Tithi-Tyouhar

श्राद्ध की महिमा


  (संत श्री आशारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन एवं शास्त्रों से ) जीवात्मा का अगला जीवन पिछले संस्कारो से बनाता है | अत: श्राद्ध करके यह भावना की जताई है कि उनका अगला जीवन अच्छा हो |श्रद्धा और मंत्र के मेल से पितरो की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे श्राद्ध कहते है | …

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ब्राह्मण को निमंत्रित करने की विधि


  विचारशील पुरुष को चाहिए कि जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही संयमी, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को निमंत्रण दे दे | परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारे तो उन्हें भी भोजन करना चाहिए | श्राद्धकर्ता पुरुष को घर आये हुए ब्राह्मणों के चरण धोने चाहिए | फिर …

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श्राद्ध के समय हवन करने की विधि


  पुरुषप्रवर ! श्राद्ध के अवसर पर ब्राह्मण को भोजन कराने से पहले उनसे आज्ञा पाकर शाक और लवनहीन अन्न से अग्नि में तीन बार हवन करना चाहिए । उनमें ‘अग्नये कव्यवाहनाय स्वाहा ।’ इस मंत्र से पहली आहुति , ‘सोमाय पितृमते स्वाहा ।’ इससे दूसरी आहुति  एवं ‘वैवस्वताय स्वाहा ।’ कहकर तीसरी आहुति देने …

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