ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

कौन मुक्त हो जाता है ?


महाभारत (आश्वमेधिक पर्व अध्याय 19 ) में आता हैः अनमित्रश्च निर्बन्धुरनपत्यश्च य क्वचित्। त्यक्तधर्मार्थकामश्च निराकाङ्क्षी च मुच्यते।। ‘जो किसी को अपना मित्र, बंधु या संतान नहीं मानता, जिसने सकाम धर्म, अर्थ और काम का त्याग कर दिया है तथा जो सब प्रकार की आकांक्षाओं से रहित है, वह मुक्त हो जाता है।’ (श्लोकः 6) नैव …

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कितना ख्याल रखते हैं अंतर्यामी गुरुदेव !


एक साधिका बहन ने अपने जीवन में घटित एक प्रेरणादायी प्रसंग बतायाः लगभग सन् 1980 की बात है। पूज्य बापू जी गंगा-किनारे एकांतवास हेतु अहमदाबाद से हरिद्वार जाने वाले थे। उससे एक दिन पहले पूज्य श्री ने मुझसे कहाः “बेटी ! अपनी माँ की अच्छी तरह से सेवा करना।” मुझे आश्चर्य हुआ कि ‘बापू जी …

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अमरदास जी ने पाया अमर पद – पूज्य बापू जी


(गुरु अमरदास जी पुण्यतिथिः 6 सितम्बर) सिख धर्म के आदिगुरु नानकदेव जी के बाद उनकी गद्दी पर बैठे थे गुरु अंगद देव। अंगददेव जी की बेटी बीबी अमरो की शादी जिसके साथ हुई थी, उसके चाचा का नाम था अमरदास। अमरदास भगवान को तो मानते थे, हर साल तीर्थयात्रा करते और गंगा में नहाने भी …

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