ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

विद्या क्या है ? – पूज्य बापू जी


  विद्या ददाति विनयम्। विद्या से विनय प्राप्त होता है। यदि विद्या पाकर भी अहंकार बना रहा तो ऐसी विद्या किस काम की ! ऐसी विद्या न तो स्वयं का कल्याण करती है न औरों के ही काम आती है। एक समय जयपुर में राजा माधवसिंह का राज्य था। राज्य-सिंहासन पर बैठने से पूर्व माधवसिंह …

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ठग सुक्खा सलाखों के पीछे


कहते हें- विनाशकाले विपरीतबुद्धिः। जब गीदड़ की मौत आती है तब वह शहर की ओर भागता है। ऐसा ही हुआ ठग सुखाराम के साथ जिसने पूज्य बापू जी जैसे महान, पवित्र, ब्रह्मज्ञानी संत को बदनाम करने की साजिश की। शायद उसे यह पता नहीं था कि संत सताये तीनों जायें, तेज, बल और वंश। ऐसे …

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सुख का विज्ञान


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) प्राणिमात्र का एक ही उद्देश्य है कि हम सदा सुखी रहें, कभी दुःखी न हों। सुबह से शाम तक और जीवन से मौत तक प्राणी यही करता है – दुःख को हटाना और सुख को थामना। धन कमाते हैं तो भी सुख के लिए, धन खर्च करते हैं तो …

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