ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आप कहाँ समय लगा रहे हैं ? – पूज्य बापू जी


व्यक्ति ज्यों छोटे विचारों को महत्त्व देता है त्यों धीरे-धीरे पतन की खाई में गिरता है और ज्यों-ज्यों वफादारी से सेवा को महत्त्व देता है त्यों-त्यों उन्नति के शिखर पर चढ़ता जाता है । अपनी योग्यता चाहे अभी न के बराबर हो लेकिन जो योग्यता है उसे ईश्वर की प्रीति के लिए, धर्म की सेवा-रक्षा …

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दीप-प्रज्वलन अनिवार्य क्यों ?


भारतीय संस्कृति में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, सामाजिक वसांस्कृतिक कार्यक्रमों में दीपक प्रज्वलित करने की परम्परा है । दीपकहमें अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करके पूर्ण ज्ञान को प्राप्त करने कासंदेश देता है । आरती करते समय दीपक जलाने के पीछे उद्देश्य यहीहोता है कि प्रभु हमें अज्ञान-अंधकार से आत्मिक ज्ञान-प्रकाश की ओर लेचलें । मृत्यु से …

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परिप्रश्नेन


प्रश्नः भगवत्कृपा, संतकृपा और गुरुकृपा क्या है ?पूज्य बापू जीः भगवत्कृपा है कि तुम्हें संसार फीका लगने लगेऔर भगवद्-शांति, भगवद्-ज्ञान, भगवद्-रस में सार दिखने लगे । कैसीभी मुसीबत या कठिनाई आ जाय, आर्तभाव से भगवान को पुकारो तो वेमुसीबत में से निकालने का रास्ता देते हैं ।भगवान कहते हैं-ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् ।जो …

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