Gurubhaktiyog

गुरु की विचित्र आज्ञा ने पूरे गाँव को उस सन्यासी का शत्रु बना दिया….


आत्मसाक्षात्कारी गुरु इस जमाने में सचमुच बहुत दुर्लभ हैं। जब योग्य साधक आध्यात्मिक पथ की दीक्षा लेने के लिए गुरु की खोज मे जाता है। तब उसके समक्ष ईश्वर गुरु के स्वरूप मे दिखते हैं और उसे दीक्षा देते हैं। जो मुक्त आत्मा गुरु हैं वे एक निराली जागृत अवस्था मे रहते हैं। जिसे तुरीयावस्था …

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वह बालक वन में भटक चुका था, सामने थी अंजना गुफा….


गुरू के प्रति भक्ति अखूट और स्थायी होनी चाहिए। गुरु सेवा के लिए पूरे हृदय की इच्छा ही गुरू भक्ति का सार है। शरीर या चमड़ी का प्रेम वासना कहलाती है। जब कि गुरु के प्रति प्रेम भक्ति कहलाता है। ऐसा प्रेम! प्रेम के खातिर होता है गुरू के प्रति भक्ति भाव, ईश्वर के प्रति …

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उसने सोचा न था, गुरु से किए कपट का इतना भयानक दंड भी हो सकता है…


गुरू भक्ति योग के निरन्तर अभ्यास के द्वारा मन की चंचल वृत्ति को निर्मूल करो। सच्चा साधक गुरु भक्ति योग के अभ्यास मे लालायित रहता है। गुरु की सेवा और गुरु के ही विचारो से दुनिया विषयक विचारो को दूर रखो। अपने गुरु से ऐसी शिकायत नही करना कि आपके अधिक काम के कारण साधना …

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