ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

जीवन में दोष किस तरह आते हैं ?


दोषों से बचना है तो जीवन में दोष किस तरह आते हैं यह बात समझना बहुत आवश्यक है । इस संदर्भ में एक घटित प्रसंग बताते हुए भी हनुमान प्रसाद पोद्दार जी कहते हैं कि ‘मेरे एक मित्र कलकत्ता (कोलकाता) में रहते थे । वे घुड़दौड़ में जाते थे । धीरे-धीरे वे क्लब में जाने …

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भगवान उसी पर खुश होते हैं – पूज्य बापू जी


भगवान उसी पर खुश होते हैं जो माता-पिता को देव समान मानता है – ‘सर्वतीर्थमयी माता, सर्वदेवमयः पिता’ और गुरु में ब्रह्मा जी को देखता है, गुरु में विष्णु जी को देखता है, गुरु को शिवजी में देखता है तथा शिवजी को गुरु में देखता है । गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुर्साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे …

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सफलतारूपी लक्ष्मी पुरुषार्थी का ही वरण करती है – पूज्य बापू जी


सदाचार और शास्त्र-सम्मत पुरुषार्थ से अपनी सफलता का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए । सफलतारूपी लक्ष्मी हमेशा पुरुषार्थी व्यक्ति का ही वरण करती है । आलस्य, प्रमाद या पलायनवादिता को झाड़ फेंके । पुरुषार्थ परम देव हैं । बीते हुए कल का पुरुषार्थ आज का प्रारब्ध है । सफलता मिलने पर उसका गर्व नहीं करना चाहिए …

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