ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

गुरु की परम प्रसन्नता कौन पाता है ?


शंकर नाम का एक बालक गुरु-आश्रम में रहकर अध्ययन करता था । उसकी कुशाग्र बुद्धि, ओजस्वी प्रतिभा एवं नियम-पालन में निष्ठा से उसके गुरु और अन्य साथी उस पर अत्यंत प्रसन्न थे । आश्रम का नियम था कि एक शिष्य दिन में एक ही घर से भिक्षा प्राप्त करेगा । एक दिन शंकर भिक्षा माँगने …

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पूज्य बापू जी के अमृतवचन


शरीर से वियोग हुआ है, मेरे आत्मा से नहीं मनुष्य जन्म अपने आत्मा को, अपने सत्-चित्-आनंदस्वरूप को जानने के लिए ही मिला है, संसार के इन्द्रियों के सुख भोगने के लिए नहीं मिला है। संसार में कुछ भी पाया लेकिन अपने सत्-चित्-आनंदस्वरूप, आत्मस्वरूप को नहीं जाना तो व्यक्ति आखिर में खाली-का-खाली रह जायेगा। मेरा और …

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माँ का यह वाक्य मैं कभी नहीं भूला-संत विनोबा भावे जी


साहित्य देवता के लिए मेरे मन में बड़ी श्रद्धा है । बचपन में करीब 10 साल तक मेरा जीवन एक छोटे से देहात में ही बीता । जब मैं कोंकण के देहात में था, तब पिता जी कुछ अध्ययन और काम के लिए बड़ौदा रहते थे । दीवाली के दिनो में वे अकसर घर पर …

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