Thought of the day

शिष्य गुरु के उपकार (ऋण) से किस प्रत्युपकार द्वारा उऋण हो सकते हैं ? किसी से भी नहीं हो सकते! इसलिए शिष्यों को चाहिए कि मन, वचन और कर्म से गुरु के सम्मुख आत्मसमर्पण कर दें । वही उनका गुरु के उपकार से निस्तार है । अन्य किसी भी कर्म से गुरु जी के उपकार से निस्तार नहीं हो सकता ।” (श्री योगवासिष्ठ महारामायण, निर्वाण प्रकरण, सर्ग 216, श्लोक 21-23)

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

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Kamika Ekadashi : 4th Aug

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Ravivari Saptami : 15th Aug

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Independence Day : 15th Aug

Independence Day

Putrada/Pavitra Ekadashi : 18th Aug

Putrada/Pavitra Ekadashi
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