Thought of the day

तुम्हारे ये जो श्वासोच्छ्वास चल रहे हैं तो समझो यह आयुष्यरूपी गाड़ी चल रही है। रेलगाड़ी तो कहीं दो पाँच मिनट, आधा घंटा भी रूकती है पर यह गाड़ी तो चौबीस घंटों चलती ही रहती है। रेलगाड़ी छुक-छुक करती चलती है, यह गाड़ी ʹसोઽहं सोઽहंʹ करती है। रेलगाड़ी में तो आप चाहो तो बीच के स्टेशन में उतरो चाहे अंतिम स्टेशन पर उतरो मर्जी आपकी। इस गाड़ी को तो जहाँ रूके, छोड़ना ही पड़ेगा। ऐसी गाड़ी में साथ में जो स्नेही, सगे-संबंधीरूपी पैसेंजर मिल गये उनके साथ ठीक से संबंध निभा लो लेकिन अंदर से समझ लो कि गाड़ी छूटने तक का खेल है, चाहे उनकी गाड़ी पहले छूटे, चाहे अपनी गाड़ी पहले छूटे। गाड़ी से उतरे कि सब भूल जाना है। केवल अपने घर को याद रखना है।

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

Upcoming Tithis-Festivals

Somvati Amavasya : 31st Jan-1st Feb

Somvati Amavasya

Vasant Panchami : 5th Feb

Vasant Panchami

Parents Worship Day : 14th Feb

Parents Worship Day
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