ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

गुरुद्रोही छोरी


जितना ओपनली बोलते हैं कि बापू से हम अलग है उतना ही ओपनली यह भी बोले कि बापू के भक्त यहां ना आए और जो एकनिष्ठ गुरुभक्त नहीं है वही इनके पास जाते है जो गुरु का अंश और गरु परिवार की बीन बजाते है इन बातों को अपनी खुली आंखों से देखना चाहिए गुरु …

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मानवमात्र का धर्म और परम धर्म


एक शरीर और उसकें संबंधियों में क्रमशः अहंता और ममता करके जीव ने स्वयं ही अपने आपको संसार के बंधन में जकड़ लिया है । अब धर्म का काम यह है कि जीव की अहंता और ममता को शिथिल करके उसे संसार के बंधन से सर्वदा के लिए छुड़ा दे । ऐसे धर्म का स्वरूप …

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यह है संसार की पोल ! –पूज्य बापू जी


एक भगत था, खानदानी लड़का था । वह कुछ ऐसे-वैसे संग में आ गया तो तो गुरु जी के पास जाना कम कर दिया । गुरु जी ने पूछाः बेटा ! आता क्यों नहीं ?” बोलाः “साँईं ! आपको क्या पता, शादी तो शादी है ! इतने दिन तो मैं अकेला था इसलिए आपके पास …

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