ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

ईश्वर में मन लगायें या पढ़ाई में ?


ईश्वर में मन लगायें कि नहीं लगायें ? अगर ईश्वर में मन लगायें तो फिर पढ़ने में कैसे लगेगा ? बताओ, अब क्या करना चाहिए बच्चों को ? बोले, ‘मन लगा के पढ़ना चाहिए।’ यह बात भी सच्ची है। फिर बोलते हैं- ‘ईश्वर के सिवाय कहीं भी मन लगाया तो अंत में रोना ही पड़ेगा …

Read More ..

राधा जी को भगवान श्रीकृष्ण का तत्त्वोपदेश


जन्माष्टमी पर स्वयं भगवान के श्रीमुख से उनके स्वरूप-अमृत का पान एक बार भगवान श्रीकृष्ण द्वारका से वृंदावन पधारे। उस समय उनकी वियोग-व्यथा से संतप्त गोपियों की विचित्र दशा हो गयी। प्रिय-संयोगजन्य स्नेहसागर की उन्मुक्त तरंगों में उनके मन और प्राण डूब गये। गोपीश्वरी राधिका जी मूर्च्छित हो गयीं और साँस लेना भी बंद हो …

Read More ..

सच्चिदानंद परब्रह्म-परमात्मा की अवस्थाएँ-पूज्य बापू जी


एक होता है निर्विशेष शाश्वत ज्ञान और दूसरा होता है सापेक्ष, सविशेष ज्ञान। सापेक्ष, सविशेष ज्ञान में तो अदल-बदल होती रहती है लेकिन निरपेक्ष ज्ञान, शाश्वत ज्ञान ज्यों का त्यों है। उस ज्ञान की मृत्यु नहीं होती, जन्म नहीं होता। वही ज्ञान ब्रह्म है। वही ज्ञान परमात्मा का परमात्मा है, ईश्वरों का ईश्वर है। उसी …

Read More ..