Tithi-Tyouhar

संसाररूपी युद्ध के मैदान में परमात्मा को कैसे पायें ?


  पूज्य बापूजी श्रीमद्भगवदगीता के ज्ञानामृत के पान से मनुष्य के जीवन में साहस, समता, सरलता, स्नेह, शान्ति, धर्म आदि दैवी गुण सहज की विकसित हो उठते हैं | अधर्म, अन्याय एवं शोषण का मुकाबला करने का सामर्थ्य आ जाता है | भोग एवं मोक्ष दोनों ही प्रदान करनेवाला, निर्भयता आदि दैवी गुणों को विकसित …

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लोक – परलोक सँवारनेवाली गीता की १२ विद्याएँ


पूज्य बापूजी गीता का ज्ञान मनुष्यमात्र का मंगल करने की सत्प्रेरणा देता है, सद्ज्ञान देता है | गीता की १२ विद्याएँ हैं | गीता सिखाती है कि भोजन कैसा करना चाहिए जिससे आपका तन तंदुरुस्त रहे, व्यवहार कैसा करना चाहिए जिससे आपका मन तंदुरुस्त रहे और ज्ञान कैसा सुनना – समझना चाहिए जिससे आपकी बुद्धि …

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जीवन का दृष्टिकोण उन्नत बनाती है ‘गीता’


  (श्रीमद् भगवद्गीता जयंती : १० दिसम्बर ) पूज्य बापूजी की सारगर्भित अमृतवाणी ‘यह मेरा ह्रदय है’ – ऐसा अगर किसी ग्रंथ के लिए भगवान ने कहा हो तो वह गीता का ग्रंथ है | गीता में ह्रदयं पार्थ | ‘गीता मेरा ह्रदय है |’ अन्य किसी ग्रंथ के लिए भगवान ने यह नहीं कहा …

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