336 ऋषि प्रसादः दिसम्बर 2020

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

मन का नाश करना है तो……


स्वामी शरणानंदजी के एक भक्त थे प्राध्यापक केशरी कुमार । वे अपने जीवन की एक घटित घटना का उल्लेख करते हुए लिखते हैं- राँची की घटना है । एक वृद्ध वकील साहब स्वामी जी (शरणानंदजी) के पास आये, जो राँची में गाँधी जी के मेजबान थे और जिन्हें राँची वाले प्यार से नगरपिता कहते थे …

Read More ..

इक्के ते सब होत है, सब ते एक न होई – पूज्य बापू जी


त्रिलोकी में ऐसी कोई चीज नहीं जो अभ्यास से न मिले लेकिन नश्वर के लिए अभ्यास करते हो तो नश्वर चीज मिलेगी और छूट जायेगी और शाश्वत के लिए अभ्यास किया तो शाश्वत वस्तु मिलेगी, छूटेगी नहीं । शाश्वत के लिए अभ्यास करना बुद्धिमत्ता है । ‘श्री योगवासिष्ठ महारामायण’ में आता हैः ‘मनुष्य को देह-इन्द्रियों …

Read More ..

हर परिस्थिति का सदुपयोग करो – पूज्य बापू जी


जीवन की हर परिस्थिति का सदुपयोग करो । जो भी परिस्थिति आये – मान आये, सुख आये तो चिंतन करो कि ‘प्रभु मुझे उत्साहित करने के लिए मान दे रहे हैं, सफलता और सुविधा दे रहे हैं । हे प्रभु ! तेरी असीम कृपा को धन्यवाद है !’ जीवन में जब अपमान हो, दुःख आये, …

Read More ..