श्रद्धा का बल, हर समस्या का हल-पूज्य बापू जी
मंत्रे तीर्थे द्विजे देवे दैवज्ञे भेषजे गुरौ । यादृशी भावना यस्य सिद्धिभवति तादृशी ।। स्कन्द पुराण, प्रभास खंडः 278.39 मंत्र, तीर्थ, ब्राह्मण, देवता, ज्योतिषी, औषध और गुरु में जैसी भावना होती है वैसा ही फल मिलता है । संत नामदेव जी के पूर्व जीवन की एक कहानी है । युवक नामदेव का मन विठ्ठल में …