इच्छामात्र छोड़ो और आनंद-ब्रह्मानुभूति करो
स्वामी अखंडानंद जी सरस्वती मैं एक दिन ऋषिकेश में स्वर्गाश्रम में गंगाकिनारे बैठा था। एक मित्र मेरे पास आकर बैठ गया और बोलाः “स्वामी जी ! संसार में किसी से मेरी आसक्ति नहीं है। मुझे आनंद चाहिए। इसके लिए आप जो आज्ञा करोगे, मैं वहीं करूँगा। यदि आप कहोगे तो विवाह भी कर सकता हूँ …