ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

परमात्मा की कृपा और प्रसन्नता कैसे पायें ? – साँईं श्री लीलाशाह जी महाराज


यह अभिमान न आना चाहिए कि ‘मैंने दूसरों का कोई उपकार किया है । ‘ ऐसा समझना चाहिए कि जो कुछ उन्हें दिया जाता है वह उनके लिए ही प्राप्त हुआ है । जैसे कोई डाकिया डाकघर से प्राप्त की गयी वस्तुएँ, पार्सल आदि लिखे पते पर लोगों को पहुँचाता है परंतु इसलिए उन पर …

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कर्म करते हुए भी हम पास सकते हैं वही खजाना


प्राचीन काल की बात है । कुंदनपुर नगर का राजा बड़ा धार्मिक, सज्जन था । प्रजा का जीवन कर्म, उपासना और ज्ञान से ओतप्रोत हो जाये ऐसी उसकी राज व्यवस्था थी । उस राज्य से 3 प्रकार के आश्रमों की सेवा होती थी । पहला त्यागियों का आश्रम था । वहाँ नीरव शांति छायी रहती …

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…तो उसी समय आत्मसाक्षात्कार ! – पूज्य बापू जी


अधार्मिक लोग तो दुःखी हैं ही लेकिन धार्मिक भी परेशान हैं, रीति-रिवाज, रस्म में, किसी धारणा में, किसी मान्यता में इतने बँध गये कि हृदय में विराजता जो एकदम नकद आत्मानंद है उसका उनको पता ही नहीं । उनकी ऐसी कुछ मान्यता हो गयी कि ‘ऐसा होगा, ऐसा होगा… तब ज्ञान होगा । कुछ ऐसा-वैसा …

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