सच्चे कर्मवीरो ! अमृतकलश उठाओ… आगे बढ़ते रहो !
भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाह जी महाराज नवयुवको ! पृथ्वी जल रही है । मानव समाज में जीवन के आदर्शों का अवमूल्यन हो रहा है । अधर्म बढ़ रहा है, दीन-दुःखियों को सताया जा रहा है, सत्य को दबाया जा रहा है । यह सब कुछ हो रहा है फिर भी तुम सो रहे हो ! …