ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

ज्ञान के चार प्रकारों को जानो – पूज्य बापू जी


ज्ञान चार प्रकार का होता हैः 1 प्रत्यक्ष 2 परोक्ष 3 अपरोक्ष 4 साक्षात् अपरोक्ष । जो इन्द्रियों के सम्मुख है, जो चीज वस्तु आदि इन्द्रियों से अनुभव किये जाते हैं उनको बोलते हैं प्रत्यक्ष । जो अप्रत्यक्ष हो अर्थात् वर्तमान में इन्द्रियों से जिसका अनुभव नहीं होता परंतु जिसके होने में अन्य प्रमाण हो, …

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हे मनुष्य ! तू ईश्वरीय वचन को स्वीकार कर


अपक्रामन् पौरूषेयाद् वृणानो दैव्यं वचः । प्रणीतीरभ्यावर्तस्व विश्वेभिः सखिभिः सह ।। ‘हे मनुष्य ! पुरुषों की, मनुष्यकृत बातों से हटता हुआ देव-संबंधी, ईश्वरीय वचन को श्रेष्ठ मान के स्वीकार करता हुआ तू इन दैवी उत्तम नीतियों का, सुशिक्षाओं का अपने सब साथी मित्रों सहित सब प्रकार से आचरण कर ।’ (अथर्ववेदः कोड 7 सूक्त 105, …

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What is the purpose of the service?


What is the purpose of the service? Your heart is cleansed by the service. Egoism, hatred, jealousy, high feelings of emotions and all sorts of such bad feelings are destroyed and qualities like humility, pure love, empathy, tolerance and compassion develop. Selfishness vanishes from service, duality is weak, life’s approach becomes vast and generous. Unity begins to feel, …

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