ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आचमन तीन बार क्यों ?


प्रायः प्रत्येक धर्मानुष्ठान के आरम्भ में और विशेषरूप से संध्योपासना में 3 आचमन करने का शास्त्रीय विधान है । धर्मग्रन्थों में कहा गया है कि 3 बार जल का आचमन करने से तीनों वेद अर्थात् ऋग्वेद, यजुर्वेद व सामवेद प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं । मनु महाराज ने भी कहा हैः त्रिराचमेदपः पूर्वम् …

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निरंतर प्रयास की आवश्यकता


परमहंस योगानंद जी ने अपने एक शिष्य को कोई कार्य करने को कहा पर ‘यह कार्य मेरी क्षमता से परे है’ ऐसा सोचकर उसने उस कार्य को करने से मना कर दिया । परमहंस जी ने तुरंत दृढ़ स्वर में कहाः “इसे मैं कर सकता हूँ !” शिष्यः “परंतु गुरुदेव ! आप योगानंद हैं । …

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अमर विद्या पा लो


संत पथिक जी कहते हैं – “विद्या वही है जिससे सत्य क्या है, असत्य क्या है – यह ज्ञान प्राप्त हो । विद्या वही है जिससे विषयों के बंधन और तज्जनित दुःखों से मुक्ति हो, अज्ञान की निवृत्ति हो और परम शांति की प्राप्ति हो ।” विष्णु पुराण (1.19.41) में भगवद्भक्त प्रह्लाद जी अपने पिता …

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