ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

परिप्रश्नेन


प्रश्नः भगवत्कृपा, संतकृपा और गुरुकृपा क्या है ? पूज्य बापू जीः भगवत्कृपा है कि तुम्हें संसार फीका लगने लगे और भगवद्-शांति, भगवद्-ज्ञान, भगवद्-रस में सार दिखने लगे । कैसी भी मुसीबत में से निकलने का रास्ता दे देते हैं । भगवान कहते हैं- ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् । जो मुझे जिस भाव से, …

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तीन सच्चे हितैषी – पूज्य बापू जी


सच्चे हितैषी तीन ही होते हैं- 1. संयमी, सदाचारी, शांत मन हमारा हितैषी है । जो मन में आया वह करने लगे या मन के गुलाम बने तो वह मन हमारा शत्रु है । जो मन संयमित है, शांत है वही हमारा हितैषी है । असयंमित, अशांत मन तबाही देता है । 2. इष्टदेव हमारे …

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दशरथ की सभा में छलका जनक जी के दूतों का ज्ञानामृत


जब राजर्षि जनक के दूतों ने महाराज दशरथ को भगवान श्रीरामचन्द्र जी द्वारा शिव-धनुष टूटने का समाचार सुनाया तब भाव से उनका हृदय भर आया और अत्यधिक स्नेह के कारण वे अपने पद की गरिमा भूल गये और दूतों को पास बैठाकर कहने लगेः ″भैया कहहु कुसल दोउ बारे । भैया ! क्या मेरे दोनों …

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