ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

जमीकन्द-सूरन


आयुर्वेद के मतानुसार सभी प्रकार की कन्द-सब्जियों में सूरन सर्वश्रेष्ठ है। बवासीर के रोगियों को आज भी वैद्य सूरन एवं छाछ पर रहने के लिए कहते हैं। आयुर्वेद में इसीलिए इसे ʹअर्शोघ्नʹ भी कहा गया है। गुणधर्मः सूरन की दो प्रजातियाँ पायी जाती हैं-लाल और सफेद। लाल सूरन को काटने से हाथ में खुजली होती …

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चार प्रकार के बल


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से जीवन में सर्वांगीण उन्नति के लिए चार प्रकार के बल जरूरी हैं- शारीरिक बल, मानसिक बल, बौद्धिक बल, संगठन बल। पहला बल है शारीरिक बल। शरीर तंदरुस्त होना चाहिए। मोटा होना शारीरिक बल नहीं है, वरन् शरीर स्वस्थ होना शारीरिक बल है। दूसरा बल है मानसिक बल। जरा-जरा …

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कर्म ही पूजा है


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्यं सिद्धिं विन्दति मानवः।। ʹजिस परमात्मा से सर्वभूतों की उत्पत्ति हुई है और जिससे यह सर्व जगत व्याप्त है उस परमेश्वर को अपने स्वाभाविक कर्म द्वारा पूजकर मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त होता है।ʹ (श्रीमद् भगवद् गीताः 18.46) अपने स्वाभाविक कर्मरूपी पुष्पों …

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