ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

गुरुभक्तियोग


किसी भी प्रकार के ज्ञान के उद्भव के लिए बाह्य साधन, कर्म या क्रिया आवश्यक है । अतः साधक में ज्ञान का आविर्भाव करने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है । परस्पर प्रभावित करने की सार्वत्रिक प्रक्रिया के लिए एक-दूसरे के पूरक दो भाग के रूप में गुरु-शिष्य हैं । शिष्य में ज्ञान का …

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जब प्याला पिया गुरु प्रेम का, होगा असर किस जहर का ?


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) वसिष्ठ जी महाराज ‘श्रीयोगवासिष्ठ महारामायण’ में कहते हैं- “हे राम जी ! त्रिभुवन में ऐसा कौन है जो संत की आज्ञा का उल्लंघन करके सुखी रह सके ?” संत परम हितकारी होते हैं । वे जो कुछ कहें, उसका पालन करने के लिए डट जाना चाहिए । इसी में …

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संसार से तरने का उपाय


परम तत्त्व के रहस्य को जानने की इच्छा से ब्रह्मा जी ने देवताओं के सहस्र वर्षों (देवताओं का एक वर्ष = 365 मानुषी वर्ष) तक तपस्या की । उनकी उग्र तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान महाविष्णु प्रकट हुए । ब्रह्मा जी ने उनसे कहाः ! भगवन् ! मुझे परम तत्त्व का रहस्य बतलाइये । परमतत्त्वज्ञ …

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