ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

कठिनाइयों, विरोधों को बना सकते हैं शक्ति का स्रोत !


एक सज्जन व्यक्ति थे । उनका एक नौकर था जो कोई काम सही तरीके से नहीं करता था । उसके काम करने का ढंग ऐसा था की धीर से धीर व्यक्ति भी उसे देखकर आपे से बाहर हो जाय परंतु उसका मालिक बड़ा साधु स्वभाव का था । वह न तो नौकर से खिन्न होता …

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‘यह’, ‘वह’ के द्रष्टा ‘मैं’ की असलियत जानो तो पार…. पूज्य बापू जी


दुनिया का व्यवहार तीन ढंग से देखा गया है । एक तो ‘यह’ – जो रू बरू है, यह वस्तु यह व्यक्ति…. दूसरा ‘वह’ – वह वस्तु, वह व्यक्ति, वह भगवान… तीसरा ‘मैं’ । ‘यह’, ‘वह’ और ‘मैं’ – इन तीन से ही सारा  व्यवहार सम्पन्न होता है । ‘यह’ को जानने में ‘मैं’ की …

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खर्चा एक कौड़ी का नहीं और पुण्य हो ढेर सारा ! पूज्य बापू जी


कलियुग का एक विशेष प्रताप है कि मानसिक पुण्य करो तो फलदायी हो जायेगा लेकिन मन से पाप करो तो कलियुग में उस पाप का फल अपने को नहीं मिलेगा । मन में आयाः ‘यह ऐसा है- वैसा है… यह करूँ…. वह करूँ….’ तो पाप नहीं लगेगा, जब तक वह कर्म नहीं किया । और …

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