कौन मुक्त हो जाता है ?
महाभारत (आश्वमेधिक पर्व अध्याय 19 ) में आता हैः अनमित्रश्च निर्बन्धुरनपत्यश्च य क्वचित्। त्यक्तधर्मार्थकामश्च निराकाङ्क्षी च मुच्यते।। ‘जो किसी को अपना मित्र, बंधु या संतान नहीं मानता, जिसने सकाम धर्म, अर्थ और काम का त्याग कर दिया है तथा जो सब प्रकार की आकांक्षाओं से रहित है, वह मुक्त हो जाता है।’ (श्लोकः 6) नैव …