Thought of the day

सेवा साधक के लिए अपनी क्षुद्र वासना व अहं मिटाने की परम औषधि है । सेवा से अंतःकरण की शुद्धि होती है और शुद्ध अंतःकरण का ब्रह्मज्ञान से सीधा संबंध है । यह सेवा ही है जो सर्वेश्वर तक पहुँचने का पथ प्रशस्त करती है । निष्काम भाव से सभी की सेवा करने से स्वयं की सेवा का भी द्वार खुल जाता है ।

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

Upcoming Tithis-Festivals

Apara Ekadashi : 26th May

Apara Ekadashi
Disclaimer : This site has been developed by Devotees of Asharam ji Bapu and is not affiliated to the official Pujya Sant Shri Asharam ji Bapu Organisation. This site is maintained and the information are provided as a seva to fellow Pujya Asharamji Bapu Devotees.