ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

सामर्थ्य का उदगम स्थानः अंतरात्मा – पूज्य बापू जी


  (योगी गोरखनाथ जी जयंतीः 20 फरवरी) गोरखनाथ जी नेपाल से वापस जा रहे थे। नीलकंठ की यात्रा करके लौटे हुए नेपालियों को पता चला कि गोरखनाथ जी यहाँ हैं तो उनको दर्शन करने की उत्सुकता हुई। उस समय नेपाल नरेश महेन्द्र देव इतना धर्मांध हो गया था कि सनातन धर्म को अपनी मति के …

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मान किसका स्थिर रहता है ?


पूज्य बापू जी जो मान के योग्य कर्म करता है लेकिन मान की इच्छा नहीं रखता, उसका मान स्थिर हो जाता है। भगवान मान के योग्य कर्म करते हैं लेकिन भगवान में मान की इच्छा नहीं इसलिए भगवान का मान है। ऐसे ही समर्थ रामदासजी, एकनाथ जी, तुकाराम जी, साँईं लीलाशाह जी बापू, रमण महर्षि …

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मनुष्य-जीवन की विलक्षणता


परब्रह्म परमात्मा में, जो अपना स्वरूप ही है, तीन भाव माने जाते हैं – सत्, चित्त और आनंद। मनुष्य में इन्हीं भावों का जब विकास होता है, तभी उसमें 5 अथवा अधिक कलाओं का विकास माना जाता है। यह विकास मनुष्य में ही सम्भव है, अतः मनुष्य शरीर दुर्लभ है। सत् के विकास में कर्म …

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