Gurubhaktiyog

लक्ष्य ठीक तो सब ठीक..


गुरु-सन्देश – लक्ष्य न ओझल होने पाये,कदम मिलाकर चल।सफलता तेरे चरण चूमेगी,आज नहीं तो कल ।। एक मुमुक्ष ने संत से पूछा :”महाराज मै कौन सी साधना करूँ ?”संत बड़े अलमस्त स्वभाव के थे । उनकी हर बात रहस्यमय हुआ करती थी।उन्होंने जवाब दिया : “तुम बड़े वेग से चल पड़ो तथा चलने से पहले …

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तू फिर आयेगा और वह आया- आपमें रोमांच भर देगी यह कथा


अध्यात्मिक मार्ग तीक्ष्ण धार वाली तलवार का मार्ग है जिनको इस मार्ग का अनुभव है, ऐसे गुरू की अनिवार्य आवश्यकता है । अपने सब अहम भाव का त्याग करो और गुरू के चरण-कमलों में अपने आप को सौंप दो । गुरू आपको मार्ग दिखाएंगे और प्रेरणा देंगे, मार्ग में आपको स्वयं ही चलना होगा । …

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गुरू ने लेटे-लेटे ही की कुछ ऐसी लीला कि शिष्य की निष्ठा अटल हो गई ।


गुरू के प्रति भक्ति-भाव होना अध्यात्मिक निर्माण कार्य की नींव है । भावना का उफान या उत्तेजना गुरू भक्ति नहीं कहलाता । शरीर प्रेम यानि गुरू प्रेम का इन्कार, शिष्य अगर अपने शरीर की देखभाल करता है तो वह गुरू की सेवा नहीं कर पाता । साधक के दुष्ट स्वभाव के नाश का एकमात्र उपाय …

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