बाबा बुल्ले शाह कथा प्रसंग (भाग – 2)
आज बुल्लेशाह सूर्य की पहली किरणों के साथ ही हवेली से निकल पड़े गुरु की तलाश में। उपर सूर्य तप रहा था और यहाँ बुल्लेशाह भी अतप्त न रहा। एक तो सीने की दाह और उपर से सूर्य का आक्रोश। भूख-प्यास से व्याकूल बुल्लेशाह एक इमली के पेड़ के नीचे बैठ गए। तन की तपन …