ज्ञानसंयुक्त कर्म करें
(पूज्य बापू जी की पावन अमृतवाणी) जीवन में ज्ञान पहले और कर्म बाद में हो। और ज्ञान भी उत्तम ज्ञान… कर्म करने का ज्ञान नहीं, कर्म के परिणाम का ज्ञान। किस कर्म से भगवत्प्रेम, भगवदशांति, भगवन्माधुर्य, स्वतन्त्रता और जीवन रसमय होगा, वह ज्ञान मिले तो आपके कर्म दिव्य कर्म होते हैं। ज्ञान में तो दो …