ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

भक्त मोहन


(अमदावाद में मार्च 2001 में आयोजित विद्यार्थी शिविर में देश के नन्हें-नन्हें भावी कर्णधारों को प्रेरक प्रसंग के माध्यम से भक्तिकी महिमा समझाते हुए पूज्य श्री ने कहाः) मोहन की माँ ने उसे पढ़ने के लिए गुरुकुल में भेजा। मोहन के पिता का बचपन में ही स्वर्गवास हो गया था। गरीब ब्राह्मणी ने अपने इकलौते …

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अन्तःकरण के मुख्य दोष


(जाबल्य ऋषि की तपस्थली, साबरमती के तट पर बने मोटेरा आश्रम में पूज्य श्री ने अंतःकरण के मुख्य दोषों पर प्रकाश डालते हुए अपने प्यारे साधकों को कहाः) भक्तियोग, ज्ञानयोग और कर्मयोग का आखिरी फल तो एक ही हैः उस परमतत्व को जानना, जो सत्यस्वरूप है, ज्ञानस्वरूप है और अनंत है। श्रुति कहती हैः सत्यं …

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विवेक जागृत रखो


(गीतामर्मज्ञ पूज्य श्री गीताज्ञान की पावन गंगा बहाते हुए अपने प्यारे श्रोताओं को कितना सहज में ज्ञानामृत देते हैं उसका एक साक्ष्य आपके समक्ष प्रस्तुत है।) श्रीमद् भगवद् गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः। आगमापायिनोsनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।। ‘हे कुन्तीपुत्र ! सर्दी-गर्मी और सुख-दुःख को देने वाले इन्द्रिय और विषयों के संयोग तो उत्पत्ति-विनाशशील …

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