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विश्वसेवा जो कर रहे हैं बापू जी, निंदक कभी कर सकेंगे क्या ?


वर्तमान में विश्व के सामने अनेक समस्याएँ विकराल रूप धारण किये हुए खड़ी हैं। इन समस्याओं का समाधान एवं विश्वमानव के जीवन का सर्वांगीण विकास भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म से ही सम्भव है। यह भलीभाँति जानने वाले महापुरुष हैं बापू जी।

भौतिक वस्तुओं एवं भौतिक जीवन का आध्यात्मिकीकरण करने का संदेश देकर निष्काम सेवायोग के माध्यम से उसको साकार करने वाले पूज्य बापू जी ने इन वैश्विक समस्याओं को हल करने का भगीरथ सफल प्रयास किया है। यह आज विश्वव्यापी अभियान का रूप ले चुका है। यहाँ तक कि उनके शिष्यगण महाराजश्री का अवतरण दिवस ‘विश्व सेवा सत्संग दिवस’ के रूप में पिछले अनेक वर्षों से मनाते आये हैं। और इसी दिन से इन सेवा-अभियानों का नवीनीकरण भी होता है। आइये, जानें उन समस्याओं और उनके हलस्वरूप कुछ अभियानों को।

समस्या 1– कलियुग में कुसंग के प्रभाव से मनुष्य अपना मुख्य उद्देश्य ईश्वरप्राप्ति भूलकर अशांति, कलह, तनाव, चिंता, बीमारियों तथा संसार की आपाधापी में ही सारा जीवन खपा रहा है।

समाधानः सत्संग द्वारा विश्वमानव की उन्नति।

शास्त्रों के मर्मज्ञ पूज्य बापू जी स्वयं कष्ट सहकर एक दिन में 3-3, 4-4 स्थानों में भी लोगों को सत्संग-अमृत का पान कराते रहे हैं। बापू जी अपने सत्संगों में शांति प्रेमयुक्त व तनावमुक्त जीवन जीने की सरल युक्तियाँ, लौकिक व पारलौकिक सफलताएँ पाने की कुंजियाँ और स्वस्थ रहने के आयुर्वेदिक व घरेलु उपाय बताते हैं। साथ ही मानव-जीवन के परम उद्देश्य ‘ईश्वरप्राप्ति’ का मार्ग अति सरल बनाकर लोगों को उस मार्ग पर चलाते भी हैं। करोड़ों लोगों का अनुभव है कि बापू जी के सत्संग से उनका जीवन उन्नत हुआ है।

समस्या 2- कुसंस्कार, व्यसन, अभद्रता आदि को बढ़ावा देने वाले क्लब, बीयर बार, डांस बार, सिनेमा थिएटर आदि मानव समाज को नैतिक पतन की खाई में धकेल रहे हैं।

समाधानः संत श्री आशाराम जी आश्रम।

विश्वशांति के प्रसारक, आध्यात्मिक स्पंदनों से ओतप्रोत 425 से भी अधिक आश्रम देश-विदेश में फैले हुए हैं। यहाँ सभी जाति-सम्प्रदाय के लोग आकर भक्तियोग, ज्ञानयोग, निष्काम कर्मयोग और कुंडलिनी योग के द्वारा हृदय में परमेश्वरीय शांति का प्रसाद पाकर आध्यात्मिक जगत के साथ-साथ लौकिक जगत में भी अदभुत उन्नति करते हैं।

समस्या 3- ईसाई मिशनरियों आदि द्वारा लोगों को धर्मांतरित कर देश को गुलाम बनाने का गहरा षड्यंत्र चलाया जा रहा है।

समस्या 4- ‘आदिवासी सबसे कमजोर वर्ग है। लगभग 50 प्रतिशत आदिवासी गरीबी रेखा के नीचे हैं।’ – इंडियन ह्यूमन डेवलपमेंट सर्वे

समाधानः धर्मांतरण पर प्रभावी ढंग से रोक तथा आदिवासी एवं पिछड़े लोगों का विकास धर्मांतरित हुए असंख्य हिन्दुओं, आदिवासियों आदि को संस्कृति-रक्षक बापू जी ने पुनः अपने धर्म में लौटाया है। जिन लोगों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरित किया गया था, उन्हें बापू जी ने सनातन धर्म की महिमा स अवगत कराया और उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा किया है।

ऐसे गरीब इलाकों में जहाँ लोगों को सरकार की कोई विशेष मदद नहीं पहुँच  पाती, वहाँ बापू जी स्वयं जाकर अपने हाथों से उन गरीबों को अनाज, कपड़े, बर्तन, जूते, छाता, कम्बल, माचिस तथा विद्यार्थियों को नोटबुकें, पेन व विद्यालय का गणवेश आदि आवश्यक सामग्रियों के साथ ही नकद दक्षिणा बाँटते रहे हैं और गृहस्थ में सुख-शांति की युक्तियों के साथ सत्संग का दान भी देते हैं। पूज्य श्री के मार्गदर्शन में चल रहे 425 से अधिक आश्रमों, 1400 से अधिक सेवा-समितियों एवं करोड़ों साधकों द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में ये सेवाकार्य नियमित रूप से चलते रहते हैं। बापू जी ने गरीबों, आपदाग्रस्तों आदि को मकान बनवाकर दिये हैं। ‘भजन करो, भोजन करो और रोजी पाओ’ जैसे अभियानों से देशभर में बेरोजगार, असहाय वृद्ध, विकलांग आदि लाभान्वित हो रहे हैं। गरीबों, अनाश्रितों, विधवाओं, जरूरतमंदों के लिए आश्रम द्वारा हजारों राशनकार्ड वितरित किये गये हैं, जिनके माध्यम से कार्ड-धारकों को हर माह अनाज व जीवनोपयोगी वस्तुओं का निःशुल्क वितरण किया जाता है। इससे अनेक गरीब-आदिवासियों के व्यसन छूट गये, साथ ही उनका लौकिक व आध्यात्मिक विकास भी हुआ है।

“परम पूज्य बापू जी एवं उनके आश्रम द्वारा गरीबों और पिछड़े लोगों को ऊपर उठाने के कार्य चलाये जा रहे हैं, मुझे प्रसन्नता है। मानव-कल्याण के लिए, विशेषतः प्रेम व भाईचारे के संदेश के माध्यम से किये जा रहे विभिन्न आध्यात्मिक एवं मानवीय प्रयास समाज की उन्नति के लिए सराहनीय हैं।’ – डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, तत्कालीन राष्ट्रपति।

समस्या 5– मनोरंजन के नाम पर टी.वी., सिनेमा, विडियो गेम, इंटरनैट आदि के पीछे प्रति सप्ताह बच्चे  लगभग 55 घंटे बिताते हैं। औसतन एक बच्चा 18 साल का होने तक टीवी पर 200000 हिंसक दृश्यों, 72000 से अधिक अश्लील दृश्यों को देख लेता है। सिनेमा, टीवी के कुप्रभाव से चोरी, दारू, धूम्रपान, हिंसा, बलात्कार, निर्लज्जता जैसे कुसंस्कारों का बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।

समाधानः विद्यार्थी उत्थान के विविध सेवाकार्य।

भावी पीढ़ी के विनाश की ओर बढ़ते कदमों को थामने के लिए बापू जी की प्रेरणा से देश-विदेश में चलाये जा रहे 17000 से अधिक ‘बाल संस्कार केन्द्रों’, ‘छात्र बाल संस्कार केन्द्रों’ एवं ‘कन्या बाल संस्कार केन्द्रों’ द्वारा बच्चों में जप, प्राणायाम, योगासन, यौगिक प्रयोगों व प्रेरणादायी प्रसंगों के द्वारा नैतिक-आध्यात्मिक उन्नति करने वाले जीवन मूल्यों व दिव्य संस्कारों का सिंचन हो रहा है। साथ ही विद्यालयों में ‘योग व उच्च संस्कार शिक्षा कार्यक्रम’ तथा आश्रमों में छुट्टियों में ‘विद्यार्थी उज्जवल भविष्य निर्माण शिविरों’ का आयोजन होता है। ‘विद्यार्थी तेजस्वी तालीम शिविरों’ में पूज्य बापू जी स्वयं विशेष मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

समस्या 6- अमेरिका में 7 प्रतिशत बच्चे 13 वर्ष की उम्र के पहले ही यौन-संबंध बना लेते हैं। 85 प्रतिशत लड़के और 77 प्रतिशत लड़कियाँ 19 वर्ष के पहले ही यौन संबंध बना लेते हैं। इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटाने के लिए वहाँ की सरकारों को करोड़ों डॉलर खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिल रही है।

समाधानः युवाधन सुरक्षा अभियान।

इस अभियान के अंतगर्त पूज्य बापू जी द्वारा संयम व ब्रह्मचर्य की महिमा उजागर करने वाले ‘दिव्य प्रेरणा प्रकाश’ ग्रंथ का 2 करोड़ से भी अधिक वितरण करवाया जा चुका है। इस ग्रंथ में युवाओं को संयमी व संस्कारी जीवन जीने की प्रेरणा के साथ-साथ तन-मन को स्वस्थ रखने की सरल युक्तियाँ सीखने को मिलती हैं। प्रतिवर्ष हजारों विद्यालयों व महाविद्यालयों में ‘दिव्य प्रेरणा प्रकाश ज्ञान प्रतियोगिता’ का आयोजन होता है, जिसमें देश के लाखों विद्यार्थी भाग लेकर अपना सर्वांगीण विकास करते हैं।

‘युवा सेवा संघ’ और ‘महिला उत्थान मंडल’ द्वारा युवकों एवं युवतियों के उत्थान के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। ‘युवाधन सुरक्षा अभियान’ से युवाओं में नवचेतना आयी है।

समस्या 7– ‘वेलेंटाइन डे’ का दुष्प्रभाव।

‘इन्नोसेंटी रिपोर्ट कार्ड’ के अनुसार 28 विकसित देशों में हर साल 13 से 19 वर्ष की 1250000 कन्याएँ गर्भवती हो जाती हैं, जिसमें से 500000 कन्याएँ गर्भपात करा लेती हैं और शेष कुँवारी माता बनकर  नर्सिंग होम, सरकार व माँ बाप के लिए बोझा बन जाती हैं अथवा वेश्यावृत्ति धारण कर लेती है।

समाधानः मातृ-पितृ पूजन दिवस।

वेलेंटाइन डे की गंदगी हमारे देश में पैर न जमाये इसलिए लोकहितैषी बापू जी ने 14 फरवरी को ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ मनाने का आह्वान किया। पिछले 8 वर्षों से मनाये जा रहे इस पर्व से विश्व के 167 देश लाभान्वित हो रहे हैं। इससे करोड़ों युवा पतन से बचे हैं एवं उनके जीवन में संयम, सदाचार के पुष्प खिले हैं।

समस्या 8- 2008 के एक सर्वेक्षण के अनुसार 15 वर्ष से कम उम्र के 50 लाख बच्चे गुटखे के आदी थे। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में 16 प्रतिशत बच्चों में मुँह के कैंसर के लक्षण पाये गये। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार 53.5 प्रतिशत भारतीय, तम्बाकू उत्पादों का प्रयोग करते हैं। (देखें लिंक http://www.en.wikipedia.org/wiki/Gutka )

समाधानः व्यसनमुक्ति अभियान

किसी भी व्यक्ति को व्यसनमुक्त करने के लिए पूज्य बापू जी का सत्संग रामबाण इलाज है। व्यसनमुक्ति अभियान (यात्राएँ, लघुफिल्म, प्रदर्शनी आदि) व बापू जी के सत्संग द्वारा करोड़ों व्यसनी लोग व्यसनमुक्त हुए हैं और आज स्वस्थ, सुखी व सम्मानित जीवन जी रहे हैं।

“बापू जी के सत्संग एवं उनकी प्रेरणा से चल रहे ‘व्यसनमुक्ति अभियान’ करोडों लोगों के शराब, सिगरेट, गुटखा आदि व्यसन छूटते हैं।” – श्री पी. दैवमुत्थु, सम्पादक ‘हिन्दू वॉइस’ मासिक पत्रिका।

समस्या 9– भारत में 50 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं। साथ ही शहरों में भी स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं।

( देखें लिंक- http://www.goo.gl/CKpGwh )

समाधानः देश का स्वास्थ्य विकास।

आश्रम द्वारा संचालित चल-चिकित्सालयों द्वारा आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य-सेवाएँ उपलब्ध करायी जाती हैं। साथ ही अभावग्रस्त क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा शिविरों’ का आयोजन भी होता है। विभिन्न आश्रमों में आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक, एक्यूप्रैशर एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से निष्णात वैद्यों द्वारा उपचार किया जाता है। पूज्य बापू जी अपने सत्संगों में स्वस्थ रहने के सरल उपाय, योगासन, किस ऋतु में क्या खाना – क्या नहीं खाना आदि बताते रहते हैं, जिससे हम बिना खर्च के बीमारियों को मार भगायें और भविष्य में बीमार ही न हों। साथ ही मासिक पत्रिका ‘ऋषि प्रसाद’ व मासिक समाचार पत्र ‘लोक कल्याण सेतु’ के माध्यम से हर महीने लाखों करोड़ों लोगों को घर बैठे स्वास्थ्य का संदेश पहुँच जाता है। पूज्य श्री का उद्देश्य है –

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।

‘सभी सुखी हों, सभी निरोग रहें।’

समस्या 10– भारत में वैध रूप से लगभग 3600 व अवैध रूप से लगभग 30000 से अधिक कत्लखाने चल रहे हैं, जिससे धीरे-धीरे गौधन समाप्त होता जा रहा है।

( देखें लिंकः http://www.en.wikipedia.org/wiki/Cattle_slaughter_in_India )

समाधानः गौ-संरक्षण

संत श्री आशाराम जी गौशालाओं में कत्लखाने ले जाने से रोकी गयीं हजारों गायों की सेवा की जा रही है। इनमें से कई गायें तो दूध भी नहीं देती फिर भी उन गायों का प्रेम से पालन किया जाता है। इनके झरण, गोबर आदि से धूपबत्ती, खाद, फिनायल, औषधियों आदि वस्तुओं के निर्माण द्वारा गायों की महत्ता के प्रति समाज को जागरूक किया जाता है ताकि व्यापक रूप से गौ सुरक्षा हो सके।

समस्या 11– रॉक म्यज़िक बजाने वाले और सुनने वाले की जीवनशक्ति क्षीण होती है। डॉ. डायमंड ने प्रयोगों से सिद्ध किया कि ‘हाथ का डेल्टोईड स्नायु सामान्यतया 40 से 45 कि.ग्रा. वजन उठा सकता है। जब रॉक म्यूज़िक बजता है तब उसकी क्षमता केवल 10 से 15 कि.ग्रा. वजन उठाने की रह जाती है।’ इसका प्रचलन बढ़ रहा है।

समाधानः भगवन्नाम संकीर्तन अभियान।

समाज में वैचारिक प्रदूषण मिटाने तथा सांस्कृतिक चेतना जगाने के उद्देश्य से आश्रमों व साधकों द्वारा समय-समय पर देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर भगवन्नाम संकीर्तन यात्राएँ एवं प्रभातफेरियाँ निकाली जाती हैं। इससे तन-मन व वातावरण पवित्र होता है और जीवनशक्ति का खूब विकास होता है।

समस्या 12- हर वर्ष गर्मियों में देश के विभिन्न इलाकों में पानी की किल्लत होती है। लोगों व राहगीरों को पीने के लिए पानी बड़ी मुश्किल से मिलता है। कई जगह अकाल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

समाधानः शरबत, छाछ, जल प्याऊ सेवा अभियान।

पूज्य बापू जी के अवतरण दिवस से पूरी गर्मियों में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन इत्यादि विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर चलने वाली निःशुल्क शीतल पलाश शरबत, छाछ व जल प्याउओं के सेवा-अभियान का शुभारम्भ होता है। भीषण गर्मी में पानी की समस्या होने पर बापू जी के शिष्य दूर-दराज से भी पानी की व्यवस्था करके पथिकों को शीतल शरबत व पानी पिलाते आये हैं। अभी तक करोड़ों लीटर शरबत, छाछ आदि का निःशुल्क वितरण किया जा चुका है।

समस्या 13- पिछले 10 वर्षों में भारत में 8 लाख अजन्मी लड़कियों को गर्भपात करा के मारा गया है। महिलाओं में शराब, धूम्रपान आदि व्यसनों का चलन बढ़ रहा है। दुनिया में लगभग 25 करोड़ महिलाएँ रोजाना धूम्रपान कर रही हैं।

( देखें लिंक – http://www.goo.gl/p4OoAi  )

समाधानः युवतियों व महिला वर्ग का उत्थान।

पूज्य बापू जी की प्रेरणा से चल रहे ‘महिला उत्थान मण्डल’ नारी शक्ति को जागृत करने व आत्मसम्मान दिलाने में सतत सेवारत हैं।

इनके द्वारा युवतियों के सर्वांगीण विकास हेतु ‘युवती संस्कार सभाएँ’ व तेजस्विनी अभियान शिविर’ तथा महिला हेतु  ‘महिला प्रतिभा विकास सभाएँ’, ‘गर्भपात रोको अभियान’, ‘दिव्य शिशु संस्कार’ आदि अभियान चलाये जा रहे हैं। इससे महिलाओं में गर्भपात, धूम्रपान, तलाक, आत्महत्या जैसी समस्याएँ सहज ही दूर हो रही हैं।

कॉल सेंटरों में महिलाओं के चरित्रहनन की खबरें आयीं तब बापू जी ने जाहिर सत्संग में इसके विरूद्ध आवाज बुलंद की थी और बापू जी की प्रेरणा से ‘महिला उत्थान मण्डल’ ने सशक्त रूप से इसका विरोध किया था।

ऐसे सच्चरित्रता, संयम, सदाचार के प्रचारक, सुदृढ़ समर्थक एवं सुंदर समाज के निर्माण में सक्रिय रूप से अतुलनीय योगदान देने वाले महापुरुष पूज्य बापू जी पर लगाये गये आरोप अनर्गल, थोथे, बोगस एवं मनगढ़ंत हैं। आरोप लगाने वाले क्या बापू जी की तरह समाज के करोड़ों लोगों के जीवन में इतने सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं ? संयम, सदाचार, सदभाव, भाईचारा, देशप्रेम, प्राणिमात्र की भलाई में इतने विशाल जन समुदाय को लगा सकते हैं ? जो भलाई की बापू जी ने, वह  निंदक कर सकेंगे क्या ? तो फिर लोगों की श्रद्धा तोड़कर उन्हें सत्पथ से भटकाने का देशद्रोह क्यों ? प्राणिमात्र के मंगल के कार्यों में बाधा पैदा करने का दुष्प्रयास क्यों ?

स्रोतः ऋषि प्रसाद, अप्रैल 2014, पृष्ठ संख्या 6-10, अंक 256

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संस्कृति की रक्षा व सेवा के लिए संगठित हो जाओ – पूज्य बापू जी


 

(26 फरवरी 2006 को नासिक में किया गया सत्संग)

मेरे से किसी ने पूछाः “जयेन्द्र सरस्वती महाराज को आपने कैसे बुलाया ? उन पर तो आरोप था !”

अरे, वे निर्दोष सज्जन, संत ! मैंने उनको हृदयपूर्वक, अच्छी तरह से  परखा है। वे ऐसा कर नहीं सकते और अभी झूठा आरोप तो किसी पर भी लग जाता है, उन पर भी झूठा आरोप है तो क्या मैं उनको संत की नजर से न देखूँ ? क्या आज फैशन नहीं बन गया झूठे केस बनाना ?

मेरे हृदय की आवाज थी कि ‘ये निर्दोष व्यक्ति अगर धर्मांतरण करने वालों को अड़चनरूप होने से जेल चले जाते हैं या दोषी करार दिये जाते हैं तो हमारी संस्कृति का क्या होगा ? हमारे देश का क्या होगा ?’ मुझे लगा कि जयेन्द्र सरस्वती पर जुल्म हो रहा है। मेरा उनसे पहले कोई परिचय नहीं था लेकिन मेरे अंतरात्मा की आवाज थी इसलिए मैं जाकर सड़क पर बैठ गया।

जब जयेन्द्र सरस्वती जी पर आरोप लग सकते हैं…. और उनका वकील कहता है कि ‘ऐसा बोगस केस मैंने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखा….’ इतने प्रसिद्ध व्यक्ति पर भी झूठे आरोप लग सकते हैं तो महाराज ! जिन बेचारे साधुओं की वकील करने की ताकत नहीं है, दौड़-धूप करने की ताकत नहीं है, ऐसे साधुओं और धर्म के छोटे-मोटे प्रचार करने वालों के साथ तो कितना जुल्म हो रहा है। हे भगवान ! उन बेचारों निर्दोष लोगों पर जुल्म न हो। हमारी संस्कृति के पहरेदार फँसाये न जायें खामखाह झूठे केसों में ! हे भोलेनाथ ! सबको सदबुद्धि दो।

आपस में संगठित हो जाओ। जुल्म करना पाप है, जुल्म सहना दुगुना पाप है।

धर्मो रक्षति रक्षितः। हिन्दुस्तानी अपनी संस्कृति की सेवा नहीं करेंगे, अपने धर्म की रक्षा हम लोग नहीं करेंगे तो क्या विदेशी आकर हमारी हिन्दू संस्कृति का, भारतीय संस्कृति का रक्षण करेंगे ? वे तो आपकी संस्कृति को तोड़कर, आपको डराकर राज्य करने के स्वप्न देख रहे हैं। आपके देश को खंडित करके अलग-अलग राज्य और अलग-अलग देश बनाने के स्वप्न देख रहे हैं। क्या आप अब भी सोये रहेंगें ? नहीं। आप सावधान रहो, जगो। अपने पड़ोस के भाई धर्मांतरित होते हैं तो उनको घर वापसी लाने का कार्यक्रम बनाओ। हमारे हिन्दूस्तान के जो लोग बहकावे में आकर धर्मांतरित हो गये, वे अगर हमारे शिवमंदिर में फिर से आते हैं तो हमें खुशी है। वे अपनी भूल को सँवारने के लिए यदि आने को तैयार हो जाते हैं घर-वापसी कार्यक्रम में तो हम सभी को मिलकर उन बेचारों को घर-वापसी कार्यक्रम में  ले आना चाहिए। अपने-अपने इलाके में यज्ञ करके, पूजा करके उनके फिर वापस अपने धर्म में लाना चाहिए। ये हम सभी हिन्दूस्तानियों का कर्तव्य है।

किसी के साथ जुल्म होता है, अन्याय होता है या झूठे केस होते हैं तो संगठित होकर उसकी मदद करो। अब कहाँ उनका चेन्नई और कहाँ अहमदाबाद ! मेरा दिल पिघला, व्यथित हो गया तो कहीं अनर्थ होने आपका दिल भी पिघलेगा। जहाँ भी सुनाई पड़े कि ‘ऐसा यहाँ ठीक  नहीं हो रहा है’ अथवा अपनी अंतरात्मा बोले, परिस्थिति बोले तो आप यथायोग्य उसको सहयोग करो, मदद करो। बहुत बेचारे  निर्दोष लोग फँसाये जाते हैं, सेटिंग हो जाती है।

कुछ लोग मेरे को बोलते हैं कि ‘उन पर तो आरोप है….’ अरे, निर्दोष आदमी फँस गया है और उनको हम हृदयपूर्वक निर्दोष मानते हैं, उनको हमने बुलाया है तो अपने आत्मसंतोष के लिए बुलाया है, हमें किसी की परवाह नहीं करनी है। निंदा-स्तुति को हम चरणों तले रख देते हैं, हमने अपना कर्तव्य निभाया है। भारतीय संस्कृति का एक संत झूठे-मूठे केस में अपराधियों की श्रेणी में धकेला जाय और हम चुप बैठें तो फिर हमारा बापू जी होना या संत होना क्या काम का होता है ?

गुरुतेगबहादुर बोलिया, सुनो सिखो बड़भागियाँ।

धड़ दीजिये धर्म न छोड़िये।।

स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।।

अपने धर्म में मर जाना कबूल है, दूसरे का धर्म दुःखदायी, भयावह (भय को देने वाला) है। मैं अपना धर्म क्यों छोड़ूँ ? ॐॐॐ…. आत्मशक्ति गुंजाओ।

अपनी सनातन संस्कृति की विशेषता विदेशी लोग गा रहे हैं। फ्रांस के विद्वान रोमा रोलां ने कहा हैः “मैंने यूरोप और एशिया के सभी धर्मों का अध्ययन किया है परंतु मुझे उन सबमें हिन्दू धर्म ही सर्वश्रेष्ठ दिखायी देता है। मेरा विश्वास है कि इसके सामने एक दिन समस्त जगत को सिर झुकाना पड़ेगा।” चीन की दीवार, कुवैत का पेट्रोलियम और अमेरिका के डॉलर मशहूर हैं लेकिन भारतीय संस्कृति और भारत के संत आत्मा से मुलाकात कराने की योग्यता में अभी भी विश्व में मशहूर हैं, आप क्या समझ रहे हैं !

भारत के संत-महापुरुष खाली हाथ जाते हैं और उनको चेला बनाकर आ जाते हैं, यह क्या चमत्कार देखते हो ! यह भारतीय संस्कृति का प्रसाद ही तो है, नहीं तो जो लोग हमारे देश को नोचने आये थे, वे हमारे चेले कैसे बनेंगे ? और अभी भी हजारों-हजारों विदेशी इधर आ जाते हैं भारत के संतों-महापुरुषों के पास। क्यों आते हैं ? कि हमारीर संस्कृति शांति देने में, ज्ञान देने में, सब कुछ देने में सक्षम है। सभी धर्मों के लिए हमें स्नेह है, धन्यवाद है, प्रेम है लेकिन भारतीय संस्कृति, मेरी  मातृभूमि भारत देश ने दुनिया को जो दिया है…. दुनियावालों ने तो यहाँ आकर भारत का शोषण किया है लेकिन भारत के संतों ने और भारत के लोगों ने दुनिया में जाकर क्या क्या किया है !

‘पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन्स’ में मैंने गर्जना कर डाली थी कि हमारी देश के आदमी अमेरिका या और देशों में जहाँ भी गये हैं और अपने-अपने क्षेत्र में खूब परिश्रम किया है। कम्पयूटर के क्षेत्र में, इसमें-उसमें… अगर भारतवासियों का परिश्रम नहीं होता तो वे देश आज इतने उन्नत नहीं होते। यह भारत का दिमाग और भारत का परिश्रम ही उनको चमकाने में सहयोग कर रहा है। विदेशी मानव भी तो मेरी आत्मा है भैया ! विश्वमानव का मंगल हो। इसलिए आज विश्व को बमों की जरूरत नहीं है, आतंक की जरूरत नहीं है, शोषकों की जरूरत नहीं है, विश्व को अगर जरूरत है तो भारतीय संस्कृति के योग की, ज्ञान की और वसुधैव कुटुम्बकम् के भाव की जरूरत है, विश्व में उपद्रव की नही, शांति की जरूरत है।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, अप्रैल 2014, पृष्ठ संख्या 4,5 अंक 256

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रेप के खिलाफ नये कानून से बढ़े झूठे केस


सना शकील, नई दिल्ली, नवभारत टाइम्स, 22-02-2014

दिल्ली गैंग रेप केस (निर्भया प्रकरण) के बाद यौन अपराधों के खिलाफ कानून को और सख्त बनाने के झूठे मामलों की संख्या और बढ़ गयी। आँकड़े बताते हैं कि 16 दिसम्बर 2012 के बाद दिल्ली में ट्रायल कोर्ट में झूठे रेप केसों में फँसाये जाने वाले आरोपियों के दोषमुक्त होने के मामले बढ़े हैं। 2012 में 46 प्रतिशत आरोपी दोषमुक्त हुए लेकिन 2013 के शुरूआती 8 महीनों में ही यह आँकड़ा 75 प्रतिशत पर जा पहुँचा। सूत्र बताते हैं कि आरोपियों के दोषमुक्त होने का यह आँकड़ा इस साल भी ज्यादा ही रहेगा।

‘निर्भया केस’ के मेन प्रॉसिक्यूटर्स में से एक ए.टी.अंसारी इसे दुःखद प्रचलन मानते हुए कहते हैं कि “कई मामलों में तथाकथित पीड़िताएँ बाद में इस अपील के साथ सामने आती हैं कि उन्होंने गुस्से और गलतफहमी की वजह से मुकद्दमा दर्ज कराया था।” एक वरिष्ठ महिला वकील ने कहा कि “झूठे मुकद्दमों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नये कानून की ‘अस्पष्ट’ व्याख्या की वजह से ही इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित कानून ‘अस्पष्ट’ होने के कारण उसका गलत रूप से इस्तेमाल हो रहा है। एक सीनीयर प्रॉसिक्यूटर ने कहाः “दोषमुक्त होने के 90 प्रतिशत मामलों में तथाकथित पीड़िताएँ और आरोपी व्यक्ति के बीच आपसी दुश्मनी जैसी बातें सामने आयी हैं।”

झूठे मामले को दर्ज कराने के अन्य कारणों में जबरदस्ती वसूली, जायदाद (प्रॉपर्टी) विवाद आदि कारण भी शामिल हैं।

इस साल जनवरी में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्री विरेन्द्र भट्ट ने झूठे मामले में फँसाये गये व्यक्तियों को क्षतिपूर्ति देने की वकालत भी की। (न्यायाधीश की विस्तृत टिप्पणी हेतु पढ़ें ‘ऋषि प्रसाद’, फरवरी 2014 का पृष्ठ 5)

विडम्बना यह है कि कानून की रहम का आजकल तथाकथित पीड़िताएँ बेहद नाजायज फायदा उठा रही हैं। वे न्यायालय की ओर से भयमुक्त होने के कारण निर्दोष लोगों पर बिना सिर-पैर के लांछन लगाने में तनिक भी नहीं हिचकिचाती हैं।

इन यौन अपराधों की दायर होने वाली झूठी शिकायतों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट भी चिंता जाहिर कर चुकी है। बीते साल जुलाई में एक 75 साल के वृद्ध को रेप के आरोप से मुक्त किया गया, उस पर उसकी नौकरानी ने जायदाद हड़पने के लालच में बलात्कार का आरोप लगाया था। तब फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अनुभव किया था कि राजधानी ‘रेप कैपिटल’ होने की बदनामी झेल रही है क्योंकि झूठे रेप केस दर्ज किये जाने की संख्या बढ़ गयी है। इस मामले में कथित पीड़िता ने बाद में माना था कि उसका उद्देश्य आरोपी की जायदाद को हड़पना था।

यौन-अपराधों पर नियंत्रण के लिए बनाये गये नये कानूनों के दुरुपयोग को लेकर  सामाजिक कार्यकर्ता श्री भगवानदीन साहू (छिंदवाड़ा) के पत्र के विषय की गम्भीरता को देखते हुए राष्ट्रपति ने उसे गृह मंत्रालय को अग्रेषित कर दिया, जिसमें पॉक्सो एक्ट पर पुनर्विचार कर बंद करने की माँग की गयी है।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, अप्रैल 2014, पृष्ठ संख्या 29, अंक 256

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