ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आप कहाँ समय लगा रहे हैं ? – पूज्य बापू जी


व्यक्ति ज्यों छोटे विचारों को महत्त्व देता है त्यों धीरे-धीरे, धीरेधीरे पतन की खाई में गिरता है और ज्यों-ज्यों वफादारी से सेवा कोमहत्त्व देता है त्यों-त्यों उन्नति के शिखर पर चढ़ता जाता है । अपनीयोग्यता अभी चाहे न के बराबर हो लेकिन जो योग्यता है उसे ईश्वर कीप्रीति के लिए, धर्म की सेवा-रक्षा के लिए …

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दशरथ जी की सभा में छलका जनक जी के दूतों का ज्ञानामृत


जब राजर्षि जनक के दूतों ने महाराज दशरथ को भगवानश्रीरामचन्द्रजी द्वारा शिव-धनुष टूटने का समाचार सुनाया तब भाव सेउनका हृदय भर आया और अत्य़धिक स्नेह के कारण वे अपने पद कीगरिमा भूल गये और दूतों को पास बैठाकर कहने लगेः“भैआ कहहु कुसल दोउ बारे ।भैया ! क्या मेरे दोनों नन्हें पुत्र कुशल हैं ?”जनकपुर के …

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तीन सच्चे हितैषी – पूज्य बापू जी


सच्चे हितैषी तीन ही होते हैं-1 संयमी, सदाचारी, शांत मन हमारा हितैषी है । जो मन में आयावह करने लगे या मन के गुलाम बने तो वह मन हमारा शत्रु है । जोमन संयमित है, शांत है वही हमारा हितैषी है । असंयमित, अशांत मनतबाही कर देता है ।2 इष्टदेव हमारे हितैषी हैं । ब्रह्मवेत्ता …

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