Gurubhaktiyog

समय रहते उनसे जगदीश्वर की मुलाकात का पाठ पढ़ लें


◆ एक बार सूफी संत मौलाना जलालुद्दीन अपने शिष्यों के बीच बैठे थे । सब कीर्तन ध्यान की मस्ती में मस्त थे । किसी कॉलेज के प्रोफेसर अपने मित्रों के साथ घूमते-घामते वहाँ आ पहुँचे । उन्होंने सुना था कि ‘यहाँ ध्यान, साधना कराने वाले और आत्मविद्या का प्रसाद बाँटने वाले एक अलमस्त फकीर और …

Read More ..

सब रोगों की औषधि : गुरुभक्ति


◆ हम लोगों के जीवन में दो तरह के रोग होते हैं- बहिरंग और अन्तरंग। बहिरंग रोगों की चिकित्सा तो डॉक्टर लोग करते हैं और वे इतने दुःखदायी भी नहीं होते हैं जितने कि अन्तरोग होते हैं। ◆ हमारे अन्तरंग रोग हैं काम, क्रोध, लोभ और मोह.भागवत में इस एक-एक रोग की निवृत्ति के लिए …

Read More ..

अंतरात्मा में सुखी रहो और सुखस्वरूप हरि का प्रसाद बाँटो


(संत श्री आशाराम जी बापू के सत्संग प्रवचन से ) भारतीय संस्कृति कहती हैः ● सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु । सर्वः सद्बुद्धिमाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु ।। ● सर्वस्तरतु दुर्गाणि…. हम सब अपने दुर्ग से, अपने-अपने कल्पित दायरों से, मान्यताओं ते तर जायें । सर्वो भद्राणि पश्यतु… हम सब मंगलमय देखें । सर्वः सद्बुद्धिमाप्नोतु…. हम …

Read More ..