ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

गुरु-आश्रय से वक्र भी वंदनीय


जो लोग अपने जीवन में ईश्वर के मार्ग में आगे बढ़ना चाहते हैंअथवा ईश्वर को प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए प्रत्यक्ष भगवान कीप्राप्ति यदि कहीं हो सकती है तो वह सद्गुरु के रूप में हो सकती है ।सद्गुरु भगवान का रूप हैं । सद्गुरु साक्षात भगवान ही हैं । यह नहींसमझ लेना कि सद्गुरु …

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कष्ट मुसीबतों को पैरों तले कुचलने की कला


कष्ट मुसीबतें और प्रतिकूलताएँ तो सभी के जीवन में आती हैं,संत महापुरुषों व अवतारों के जीवन में तो प्रतिकूल परिस्थितियों कीखूब अधिकता देखने में आती है किन्तु सामान्य व्यक्ति जो जीवन मेंइतना ही अंतर देखने में आता है कि उन परिस्थितियों में मन कीविचारधारा और बुद्धि की निष्ठा दोनों की अलग-अलग होती है । इसकाप्रभाव …

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क्या आप सचमुच स्वतंत्र हैं ? – पूज्य बापू जी


(स्वतंत्रता दिवसः 15 अगस्त)15 अगस्त को देश स्वतंत्र हुआ लेकिन लोग अभी स्वतंत्र नहीं हैं,राग से, द्वेष से, काम से, क्रोध से, मोह से, ईर्ष्या से, पद-प्रतिष्ठा सेबँधे हैं । सचमुच स्वतंत्र तो ब्रह्मज्ञानी के वचन ही कर सकते हैं, औरकौन स्वतंत्र करेगा !बाह्य स्वतंत्रता तो शायद 15 अगस्त को मान लें किंतु अभीभीतरी खोखलापन …

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