समय रहते उनसे जगदीश्वर की मुलाकात का पाठ पढ़ लें
◆ एक बार सूफी संत मौलाना जलालुद्दीन अपने शिष्यों के बीच बैठे थे । सब कीर्तन ध्यान की मस्ती में मस्त थे । किसी कॉलेज के प्रोफेसर अपने मित्रों के साथ घूमते-घामते वहाँ आ पहुँचे । उन्होंने सुना था कि ‘यहाँ ध्यान, साधना कराने वाले और आत्मविद्या का प्रसाद बाँटने वाले एक अलमस्त फकीर और …