ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

ऐसे महापुरुष में श्रद्धा हो तो कल्याण हो जाय


महापुरुषों के दर्शन, सत्संग, चिंतन से शांति मिलती है,  पाप, पाप-वासनाएँ  पलायन और पुण्य, पुण्य-प्रवृत्तियाँ शुरु होने लगती हैं । उनके संग (सत्संग-सान्निध्य) से उनके अनेक गुण-सरलता, शांति, आनंद, समता, ज्ञान, वैराग्य, उपरामता आदि स्वतः ही हमारे में आ जाते हैं । जिसमें जितनी श्रद्धा होगी वह उनता ही महापुरुषों के गुणों को ग्रहण करने …

Read More ..

यह कर लो सारी परेशानियाँ भाग जायेंगी ! – पूज्य बापू जी


एक होती है सत्-वस्तु, दूसरी होती है मिथ्या वस्तु । मन की जो कल्पनाएँ, जो फुरने हैं वह है मिथ्या वस्तु । ‘यह करूँगा तो सुखी होऊँगा’, ‘यह पाऊँगा तो सुखी होऊँगा’, ‘यहाँ जाऊँगा’ तो सुखी होऊँगा’…. इन वस्तुओं में उलझ-उलझकर है आपने अपने जीवन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला है । सत्-वस्तु से तात्पर्य है …

Read More ..

अपनी निष्ठा पक्की करनी चाहिए !


जो भी निष्ठा होती है उसकी अपनी एक प्रक्रिया होती है । उसमें साधन, स्थिति और फल क्या होता है – वह सब बिल्कुल पक्का होता है । भगवद्भक्त की निष्ठा जिसके हृदय में ईश्वर भक्ति है उसका बल है ईश्वर-विश्वास । चाहे रोग आये, चाहे शोक आये, चाहे मोह, लोभ या विरोध आयें, चाहे …

Read More ..