ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

परमात्मा का गोत्र


परमात्मा के गुणों में से एक गुण है ‘अगोत्रं‘ । वंश का जो मूल पुरुष होता है, उससे गोत्र चलता है । जैसे  पराशर, गर्ग, गौतम, शांडिल्य आदि गोत्र हैं । जिनका गोत्र ज्ञात नहीं हैं  उनके लिये धर्मशास्त्र ने नियम किया है – अज्ञातगोत्राणां सर्वेषां कश्यपगोत्रत्वम् । सब अज्ञात गोत्र लोगों का कश्यप गोत्र …

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मानवमात्र का धर्म और परम धर्म


एक शरीर और उसकें संबंधियों में क्रमशः अहंता और ममता करके जीव ने स्वयं ही अपने आपको संसार के बंधन में जकड़ लिया है । अब धर्म का काम यह है कि जीव की अहंता और ममता को शिथिल करके उसे संसार के बंधन से सर्वदा के लिए छुड़ा दे । ऐसे धर्म का स्वरूप …

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यह है संसार की पोल ! –पूज्य बापू जी


एक भगत था, खानदानी लड़का था । वह कुछ ऐसे-वैसे संग में आ गया तो तो गुरु जी के पास जाना कम कर दिया । गुरु जी ने पूछाः बेटा ! आता क्यों नहीं ?” बोलाः “साँईं ! आपको क्या पता, शादी तो शादी है ! इतने दिन तो मैं अकेला था इसलिए आपके पास …

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