नही रहेगा। (21 जून को आनेवाला) सूर्यग्रहण तीसरा विश्वयुद्ध ला सकता है।

 नोट : भारत मे केवल 21 जून के सूर्यग्रहण का प्रभाव रहेगा। 5 जून और 5 जुलाई का चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, उसका प्रभाव विदेश में रहेगा। इसलिए 5 जून और 5 जुलाई को ग्रहण के नियमो का पालन नहीं करना है , पर जप तीनों ग्रहण के दिन करना है। इस संदेश से भयभीत नही होना है जप में लगना है।

 

सूर्यग्रहण तिथि – 21 जून 2020, रविवार
सूतक काल – 20 जून रात 09:15 से ग्रहण समाप्त होने तक, 
ग्रहण काल - 21 जून सुबह 09:15 से दोपहर 11:15 तक

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अगर (ग्रहण के समय) सावधानी रही तो थोड़े ही समय में बहुत पुण्यमय, सुखमय जिंदगी होगी , अगर असावधानी हुई तो थोड़ी ही असावधानी से बड़े दण्डित हो जायेंगे, दुखी हो जायेंगे :

https://www.facebook.com/watch/?v=1510864179091148

(संत श्री आशारामजी बापू के सत्संग से )

"आज रात्रि को ग्रहण का सुतक लगेगा | कल सूर्य ग्रहण हैं |

अगर चंद्र ग्रहण पहले होता हैं और बाद में सूर्य ग्रहण बाद में होता हैं , तो समझ लेना के अब ... क्षत्रिय बल मतलब शारीरिक बल और बौद्धिक बल के बिच कलह बढ़ने वाला हैं |

झगडे बढ़ेंगे ... पार्टियों के बिच कलह बढ़ेंगे |
श्रमिक और बुद्धि-जीवियों में कलह बढ़ने के संकेत हैं |
झगडे बढ़ने के लक्षण है ... पहले चंद्र ग्रहण और बाद में सूर्य ग्रहण |
आनेवाले दिन झगडे बढ़ेंगे |

ब्राह्मण और क्षत्रिय के बिच संघर्ष अर्थात  बुद्धिमान और साहसी लोगों के बिच .... शारीरिक बल और बौद्धिक बल के बिच झगडा होगा |

इस झगड़े से बचने के लिए .... कलजुग के दोषों को हरनेवाला भगवन्नाम कीर्तन मैं विशेष रूप से करवा रहा हूँ , ताकि हमारे देश पर ये कुचक्र का प्रभाव कम से कम हो जाए |

जहाँ जहाँ भी सूर्य ग्रहण , चंद्र ग्रहण की घटना घटती हैं , ऐसा होता हैं |

अगर सावधानी रही तो थोड़े ही समय में बहुत पुण्यमय, सुखमय जिंदगी होगी , अगर असावधानी हुई तो थोड़ी ही असावधानी से बड़े दण्डित हो जायेंगे, दुखी हो जायेंगे |

ग्रहण के समय दन्त धावन (ब्रश) नहीं करना चाहिए |
ग्रहण के समय पत्ते , तिन्खे, लकड़ी , फुल नहीं तोडना चाहिए |

ग्रहण के अवसर पर दुसरे का अन्न खाने से 12 साल का किया हुआ  जप , तप , दान स्वाहा हो जाता है | ग्रहण के समय दुसरे का अन्न नहीं खाना चाहिए |

सूर्य ग्रहण के समय रुद्राक्ष की माला धारण करने से पाप नाश हो जाते हैं |

सूर्य  ग्रहण के समय दीक्षा अथवा दीक्षा लिए हुए मंत्र का जप करने से सिद्धि हो जाती हैं |

सूर्य ग्रहण के समय किया हुआ जप 10,00,000 गुना फलदायी होता हैं |"

 

स्थान ग्रहण प्रारंभ(सुबह) ग्रहण समाप्ति(दोप.)
Ahmedabad 10.03 से 01.33 तक
Delhi 10.20 से 01.49 तक
Surat & Nashik 10.09 से 01.33 तक
Guwahati 10.47 से 02.25 तक
Jodhpur 10.08 से 01.37 तक
Lucknow 10.26 से 01.49 तक
Bhopal 10.14 से 01.48 तक
Raipur 10.25 से 02.00 तक
Jammu 10.21 से 01.42 तक
Chandigarh 10.22 से 01.48 तक
Ranchi & Patna 10.36 से 02.10 तक
Kolkata 10.46 से 02.18 तक
Bhubaneswar 10.37 से 02.10 तक
Chennai 10.22 से 01.42 तक
Bengaluru 10.12 से 01.32 तक
Hyderabad 10.14 से 01.45 तक
Nagpur 10.17 से 01.51 तक
Mumbai 10.00 से 01.28 तक
स्थान ( विदेशों में ) ग्रहण प्रारंभ ग्रहण समाप्ति
Kathmandu (Nepal) सुबह 10.53 से दोप. 01.25 तक
Athens (Greece) सुबह 07.48 से सुबह 09.12 तक
Baku (Azerbaijan) सुबह 08.46 से दोप. 11.05 तक
Hagatna (USA) शाम 05.25 से शाम 06.51 तक
Nairobi (Kenya) सुबह 06.46 से सुबह 09.04 तक
Dubai सुबह 08.14 दोप. 11.13 तक
Hong Kong दोप. 02.36 से शाम 05.25 तक

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