Thought of the day

विवेक का उपयोग करें कि जो चाहते हैं उसकी आवश्यकता है कि इच्छा ? जो आवश्यकता होगी वह तो अपने-आप सहज में पूरी होती जायेगी। उसके लिए बेचैनी नहीं रहेगी और अगर व्यर्थ की इच्छा होगी तो पूर्ण होने के बाद भी अहंकार या आसक्ति बढ़ा देगी।बिन जरूरी इच्छा अहंकार बढ़ा देती है।जहाँ चाह रखी, वहीं नियति कुछ-न-कुछ मुसीबत जरूर खड़ी कर देगी।

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

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