संस्कृति की रक्षा व सेवा के लिए संगठित हो जाओ – पूज्य बापू जी
(26 फरवरी 2006 को नासिक में किया गया सत्संग) मेरे से किसी ने पूछाः “जयेन्द्र सरस्वती महाराज को आपने कैसे बुलाया ? उन पर तो आरोप था !” अरे, वे निर्दोष सज्जन, संत ! मैंने उनको हृदयपूर्वक, अच्छी तरह से परखा है। वे ऐसा कर नहीं सकते और अभी झूठा आरोप तो किसी पर …