Gurubhaktiyog

बाबा बुल्ले शाह कथा प्रसंग (भाग – 2)


आज बुल्लेशाह सूर्य की पहली किरणों के साथ ही हवेली से निकल पड़े गुरु की तलाश में। उपर सूर्य तप रहा था और यहाँ बुल्लेशाह भी अतप्त न रहा। एक तो सीने की दाह और उपर से सूर्य का आक्रोश। भूख-प्यास से व्याकूल बुल्लेशाह एक इमली के पेड़ के नीचे बैठ गए। तन की तपन …

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बाबा बुल्ले शाह कथा प्रसंग (भाग -1)


गुरूभक्तियोग के अभ्यास से अमरत्व, सर्वोत्तम शान्ति और शाश्वत आनन्द प्राप्त होता है। गुरु के प्रति भक्ति अखूट और स्थायी होनी चाहिए।गुरुभक्तों की शृंखला में एक नाम साँई बुल्लेशाह का भी आता है।जिसे लोग बड़े ही आदर से याद करते हैं। बड़े-2 संत-महापुरुष बुल्लेशाह की गुरुभक्ति की तारीफ करते हैं।बुल्लेशाह की महानता किसी मत-पंथ, मजहब, …

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सन 2011 ब्रह्मपुरी ऋषिकेश की यह मधुर घटना तब की है जब पूज्य बापूजी वहां पधारे थे


जिस प्रकार जब बालक धीरे-2 कदम रखता है और स्वतंत्र रीति से चलने की कोशिश करता है तब कभी-2 गिर पड़ता है और फिर खड़ा होता है तथा मां की सहायता की जरूरत पड़ने पर उसकी सहायता मांगता है । इसी प्रकार साधना के प्रारम्भ के स्तरों में शिष्य को करुणामयी गुरु की सहायता एवम् …

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