ऐसे महापुरुष में श्रद्धा हो तो कल्याण हो जाय
महापुरुषों के दर्शन, सत्संग, चिंतन से शांति मिलती है, पाप, पाप-वासनाएँ पलायन और पुण्य, पुण्य-प्रवृत्तियाँ शुरु होने लगती हैं । उनके संग (सत्संग-सान्निध्य) से उनके अनेक गुण-सरलता, शांति, आनंद, समता, ज्ञान, वैराग्य, उपरामता आदि स्वतः ही हमारे में आ जाते हैं । जिसमें जितनी श्रद्धा होगी वह उनता ही महापुरुषों के गुणों को ग्रहण करने …