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आप किस पर विश्वास करोगे ?


महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी श्री नित्यानंद जी महाराज

मैंने बापू जी के केस का पूरी तरह से अध्ययन किया है और सारी जानकारी ली है।  मैंने कुछ डॉक्टरों से भी परामर्श लिया जो इस तरह की  मेडिकल रिपोर्ट बनाते हैं। मैंने उनसे इस रिपोर्ट के आधार पर कानूनी अभिप्राय माँगा तो उन्होंने कहाः “स्वामी जी ! मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हम 100 प्रतिशत, निश्चित रूप से कह सकते हैं कि न रेप है न ही रेप की कोशिश की गयी है और यौन उत्पीड़न का केस भी नहीं है क्योंकि किसी भी नाबालिक की त्वचा बहुत ही मुलायम होती है और अगर कोई उत्पीड़न होता तो उसके निशान रहते।”

आप समझते हो ! 12-13 साल पहले कोई तथाकथित घटना होती है। कोई महिला आती है और वह कहती है तो आप उस पर विश्वास करोगे या फिर उस पुरुष पर जिसने अपना पूरा जीवन विश्व-कल्याण के लिए लगा दिया ? वे बोल रहे हैं 2002 में घटना घटी। वे सब स्पष्ट रूप से जानते हैं कि उनका केस न्याययालय में नहीं टिक पायेगा। 11-12 वर्ष तक किसी भी महिला का चुप रहना असम्भव है। अब 2013 चल रहा, 11-12  साल के बाद वे आते हैं और झूठा मामला दर्ज कराते हैं।

पुलिस भी जानती है कि यह केस न्यायालय में जाने लायक नहीं है। शायद पुलिस इस केस में चार्जशीट भी दायर नहीं करेगी।

तथाकथित हिन्दू गुरु, जिन्होंने आशाराम बापू और अन्य हिन्दू गुरुओं को दुर्वचन कहे, उनसे आपको प्रश्न पूछना चाहिए, उनको पाठ सिखाना चाहिए। अभी  मैं यहाँ  महानिर्वाणी अखाड़े का  महामंडलेश्वर होने के नाते अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखता हूँ कि किसी भी हिन्दू संत को यह अधिकार नहीं है कि वे किसी दूसरे हिन्दू संत की निंदा करें। उनमें से बहुत लोग जो आशारामजी बापू पर टीका-टिप्पणी कर रहे हैं, वे संत ही नहीं हैं। उनकी हिम्मत कैसे हुई यह कहने की कि ‘आशारामजी बापू संत नहीं हैं !’ अब मैं कहता हूँ कि जो भी बापू की निंदा कर रहे हैं, वे संत नहीं हैं।

सभी भक्त और शिष्य यह स्पष्ट रूप से निर्णय कर लें (और अपने गुरु से कहें) कि ‘यदि आप दूसरे हिन्दू गुरुओं की निंदा  करेंगे तो हम आपका बहिष्कार करेंगे।’ अगर आप इस समय आशाराम जी बापू का समर्थन नहीं करना चाहते तो कम-से-कम चुप रहो। मैं आपको और पूरे देश को स्पष्ट रूप से कह रहा हूँ – जो बापू जी को गलत बता रहे हैं, मैं उन गुरुओं को जिन्हें लोग ‘गुरु’ कहते हैं, ‘गुरुजी’ कहते हैं, इस समय चुनौती देता हूँ….. मैं उनसे एक सीधा प्रश्न पूछता हूँ कि क्या आपने भक्तों की प्रेरणा को जीवित रखने के लिए आशारामजी बापू का उपयोग नहीं किया है ? क्या आपने उनके कठिन परिश्रम से लाभ नहीं लिया है ? तो फिर आपको उनके कठिन परिश्रम के प्रति कृतज्ञता क्यों नहीं है ? आप लोग कम्युनिस्ट और नास्तिक संस्था के नेताओं की तरह बात कर रहे हैं। आप समझो ! आप लोग आस्था पर आधारित संस्था के अधिष्ठाता हो। अगर हमें ईमानदारी पूर्वक विश्वास है कि यह सब झूठ है तो हमें आशारामजी बापू का समर्थन करना चाहिए। अगर विश्वास नहीं है, अगर संदेह है तो कम-से-कम चुप रहें।

तुम क्यों सब जगह जा-जाकर गलत बोल रहे हो जबकि न्यायालय में अभी तक कुछ भी साबित नहीं हुआ है। तुम न्यायालय के निर्णय आने तक इंतजार क्यों नहीं करते ? तुम वक्तव्य देने के लिए उतावले क्यों हो रहे हो ? अगर आपको लगता भी है कि कुछ हुआ है तो जब तक  न्यायालय निर्णय न ले ले तब तक चुप रहिये।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, नवम्बर 2013, पृष्ठ संख्या 11, अंक 251

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साजिश को सच का रूप देने की मनोवैज्ञानिक रणनीति


शिल्पा अग्रवाल, प्रसिद्ध मनोविज्ञानी

संत श्री आशारामजी बापू के खिलाफ जो षड्यन्त्र चल रहा है, उसका मनोवैज्ञानिक तरीके से किस तरह से सुनियोजन किया गया है, यह मैं एक मनोविज्ञानी होने के नाते बताना चाहती हूँ। आठ मुख्य पहलू समझेंगे कि किस तरह इस साजिश को सच का मुखौटा पहनाया जा रहा है।

जनता के विशिष्ट वर्गों पर निशानाः समाज के शिक्षित, जागरूक, उच्च एवं मुख्यतः युवा वर्ग को निशाना बनाया गया क्योंकि इनको विश्वास दिलाने पर ये तुरन्त प्रतिक्रिया करते हैं।

षड्यन्त्र का मुद्दाः देश की ज्वलंत समस्या ‘महिलाओं पर अत्याचार’ मुख्य मुद्दा बनाया है। इस भावनात्मक विषय पर हर कोई तुरन्त प्रतिक्रिया दे के विरोध दर्शाता है।

रणनीतिः  चीज को यथापूर्ण, विश्वसनीय, प्रभावशाली दिखाने जैसी मार्केटिंग रणनीति का उपयोग करके दर्शकों को पूरी तरह से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

दर्शक मनोविज्ञान का भी दुरुपयोग किया जा रहा है। कोई विज्ञापन हमें पहली बार पसंद नहीं आता है  लेकिन जब हम बार-बार उसे देखते हैं तो हमें पता भी नहीं चलता है कि कब हम उस विज्ञापन को गुनगुनाने लग गये। बिल्कुल ऐसे ही बापू जी के खिलाफ इस बोगस मामले को बार-बार दिखाने से दर्शकों को असत्य भी सत्य जैसा लगने लगता है।

प्रस्तुतिकरण का तरीकाः पेड मीडिया चैनलों के एंकर  आपके ऊपर हावी होकर बात करना चाहते हैं। वे सिर्फ खबर को बताना नहीं चाहते बल्कि सेकंडभर की फालतू बात को भी ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बताकर दिनभर दोहराते हैं और आपको हिप्नोटाइज करने की कोशिश करते हैं।

भाषाः खबर को बहुत चटपटे शब्दों के द्वारा असामान्य तरीके से बताते हैं। ‘बात गम्भीर है, झड़प, मामूली’ आदि शब्दों की जगह ‘संगीन, वारदात, गिरोह, बड़ा खुलासा, स्टिंग ऑपरेशन’ ऐसे शब्दों के सहारे मामूली मुद्दे को भी भयानक रूप दे देते हैं।

आधारहीन कहानियाँ बनाना, स्टिंग ऑपरेशन और संबंधित बिन्दुः ‘आश्रम में अफीम की खेती, स्टिंग ऑपरेशन’ आदि आधारहीन कहानियाँ बनाकर मामले को रूचिकर बना के उलझाने की कोशिश करते हैं।

मुख्य हथियारः बहुत सारे विडियो जो दिखाये जाते हैं, वे तोड़-मरोड़ के बनाये जाते हैं। ऐसे ऑडियो टेप भी प्रसारित किये जाते हैं। यह टेक्नालोजी का दुरुपयोग है।

इसके अलावा कमजोर, नकारात्मक मानसिकतावालों को डरा के या प्रलोभन देकर उनसे बुलवाते हैं। आश्रम से निकाले गये 2-5 बगावतखोर लोगों को मोहरा बनाते हैं ताकि झूठी विश्वसनीयता बढ़ायी जा सके।

मनोवैज्ञानिक वातावरण तैयार करनाः बापू जी की जमानत की सुनवाई से एक दिन पहले धमकियों की खबरे उछाली जाती हैं, कभी पुलिस को, कभी माता-पिता और लड़की को तो कभी न्यायाधीश को। ये खबरें कभी भी कुछ सत्य साबित नहीं हुई।

अब आप खुद से प्रश्न पूछिये और खुद ही जवाब ढूँढिये कि क्या यह आरोप सच है या एक सोची-समझी साजिश ?

और एक बात कि केवल पेड मीडिया चैनल ही नहीं बल्कि इसी के समान प्रिंट मीडिया भी खतरनाक तरीके से जनमानस को प्रभावित कर रहा है। इन दोनों से सावधान रहना चाहिए।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, अक्तूबर 2013, पृष्ठ संख्या 29, अंक 250

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संस्कृति रक्षक प्राणायाम – पूज्य बापू जी


संत सताये तीनों जायें, तेज बल और वंश।

ऐसे ऐसे कई गये, रावण कौरव और कंस।।

भारत के सभी हितैषियों को एकजुट होना पड़ेगा। भले आपसी कोई मतभेद हो किंतु संस्कृति की रक्षा में हम सब एक हो जायें। कुछ लोग किसी को भी मोहरा बना के दबाव डालकर हिन्दू संतों और हिन्दू संस्कृति को उखाड़ना चाहें तो हिन्दू अपनी संस्कृति को उखड़ने नहीं देगा। वे लोग मेरे दैवी कार्य में विघ्न डालने के लिए कई बार क्या-क्या षड्यंत्र कर लेते हैं। लेकिन मैं इन सबको सहता हुआ भी संस्कृति के लिए काम किये जा रहा हूँ। स्वामी विवेकानन्दजी ने कहाः “धरती पर से हिन्दू धर्म गया तो सत्य गया, शांति गयी, उदारता गयी, सहानुभूति गयी, सज्जनता गयी।”

गहरा श्वास लेकरर ॐकार का जप करें, आखिर में ‘म’ को घंटनाद की नाईं गूँजने दें। ऐसे 11 प्राणायाम फेफड़ों की शक्ति बढ़ायेंगे, रोगप्रतिकारक शक्ति तो बढ़ायेंगे साथ ही वातावरण में भी भारतीय संस्कृति की रक्षा में सफल होने की शक्ति अर्जित करने का आपके द्वारा महायज्ञ होगा।

मुझे आपके रूपये पैसे नहीं चाहिए, बल्कि भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए आप रोज 11 प्राणायाम करके आप अपना संकल्प वातावरण में फेंको। इसमें विश्वनाथ का मंगल है। ॐ….ॐ….ॐ…… हो सके तो सुबह 4 से 5 बजे के बीच करें। यह स्वास्थ्य के लिए और सभी प्रकार से बलप्रद होगा। यदि इस समय न कर पायें तो किसी भी समय करें पर करें अवश्य। कम से कम 11 प्राणायाम करें, ज्यादा कितने भी कर सकते हैं। अधिकस्य अधिकं फलम्।

हम चाहते हैं सबका मंगल हो। हम तो यह भी चाहते हैं कि दुर्जनों को भगवान जल्दी सदबुद्धि दे, नहीं तो समाज सदबुद्धि दे। जो जिस पार्टी में है… पद का महत्त्व समझो, अपनी संस्कृति का महत्त्व  समझो। पद आज है, कल नहीं है लेकिन संस्कृति तो सदियों से तुम्हारी सेवा करती आ रही है। ॐ का गुंजन करो, गुलामी के संस्कार काटो !

दुर्बल जो करता है वह निष्फल चला जाता है और लानत पाता है। सबल जो कहता है वह हो जाता है और उसका जयघोष होता है। आप सबल बनो !

नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः। (मुण्डकोपनिषद् 3.2.4)

विधिः सुबह उठकर थोड़ी देर शांत हो जाओ, भगवान के ध्यान में बैठो। ॐ शांति…. ॐ आनन्द…. करते करते आनंद और शांति में शांत हो जायें। सुबह की शांति प्रसाद की जननी है, सदबुद्धि की जननी है। फिर स्नान आदि करके खूब श्वास भरो, त्रिबन्ध करो-पेट को अंदर खींचो, गुदाद्वार को अंदर सिकोड़ लो, ठुड्डी को छाती से लगा लो। मन में संस्कृति-रक्षा का संकल्प दोहराकर भगवान का नाम जपते हुए सवा से डेढ़ मिनट श्वास रोके रखो। फिर श्वास छोड़ो। श्वास लेते और छोड़ते समय ॐकार का मानसिक जप करते रहें। फिर 50 सैकेंड से सवा मिनट तक श्वास बाहर रोक सकते हैं। मन में ॐकार या भगवन्नाम का जप चालू रखो। शरीर में जो भी आम (कच्चा, अपचित रस) होगा, वायुदोष होगा, वह खिंच के जठर में स्वाहा हो जायेगा। वर्तमान की अथवा आने वाली बीमारियों की जड़े स्वाहा होती जायेंगी। आपकी सुबह मंगलमय होगी और आपके द्वारा मंगलकारी परमात्मा मंगलमय कार्य करवायेगा। आपका शरीर और मन निरोग तथा  बलवान बन के रहेगा।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, अक्टूबर 2013, पृष्ठ संख्या 4, अंक 250

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