ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

Rishi Prasad 270 Jun 2015

चार प्रकार के शिष्य


उत्तम शिष्य तो आध्यात्मिक प्रश्न करने की जरूरत ही नहीं समझता है, गुरु के उपदेश मात्र से, विवेक से ही उसको ज्ञान हो जाता है। मध्यम शिष्य कभी-कभार साधन-विषय का प्रश्न पूछकर बात को पा लेता है, समझ लेता है और तीसरे नम्बर का जो शिष्य है उसको बहुत सारे साधन-भजन की आवश्यकता पड़ती है। …

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Rishi Prasad 270 Jun 2015

गुरुदेव की अंतर्वाणी


हे साधक ! ‘अपने उस आत्मस्वरूप को, मधुरस्वरूप को, मुक्तस्वरूप को हम पाकर रहेंगे’ – ऐसा दृढ़ निश्चय कर। विघ्न बाधाओं के सिर पर पैर रखता जा। यह मन की माया कई जन्मों से भटका रही है। अब इस मन की माया से पार होने का संकल्प कर। कभी काम, क्रोध, लोभ में तो कभी …

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Rishi Prasad 269 May 2015

स्वास्थ्य हितकारी कुम्हड़ा


मधुर, शीतल, त्रिदोषहर (विशेषतः पित्तशामक), बल-शुक्रवर्धक, शरीर को हृष्ट पुष्ट बनाने वाला तथा अल्प मूल्य में सभी जगह सुलभ कुम्हड़ा गर्मियों में विशेष सेवनीय है। कुम्हड़ा मस्तिष्क को बल व शांति प्रदान करता है। यह धारणाशक्ति को बढ़ाकर बुद्धि को स्थिर करता है। यह अनेक मनोविकार जैसे स्मृति-ह्रास, क्रोध, विभ्रम, उद्वेग, मानसिक अवसाद, असंतुलन, चिड़चिड़ापन, …

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