Thought of the day

परमात्मा तो सब में है और सबका सनातन स्वरूप है। जो नहीं पहचानते हैं, उनका भी वास्तविक स्वरूप परमात्मा ही है।\nममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।\n‘इस देह में यह सनातन जीवात्मा मेरा ही अंश है।’ (गीताः 15.7)\nआप भगवान के सनातन अंश है, फिर भी दुःख, मुसीबत, शोक, चिंता, पीड़ा, जन्म, मृत्यु आदि जो कष्ट सह रहे हैं, इन सारे के सारे कष्टों का एक ही कारण है। आपके और ईश्वर के बीच जो अज्ञान है, वही सारी मुसीबतें दे रहा है।\n\n

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

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