ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आदर्श नर-नारी का परस्पर कैसा हो दृष्टिकोण ?


आदर्श नर-नारी का परस्पर कैसा हो दृष्टिकोण ? प्रश्नः यदि नारी को नर भोग्या समझता है तो इसमें क्या दोष है ? स्वामी अखंडानंद जीः अनेक दोष हैं- एकमात्र परमात्मा ही सत्य है – इस तात्त्विक सिद्धांत से च्युत हो जाना । अपने को देहाभिमानी भोक्ता मान बैठना । नारी को पंचभौतिक पुतला मानकर उसके …

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साधक किस संग से बचे और कैसा संग करे ? – पूज्य बापू जी


आत्मज्ञान पाया नहीं, आत्मा में स्थिति अभी हुई नहीं, अभ्यास और वैराग्य है नहीं तो ऐसे साधक के लिए शास्त्रकार कहते हैं और अनुभवी महापुरुषों का अनुभव है कि हलकी वृत्ति के लोगों के बीच उठना-बैठना साधक के लिए हानिकारक है । जो मंदमति हैं, जिनका आचार-विचार, खान-पान मलिन है और जिनकी दृष्टि मलिन है, …

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सद्गुरु की युक्ति को मूर्खता से त्यागो मत


पूज्य श्री के पावन सान्निध्य में श्री योगवासिष्ठ महारामायण का पाठ चल रहा हैः महर्षि वसिष्ठ जी बोलेः ″हे राम जी ! एक दिन तुम वेदधर्म की प्रवृत्ति सहित सकाम यज्ञ, योग आदिक त्रिगुणों से रहित होकर स्थित हो और सत्संग व सत्शास्त्र परायण हो तब मैं एक ही क्षण में दृश्यरूपी मैल दूर कर …

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